लोकसभा क्षेत्र बीकानेर- रिश्तों के 'भंवर' में फंसी है सीट, दो अधिकारियों के बीच मुकाबला

विश्व प्रसिद्ध देशनोक करणी माता की स्थली बीकानेर में इस बार लोकसभा चुनाव का मुकाबला काफी दिलचस्प बना हुआ है. अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह सीट इस बार रिश्तों के भंवर में फंसी हुई है.

Sandeep Rathore | News18 Rajasthan
Updated: May 16, 2019, 3:41 PM IST
लोकसभा क्षेत्र बीकानेर- रिश्तों के 'भंवर' में फंसी है सीट, दो अधिकारियों के बीच मुकाबला
फोटो आरटीडीसी।
Sandeep Rathore
Sandeep Rathore | News18 Rajasthan
Updated: May 16, 2019, 3:41 PM IST
विश्व प्रसिद्ध देशनोक करणी माता की स्थली बीकानेर में इस बार लोकसभा चुनाव का मुकाबला काफी दिलचस्प बना हुआ है. अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह सीट इस बार रिश्तों के भंवर में फंसी हुई है. यहां मुकाबला दो पार्टियों में होने के साथ ही दो भाइयों और दो रिटायर्ड अधिकारियों के बीच भी है. इस सीट पर यहां के मौजूदा सांसद एवं बीजेपी प्रत्याशी अुर्जनराम मेघवाल का मुकबला कांग्रेस प्रत्याशी मदन मेघवाल से है. मदन मेघवाल अर्जुनराम मेघवाल के मौसरे भाई हैं.

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18,49,433 मतदाताओं वाले इस लोकसभा क्षेत्र में गत दस साल से बीजेपी काबिज है. यहां इस बार बीजेपी प्रत्याशी अर्जुनराम मेघवाल हैट्रिक बनाने के लिए चुनाव मैदान में डटे हुए हैं. लेकिन कांग्रेस ने उनकी राह को कठिन बनाने के लिए उनके ही मौसरे भाई मदन मेघवाल को यहां ला खड़ा किया. इससे यहां मुकाबला रोचक हो गया है.

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एक मंजे हुए खिलाड़ी तो दूसरे नए नवेले
यहां बीजेपी प्रत्याशी अर्जुनराम मेघवाल राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी हैं. वे मोदी कैबिनेट में राज्यमंत्री भी हैं. वहीं कांग्रेस प्रत्याशी नए नेवले हैं. राजनीति में अनुभव का फर्क सबके सामने है. गत दस बरसों में अर्जुनराम ने मतदाताओं पर पकड़ बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, जबकि मदन गोपाल पूरी तरह से पार्टी के भरोसे चुनाव मैदान में डटे हैं.

अर्जुनराम मेघवाल। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
अर्जुनराम के पास अनुभव, लेकिन भाटी ने बिछा रखे हैं कांटे
अर्जुनराम के लिए इस चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्र के दिग्गज नेता देवी सिंह भाटी बने हुए हैं. भाटी कोलायत से कई बार विधायक रहने के साथ ही पूर्व में बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. भाटी और अर्जुनराम को 36 का आंकड़ा है. अदावत भी इस कदर है कि भाटी ने अर्जुनराम को टिकट मिलने की संभावनाओं के चलते पहले ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. उसके बाद वे खुलकर अर्जुनराम के खिलाफ मैदान में खिलाफत करने के लिए डट गए. उन्होंने इस मुहिम को मतदान तक जारी रखा.

मदन मेघवाल


भाटी की खिलाफत कितना असर दिखाएगी
भाटी के प्रभाव के चलते क्षेत्र के कई इलाकों में अर्जुनराम को विरोध भी झेलना पड़ा. खासतौर पर भाटी के गृह विधानसभा क्षेत्र कोलायत में. यह दीगर बात है कि भाटी की खिलाफत कितना असर दिखाएगी. वैसे भी भाटी के प्रभाव को निश्प्रभावी बनाने के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी यहां चुनावी सभा कर चुके हैं.

देवी सिंह भाटी।


59.24 फीसदी मतदाताओें ने मतदान किया है
बीकानेर पूर्व, बीकानेर पश्चिम, कोलायत, लूणकरणसर, डूंगरगढ़, नोखा, खाजूवाला और अनूपगढ़ विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर बने इस लोकसभा क्षेत्र में दो सीटें रिजर्व हैं. इनमें अनूपगढ़ और खाजूवाला विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. क्षेत्र के कुल 18,49,433 मतदाताओं में से इस बार 59.24 फीसदी मतदाताओें ने मतदान किया है.

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कांग्रेस ने मौका दिया तो भाई के सामने ला खड़ा किया
बीजेपी प्रत्याशी अर्जुनराम मेघवाल भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त हैं, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी मदन मेघवाल भारतीय पुलिस सेवा में रहे हैं. मदन मेघवाल ने पिछले विधानसभा चुनाव में खाजूवाला से भी टिकट की मांग की, लेकिन पार्टी ने मौका नहीं दिया. अब जब मौका दिया है तो भाई के ही सामने ला खड़ा किया है.

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दोनों के पास प्रशासनिक अनुभव है
दोनों की पृष्ठभूमि को देखें तो उनका राजनीति से कोई पुराना ताल्लुक नहीं रहा है. 12 दिसंबर 1963 में जन्मे मदन मेघवाल ने बीए तक पढ़ाई की है. पहली नौकरी एसबीबीजे बैंक में की. 1994 में आरपीएस बने. 2015 में पद्दोन्नत होकर आईपीएस बने. 15 नंवबर 2018 को वीआरएस लेकर राजनीति में आने की इच्छा जताई. अर्जुनराम मेघ‌वाल ने  प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त होकर राजनीति में आए. वह चूरू में कलेक्टर रह चुके हैं.

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