राजस्‍थान: यहां कांग्रेस-बीजेपी ही नहीं, भाई-भाई और IAS-IPS के बीच भी है मुकाबला

अर्जुनराम मेघ‌वाल। फाइल फोटो।
अर्जुनराम मेघ‌वाल। फाइल फोटो।

बीकानेर में इस बार लोकसभा चुनाव का मुकाबला केवल बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही नहीं है, बल्कि भाई-भाई और आईएएस व आईपीएस के बीच भी है.

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बीकानेर में इस बार लोकसभा चुनाव का मुकाबला केवल बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही नहीं है, बल्कि भाई-भाई और आईएएस व आईपीएस के बीच भी है. यहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों के ही प्रत्याशी रिश्ते में मौसेरे भाई हैं. वहीं, दोनों ही प्रत्याशी सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस अधिकारी हैं.

बीकानेर सीट पर बीजेपी ने ज्यादा माथापच्ची न करते हुए स्थानीय विरोध को दरकिनार कर अपने मौजूदा सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघ‌वाल को तीसरी बार टिकट देकर उन पर भरोसा जताया है. अर्जुनराम लगातार दो बार बीकानेर में जीत का परचम लहरा चुके हैं. वह इस बार फिर जीत की इबारत लिखकर हैट्रिक बनाने का सपना संजोए हुए हैं. लेकिन, इस बार कांग्रेस ने यहां बड़ा दांव खेलते हुए उन्हीं के मौसेरे भाई मदन मेघवाल को उनके सामने ला खड़ा किया है. हालांकि, दोनों ही प्रत्याशी रिश्ते को दूर रखकर राजनीति पर ज्यादा फोकस करते हुए अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. दोनों का साफ कहना है कि चुनाव में कोई भी रिश्ता अहम नहीं होता, बल्कि पार्टी सर्वोपरि होती है.

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मदन मेघवाल। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

रिश्ता कभी भी राजनीति के बीच नहीं आएगा
बीजेपी प्रत्याशी अर्जुनराम मेघवाल भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त हैं, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी मदन मेघवाल भारतीय पुलिस सेवा में रहे हैं. मदन मेघवाल ने पिछले विधानसभा चुनाव में खाजूवाला से भी टिकट की मांग की, लेकिन पार्टी ने मौका दिया है. अब जब मौका दिया है तो भाई के ही सामने ला खड़ा किया है. इनके परिजनों का कहना है कि रिश्ता कभी भी राजनीति के बीच नहीं आएगा और उन्हीं परिवार का कोई सदस्य जीत दर्ज करेगा. दोनों ही प्रत्याशियों का पुलिस एवं प्रशासनिक सेवा में रहते हुए राजनीति से कोई ताल्लुक नहीं रहा. दोनों ने सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति को अपना दूसरा करियर बनाया है.

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दोनों सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आए
दोनों की पृष्ठभूमि को देखें तो उनका राजनीति से कोई ताल्लुक नहीं रहा है. 12 दिसंबर 1963 में जन्मे मदन मेघवाल ने बीए तक पढ़ाई की है. पहली नौकरी एसबीबीजे बैंक में की. 1994 में आरपीएस बने. 2015 में पद्दोन्नत होकर आईपीएस बने. 15 नंवबर 2018 को वीआरएस लेकर राजनीति में आने की इच्छा जताई. अर्जुनराम मेघ‌वाल ने प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त होकर राजनीति में आए. वह चूरू में कलेक्टर रह चुके हैं.

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