देखें रम्मतों में कैसे-कैसे चले राजनीतिक व्यंग्य वाण

बीकानेर में होली के अवसर पर शहर के विभिन्न भागों में लोकनाट्य शैली की संगीत परंपरा रम्मतों में जमकर राजनीतिक व्यंग्य वाण चले.

Vikram Jagarwal | News18 Rajasthan
Updated: March 20, 2019, 9:28 PM IST
Vikram Jagarwal | News18 Rajasthan
Updated: March 20, 2019, 9:28 PM IST
बीकानेर में होली के अवसर पर शहर के अंदरूनी क्षेत्र में अलग-अलग रम्मतों का आयोजन किया जाता है. लोकनाट्य शैली की इस परम्परा का आयोजन विशेष रूप से होली की मस्ती के साथ लोगों में देश में चल रही घटनाओ की जानकारी देना भी होता है. रम्मतों में लावणी, चौमासा और ख्याल गीतों के माध्यम से श्रृंगार रस के साथ राजनीतिक पार्टियों पर भी व्यंग्य किया जाता है. आपको दिखाते है क्या होती है ये रम्मते .. रम्मत यानी खेल.. लोक नाट्य की एक शैली है जिसमे कलाकार सभी संवादों को गाकर प्रस्तुति देते हैं. देर रात को शुरू होने वाली ये रम्मतें सुबह तक चलती हैं. पहले भगवान की आराधना होती है और बाद में कलाकार श्रृंगार रस में होली की मस्ती की बात करते हैं तो वही आपसी भाईचारे और ख्याल के माध्यम से देश की वर्तमान परिस्थियों पर भी व्यंग्य करते हैं. इस बार कई रम्मतों में ख्याल गीतों से पाकिस्तान, आतंकवाद और देश के जवानों को याद किया गया. रम्मत कलाकार विजय कुमार ओझा ने बताया कि इस बार ख्याल गीत में माँ शक्ति से पाकिस्तान को मिटने की कामना की गई है.

होली पर आयोजित होने वाली इन रम्मतों को देखने के लिए होली के रसियों के साथ राजनीति से जुड़े लोग भी आते है और ख्याल गीत से राजनीति पर किए व्यंग्य को सुनते हैं. इस बार भट्ठडों के चौक में स्वांग मेहरी की रम्मत में- मत करो देश कमजोर, छोड़ दो आपस का बैर..  किकाणी व्यास चौक पर -आया चुनाव देश में मुद्दा उठावेला, एक दूसरे ने चोर बतावेला, खिचड़ी आ गठबंधन री मिलावेला ..तो नत्थूसर गेट की रम्मत में.. देख तमाशा लोरा का कुर्सी पर चढ़ कर बैठा, शासन फाफा फूलों का .. सरीके ख्याल गीतों से राजनीति पर कटाक्ष किए गए. यही कारण है कि लोग आज भी इन रम्म्तों को बड़े चाव से देखते हैं.
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