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छात्रसंघ चुनावः बीकानेर में बुधवार को 16 हजार छात्र 122 उम्मीदवारों का भविष्य करेंगे तय

छात्रसंघ चुनावः बीकानेर में बुधवार को 16 हजार छात्र 122 उम्मीदवारों का भविष्य करेंगे तय

बीकानेर में चुनाव प्रचाक करते हुए छात्र. फोटो-(ईटीवी)

बीकानेर में चुनाव प्रचाक करते हुए छात्र. फोटो-(ईटीवी)

इस बार बीकानेर में छात्रसंघ चुनावों का माहौल खासा गर्माया हुआ है. पहले एक छात्र नेता की हत्या और सोमवार को छात्र नेताओं को हिरासत में लेने से जेएनवीसी थाने में बवाल होने से माहौल गर्माया हुआ है.

    बीकानेर में भी छात्रसंघ चुनावों की रंगत परवान पर है. इस बार बीकानेर में चुनावों का माहौल खासा गर्माया हुआ है.

    पहले एक छात्र नेता की हत्या और सोमवार को छात्र नेताओं को हिरासत में लेने से जेएनवीसी थाने में बवाल होने से माहौल गर्माया हुआ है. छात्र संघ चुनावों के लिए बुधवार को वोटिंग होगी. 16 हजार के करीब छात्र मतदाता नौ कॉलेज और दो विश्वविद्यालयों में 122 उम्मीदवारों का भविष्य तय करेंगे.

    प्रत्याशी छात्र मतदाताओं को रिझाने में लगे हैं. घर-घर जाकर सम्पर्क किया जा रहा है. जोड़-तोड़ की राजनीति की जा रही है तो वहीं सोशल मीडिया पर भी खूब प्रचार-प्रसार किया जा रहा है.

    बीकानेर के राजकीय कोलेज, जैन कन्या, रामपुरिया कॉलेज, सेठ रावतमल बोथरा, वेटनरी कॉलेज और वेटेरनरी विवि में
    मुकाबला आमने-सामने हैं. जैन पीजी के चारों पदों पर त्रिकोणीय संषर्घ है क्योंकि यहां सभी पदों पर तीन-तीन उम्मीदवार टक्कर में हैं.

    राजकीय डूंगर कॉलेज में अध्यक्ष के लिए छह और एमएस कॉलेज में चार उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगा. महाराजा गंगासिंह और वेटेरनरी विवि में अब अध्यक्ष और संयुक्त सचिव के लिए भी मुकाबला सीधा है. उपाध्यक्ष और महासचिव निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं. तो वहीं कृषि विवि में चुनाव सीआर सिस्टम से चुनाव होंगे.

    बीकानेर में राजकीय डूंगर कॉलेज को छात्र राजनीति का गढ़ माना जाता है. डूंगर कॉलेज में सर्वाधिक करीब 9 हजार छात्र मतदाता हैं इसलिए सभी छात्र संगठनों की नजरें डूंगर कॉलेज के परिणामों पर ही रहती है.

    बीते सालों की तरह इस साल भी किसी भी छात्र संगठन और किसी भी उम्मीदवार ने एजेंडा घोषित नहीं किया. उच्च शिक्षा को लेकर समस्याएं पसरी हुई हैं राज.डूंगर-एमएस कॉलेज में वर्तमान से 50-50 शिक्षक ज्यादा चाहिए. सरकार ने सीटें बढ़ाई पर कक्षा और फैकल्टी नही बढ़ाई. एक-एक कक्षा में 100 से अधिक छात्रों को बैठने का इंतजाम है. सीटें बढ़ाने के साथ फैकल्टी और कक्षा कक्ष बढ़ाने की बात नहीं होती. कई सालों से यही हो रहा है. छात्र नेता भी वोट के लिए सिर्फ छात्र संख्या बढ़ाने की सोचते हैं.

    इस समस्या के निदान के लिए नहीं सोचते. सबसे बेहतर तरीका एमएस-डूंगर को एमजीएस विवि का संगठक कॉलेज बनाना था, लेकिन उस पर सरकार से लेकर छात्रनेता मौन हैं. गंगासिंह विवि में सिर्फ पांच फैकल्टी हैं. उसके विस्तार की भी जरूरत है.

    इंजीनयिरंग विवि की घोषणा हो गई, लेकिन इंजीनियरिंग कॉलेजों को संगठक कॉलेज बनाने का दबाव भी छात्रों की ओर से नहीं बनाया गया. जाहिर है छात्र नेता विकास की बात लेकर मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं, लेकिन छात्रों को उनसे एजेंडा पूछना चाहिए कि उनका इस साल चुनाव जीतने के बाद क्या लक्ष्य होगा, कॉलेज और उच्चशिक्षा के हित में क्या करेंगे?

    Tags: Bikaner news, Nsui

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