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हडूडा लोकोत्सव में नकली कुश्तियां देखने उमड़ी भीड़

हडूडा लोकोत्सव में नकली कुश्तियां देखने उमड़ी भीड़

बूंदी जिले में गणगौर पर्व पर हडूडा लोकोत्सव मनाया जाता है. इसमें भीया गांव में नकली कुश्तियां आयोजित होती हैं जिन्हें देखने दूर- दूर से लोग आए और भीड़ उमड़ पड़ी.

बूंदी जिले में गणगौर पर्व पर हडूडा लोकोत्सव मनाया जाता है. इसमें भीया गांव में नकली कुश्तियां आयोजित होती हैं जिन्हें देखने दूर- दूर से लोग आए और भीड़ उमड़ पड़ी.

बूंदी जिले में गणगौर पर्व पर हडूडा लोकोत्सव मनाया जाता है. इसमें भीया गांव में नकली कुश्तियां आयोजित होती हैं जिन्हें देखने दूर- दूर से लोग आए और भीड़ उमड़ पड़ी.

    बूंदी जिले के भीया गांव में गणगौर के अवसर पर मनाए जाने वाले हडूडा लोकोत्सव में मैत्रीभाव से नकली कुश्तियां करने के लिए लोगों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा. इस दौरान अपने हमउम्र की जोड़ियां बना कर कुश्तियों की जोर आजमाइस करने में युवा, बच्चे बुढ़े सभी उम्र के लोग अपना ताव दिखा रहे थे. हडूडा लोकोत्सव मनाने की परम्परा यहां रियासतकाल से चली आ रही है.

    बूंदी जिले के भीया गांव में गणगौर पर्व पर आयोजित हडूडा लोकोत्सव में गांव के लोग रियासतकालीन उक्त परम्परा का आज भी उतनी ही श्रद्धा से निर्वहन करते आ रहे हैं. हडूडा लोकोत्सव के सबंध में गांव के बुजुर्ग लोगों से मिली जानकारी के अनुसार पहलवानों के गांव भीया गांव में गणगौर के अवसर पर पहले असली कुश्तियां हुआ करती थीं. लेकिन सैकड़ों वर्षो पूर्व कोटा दरबार के जैठी पहलवान की गांव के चौबे जी पहलवान द्वारा की गई कुश्ती में जैठी पहलवान की मौत हो जाने के बाद गांव में शुरू हुई मैत्रीभाव से नकली कुश्तियां जो आज तक जारी हैं.

    जिसके तहत गांव के लोग एक दिन पूर्व गांव में घूम-घूम कर अपनी उम्र के लोगों के साथ जोड़ियां बनाते हैं. जिसके बाद गणगौर के दिन जैसो ही ढोल की थाप लोगों को सुनाई देती हैं वैसे-वैसे वे अपनी मूंछों पर ताव देते हुए घरों से निकल कर जुलूस के रूप में सहकारी समिति के पास स्थित मैदान में आ जाते हैं. जहाँ वे अपनी हम उम्र के लोगों के साथ जम कर मैत्रीभाव से नकली कुश्तिया करते हैं. इस दौरान जुलूस के पीछे पीछे आने वाली गांव की महिलाएं गीत गाकर अपने-अपने पक्ष के पहलवानों की हौसला अफजाई करती हैं.

     

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