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राजस्थान: दलित युवक का अपहरण, 31 घंटे तक पशुओं के बाड़े में जंजीरों से बांधे रखा, यातनायें दी

राधेश्याम मेघवाल कर्ज के रुपये नहीं लौटा पाया था.

राधेश्याम मेघवाल कर्ज के रुपये नहीं लौटा पाया था.

राजस्थान में दलित युवक को जंजीरों से बांधा: राजस्थान में दलित अत्याचार (Atrocities on Dalits in Rajasthan) के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. ताजा मामला कोटा संभाग के बूंदी जिले से सामने आया है. यहां कर्ज नहीं चुका पाने पर दबंगों ने एक दलित युवक का अपहरण कर बंधक (Kidnapped and held hostage) बना लिया. पीड़ित का आरोप है कि बाद में 31 घंटे तक उसे पशुओं के बाड़े में जंजीरों से जकड़कर कर रखा गया. इस दौरान उससे मारपीट भी की गई.

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बूंदी. कोटा संभाग के बूंदी जिले में एक तरह जहां जिला पुलिस ऑपरेशन समानता लागू कर दलित उत्पीड़न (Dalit atrocities) रोकने का ढिंठोरा पीट रही है वहीं दूसरी तरफ जिले के तालेड़ा थाना इलाके में इसकी रौंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है. तालेड़ा इलाके के अल्फानगर गांव में करीब आधा दर्जन दबंगों ने एक दलित मजदूर को 31 घंटों तक बंधक बनाकर पशुओं के बाड़े में जंजीरों में जकड़े रखा और उसे यातानायें (Kidnapped and held hostage) दी. पीड़ित की रिपोर्ट पर अब पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है.

पुलिस के अनुसार बीलूबा गांव निवासी राधेश्याम मेघवाल (35) ने अल्फानगर के धान उत्पादक परमजीत सिंह और उसके छोटे भाई समेत अज्ञात चार जनों के खिलाफ अपहरण करने और 31 घंटे तक बंधक बनाकर यातनाएं देने के मामला दर्ज कराया है. पीड़ित ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि परमजीत सिंह ने 3 वर्ष पहले 70 हजार रुपये सालाना मजदूरी पर अपने फार्म हाउस पर हाली के काम पर रखा था. इसके अलावा उसने बहन की शादी के चलते 30 हजार रुपये उससे ब्याज पर कर्ज भी लिया था.

दिन रात काम करने के कारण वह बीमार पड़ गया था
राधेश्याम का कहना है कि दिन रात काम करने के कारण वह बीमार पड़ गया. 6 महीने बाद उसने परमजीत सिंह का फार्म हाउस छोड़ दिया. राधेश्याम का आरोप है कि एडवांस लिए गए 1 लाख रुपये का हिसाब नहीं करने के कारण परमजीत और उसके छोटे भाई लगातार उसे परेशान करने लगे. काम छोड़ने के 4 महीने बाद उसने 25 हजार रुपये लौटा दिए और बाकी पैसे के लिए मोहलत मांगी. दो वर्ष पहले राधेश्याम को परमजीत सिंह और उसका छोटा भाई घर से उठाकर ले गये और 10 दिन तक फसल कटाई का काम करवाया.

3 रुपये प्रति सैकड़ा ब्याज के साथ रुपये नहीं लौटा पाया
राधेश्याम का आरोप है कि परमजीत सिंह की ओर से लगातार दी गई प्रताड़ना के बाद उसने 25 हजार रुपये फिर जमा करा दिये. लेकिन फिर भी परमजीत ने उसे प्रताड़ित करना कम नहीं किया. इस बीच कोरोना महामारी आ गई. इसके कारण वह परमजीत के रुपये नहीं लौटा पाया. वह 3 साल तक आर्थिक तंगी से जूझ रहा. इसके कारण परमजीत को 3 रुपये प्रति सैकड़ा ब्याज के साथ रुपये नहीं लौटा पाया.

रविवार को किया था अपहरण
बीते रविवार को सुबह 11 बजे करीब राधेश्याम भरता बावड़ी गांव में एक दुकान पर बैठा था. वहां पर तीन बाइक पर सवार होकर परमजीत उसका छोटा भाई और चार अज्ञात लोग राधेश्याम का अपहरण कर ले गये. वे राधेश्याम को परमजीत के घर ले गए और वहां जानवरों के बाड़े में सांकल से उसे बांध दिया. लोहे के पाइप से राधेश्याम को पीटा गया. इससे उसके शरीर पर चोटें आई.

1 लाख 10 हजार रुपये दे जाओ और छुड़ा ले जाओ
राधेश्याम के अपहरण की सूचना मिलने पर सोमवार सुबह उसका छोटा भाई रवि शंकर परमजीत के फार्म हाउस पर पहुंचा. उसने राधेश्याम को छोड़ने की फरियाद की तो परमजीत ने कहा कि 1 लाख 10 हजार रुपये दे जाओ और उसे छुड़ाकर ले जाओ. उसी दिन दोपहर में फिर रविशंकर अपने मामा के लड़के को लेकर परमजीत के पास गया लेकिन उसने राधेश्याम को रिहा नहीं किया.

46 हजार रुपये लेकर राधेश्याम को छोड़ा
सोमवार शाम को अल्फा नगर के एक किसान संजय चौधरी के यहां जाकर राधेश्याम के भाइयों ने मदद मांगी. संजय चौधरी ने राधेश्याम को 75 हजार रुपये सालाना मजदूरी पर रखते हुए मदद की और रविशंकर को पैसे दिए. उसके बाद संजय चौधरी के फार्म हाउस पर परमजीत सिंह को बुलाया गया. वहां रविशंकर ने 46 हजार रुपये देकर परमजीत का हिसाब चुकता किया. तब जाकर परमजीत ने पीड़ित राधेश्याम को अपनी कैद से आजाद किया.

पुलिस ने 6 आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया मामला
मंगलवार को डरा सहमा सा राधेश्याम थाने पहुंचा और घटना की जानकारी डीएसपी शंकरलाल को दी. डीएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाधिकारी दिग्विजय सिंह को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए. पुलिस ने राधेश्याम की रिपोर्ट पर परमजीत सिंह और उसके छोटे भाई समेत चार अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण कर बंधक बनाने और मारपीट करने तथा जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने का मामला दर्ज कर लिया है.

बहन की शादी के लिए लिया था कर्जा
पीड़ित राधेश्याम का कहना है कि बरसों पहले पिता की मौत के बाद विधवा मां, छोटी बहन और भाई की परवरिश की जिम्मेदारी के चलते वह बंधुआ मजदूर बनने के लिये मजबूर हुआ था. बहन की शादी के लिए परमजीत सिंह से 30 हजार रुपये का कर्ज लिया था. इसके अलावा 70 हजार रुपये सालाना मजदूरी के एडवांस लिए थे.

Tags: Bundi, Crime News, Kidnapping Case, Rajasthan news

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