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पुलिस सुरक्षा के बीच निकली दलित दूल्हे की बिंदोरी, कलेक्टर-SP ने फूल बरसाकर किया स्वागत

पुलिस सुरक्षा के बीच निकली दलित दूल्हे की बिंदोरी, कलेक्टर-SP ने फूल बरसाकर किया स्वागत

Bundi Latest News: बूंदी में पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच निकली दलित दूल्हे की बिंदोरी.

Bundi Latest News: बूंदी में पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच निकली दलित दूल्हे की बिंदोरी.

Bundi News : आजादी के बाद भी राजस्थान (Rajasthan) में दलितों के लिए घोड़ी पर बिंदोरी (Bindori of groom) निकालना मुश्किल है. प्रदेश के उदयपुर से अलावा भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और बूंदी में पहले भी ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं जिसमें दलित दूल्हे ने घोड़ी पर बिंदोरी निकालने की कोशिश की तो उसे परिवार सहित अपमानित किया गया. इसी को देखते हुए बूंदी में बिंदोरी निकालने के लिए पुलिस-प्रशासन से गुहार लगाई गई. पुलिस ने भी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए बूंदी जिले (Bundi district) में एक दूल्हे की बिंदोरी पूरी सुरक्षा के बीच निकलवाई. कलेक्टर रेनू जयपाल, एसपी जय यादव सहित कई प्रशासनिक अधिकारी कार्यक्रम में शामिल हुए.

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बूंदी. सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए बूंदी जिले (Bundi district) में प्रशासन ने दलित दूल्हे श्रीराम मेघवाल की बिंदोरी (Bindori of groom) को पुलिस सुरक्षा के बीच निकलवाया. कलेक्टर रेनू जयपाल, एसपी जय यादव सहित विभिन्न प्रशासनिक अधिकारी बिंदोरी में शामिल भी हुए और पुष्प वर्षा कर बारातियों का स्वागत किया. प्रशासन ने 30 गांव ऐसे चिह्नित किए हैं, जहां दलित दूल्हे (Dalit groom) कभी घोड़ी पर नहीं बैठे. अब यहां बिंदोरी निकाली जाएगी. दलित दूल्हा-दुल्हन ने घोड़ी पर बिंदोरी निकालने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई थी. पुलिस सुरक्षा के बीच दलित दूल्हा घोड़ी पर चढ़ा. डीजे की धुन पर परिवार के लोग नाचते हुए दिखाई दिए.

चड़ी गांव में बाबूलाल मेघवाल की छठी बेटी द्रोपदीबाई की शादी है. वह ग्रेजुएट है और पांच बेटियों की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में हुई थी. बासण पूजन सहित कई रस्में निभाई गई. बारात बख्शपुरा से आई. दूल्हा श्रीराम भी ग्रेजुएट है. दरअसल, जिले में दूल्हों को घोड़ी से उतारने की पहले कई घटनाएं सामने आई हैं. इससे गांव में सामाजिक सदभाव, कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी हो जाती है. इसीलिए प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई गई थी.

ऑपरेशन समानता का मकसद समरसता कायम रखना

कलेक्टर रेनु जयपाल ने बताया की ऑपरेशन समानता का मकसद दलित दूल्हों को घोड़ी से उतारने जैसी घटनाओं को रोककर इस परिपाटी को तोड़ना है. गांवों में संवैधानिक अधिकार दिलाना और सामाजिक समरसता कायम रखना है. पुलिस ने सर्वे कर ऐसे 25 से 30 गांव चुने हैं, जहां ऑपरेशन समानता समितियां बनाई गई है. हर समिति में गांव के हर समाज से दो-दो लोग, सरपंच, पुलिस मित्र, ग्रामरक्षक, सीएलजी सदस्य, सुरक्षा सखी शामिल किए गए है.

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अब हर महीने होगी ऑपरेशन समानता समिति की बैठक
उन्होंने बताया कि बीट स्तर से जानकारी जुटाई जाएगी कि आने वाले दिनों में किस गांव में किस-किस दलित परिवार में शादी है. पुलिस, प्रशासन शादी के दिन सदभावना के साथ बिंदौरी निकालने और बारात के स्वागत और बिंदौरी की व्यवस्था करेगा. ऑपरेशन समानता समिति की हर महीने मीटिंग होगी. इसमें सदस्यों के साथ डीएसपी, थानाधिकारी, बीट कांस्टेबल भी रहेंगे.

Tags: Rajasthan news

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