अपना शहर चुनें

States

Makar Sankranti: अनूठी परंपराओं की मकर संक्रांति, बूंदी में 5 किलो वजनी बॉल से खेला जाता है दड़ा खेल

गांव के लोग सामूहिक रूप से हाड़ा वशंज के घर जाकर उनसे दड़ा खेलने की अनुमति मांगते हैं. इस पर हाड़ा वशंज उन्हें प्रतीक रूप में शराब पीलाकर कर दड़ा खेलने की अनुमति देते हैं.
गांव के लोग सामूहिक रूप से हाड़ा वशंज के घर जाकर उनसे दड़ा खेलने की अनुमति मांगते हैं. इस पर हाड़ा वशंज उन्हें प्रतीक रूप में शराब पीलाकर कर दड़ा खेलने की अनुमति देते हैं.

Makar Sankranti special : इस पर्व पर बूंदी जिले में पत्थर को टाट में लपेटकर बनाई गई 5 किलो वजनी बॉल से दड़ा खेला जाता है. यह अनूठा आयोजन (Unique tradition) करीब 800 बरसों से होता आ रहा है.

  • Share this:
बूंदी. भारतीय लोकसंस्कृति में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) ऐसा सनातनी त्योहार है, जिसमें पुण्य स्नान, सूर्योपासना, तिल-गुड़, खिचड़ी, दानदक्षिणा से लेकर पतंगबाजी, मौजमस्ती समेत ऐसी अनेक अनूठी परंपराओं (Unique events) का सदियों से निर्वहन किया जा रहा है. इसमें बैंड-बाजे के साथ घर के रूठे बुजुर्गों को मनाने जैसी बड़ों को सम्मान देने की मनभावन परंपराएं हैं, वहीं राजस्थान के बूंदी जिले में पिछले 800 साल से अनोखी परंपरा निभाई जा रही है, जिसमें पत्थर को टाट में लपेटकर बनाई गई 5 किलो वजन जितनी भारी बॉल से दड़ा नामक (Dara Festival) खेल खेला जाता है, जिसके लिए 12 गांवों की दो टीमें बनती हैं और उसके बाद हाड़ा वंशजों के पास जाकर इसे खेलने की अनुमति ली जाती है.

पूरे देश में मकर संक्रांति का त्योहार गुरुवार को श्रद्धा, लोक आस्थाओं से जुड़कर मनाया जा रहा है. गुजरात से भोपाल तक उड़ती रंग-बिरंगी पतंगों से आसमान खिल उठा हैं. उत्तर भारत खासतौर पर हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और यूपी में झूठ-मूठ रूठे बुजुर्गों यानी जेठ-जेठानी, सास-ससुर को मिठाई, पकवान खिलाकर, उपहार देकर, बैंड बाजे के साथ मनाकर लाने की परंपराएं निभाई जाती है. बहुएं अपनी सास के लिए मंगल गीत गाती, नेग देती है. बुजुर्ग बेटों, बहुओं को सुख, समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.

बेहद रोचक होता है दड़ा महोत्सव
संक्रांति पर एक अनूठी दड़ा खेल की परंपरा राजस्थान के बूंदी जिले के बरूंधन गांव में सदियों से चली आ रही है. यह दड़ा टाट से बनाई गई देसी भारी भरकम बॉल से खेला जाता है. इस बॉल का वजन करीब 5 किलो होता है. यह दड़ा महोत्सव बेहद रोचक होता है. इस बार भी इस आयोजन की तैयारियां पूरी है. ढोल ताशों की थाप के बीच इस महोत्सव को मनाया जाता है. इसमें क्षेत्र के 12 गांवों के लोग मिलकर दो टीमें बनाते हैं. इन टीमों में बराबर-बराबर संख्या खिलाड़ी बांट दिये जाते हैं. फिर टाट से बनाई गई बोरी की बॉल का रोमांचक खेल होता है. इसे देखने के लिए आसपास के गांवों के हजारों महिलायें और पुरुष एकत्र होते हैं.
800 वर्ष पुरानी परंपरा


बरुंधन गांव में मक्रर सक्रांति के पर्व पर दड़ा महोत्सव की परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है. क्षेत्र के लोग आज भी इस परंपरा का निर्वहन बड़ी श्रद्धा से करते हैं. बताया जाता है कि मक्रर सक्रांति के पर्व पर दड़ा खेलने की यह परंपरा करीब 800 बरसों से चली आ रही है. इसके लिये टाट (बोरी) से करीब 5 किलो वजनी बॉल बनाई जाती है. इसके बीच में पत्थर होता है. यानी पत्थर के ऊपर टाट लपेटी जाती है. बाद में उसे रस्सी से अच्छी तरह से गूंथा जाता है.

हाड़ा वंशज के घर जाकर लेते हैं खेलने की अनुमति
गांव के लोग सामूहिक रूप से गांव के हाड़ा वशंज के घर जाकर उनसे दड़ा खेलने की अनुमति मांगते हैं. इस पर हाड़ा वंशज उन्हें प्रतीक रूप में शराब पिलाकर कर दड़ा खेलने की अनुमति देते हैं. शराब के नशे में मदहोश होकर क्षेत्र के लोग दो भागों में बंटकर दड़ा खेलते हैं. इसमें शामिल सभी उम्र के लोगों अपनी मूछों पर ताव देकर व जांघ के थपी लगाकर डू डू डू की डूकारी करते हुए बॉल अपनी और लाने का प्रयास करते हैं.

हौसला अफजाई के लिए महिलाएं गाती हैं मंगल गीत
इस दौरान छतों पर खड़ी महिलाएं न केवल इस महोत्सव का लुत्फ उठाती हैं बल्कि वे मंगल गीत गाकर अपनी अपनी टीमों की हौसला अफजाई भी करती हैं. जो टीम तीन बार बॉल को अपनी ओर लाने में कामयाब हो जाती है, उसे विजेता घोषित किया जाता है. विजयी टीम को ग्राम पंचायत द्वारा पुरस्कृत किया जाता है. इसके बाद क्षेत्र के सभी लोग सामूहिक रूप से मदन मोहन भगवान के मंदिर में जाकर सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं.

साम्प्रदायिक सौहार्द्र और आपसी भाईचारे का खेल
स्थानीय निवासी रामप्रसाद सैनी और घासीलाल गुर्जर के अनुसार महोत्सव में क्षेत्र के सभी जाति-धर्म के लोग शामिल होते हैं. इससे साम्प्रदायिक सौहार्द्र और आपसी भाईचारे की भावना को बढ़ावा मिलता है. वर्तमान में भी दड़ा महोत्सव की ख्याती साल दर साल बढ़ती जा रही है. इसके चलते महोत्सव में शामिल होने और देखने के लिए क्षेत्र के लोगों का भारी जनसैलाब उमड़ता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज