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वन विभाग की वजह से जानवरों की तरह जी रहे आठ गांवों के लोग

वन विभाग ने नहीं होने दिया आठ गांवों का विकास
फोटो-ईटीवी

वन विभाग ने नहीं होने दिया आठ गांवों का विकास फोटो-ईटीवी

रामगढ़ अभयारण्य क्षेत्र के आठ गांवों के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं. इन गांवों के विकास में वन विभाग अड़चन डाल देता है जिससे इन गांवों में आज तक बिजली,पानी, स्कूल जैसी सुविधा नहीं है.

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बूंदी जिले में वन विभाग के नियमों से जंगल और उसमें रहने वाले वन्य जीव भले ही नहीं बच पा रहे हों लेकिन इन नियमों ने जिले के रामगढ़ अभयारण्य क्षेत्र में बसे गुलखेड़ी सहित आठ गांवों के लोगों का जीवन पशुतुल्य अवश्य बना दिया है. वन विभाग के अवरोध के चलते तमाम सुविधाओं के अभाव में रामगढ़ अभयारण्य क्षेत्र के आठ गांवों के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं.

बूंदी जिले के खटकड़ और आकोदा क्षेत्र ग्रामपंचायत क्षेत्र में आजादी के समय से बसे ये गांव हैं गुलखेड़ी, भैरुपुरा, केशोपुरा, जावरा, भीमगंज, बाड़ा, धूंधला, हरिपुर और गुढा मगदू. इन आठ गांवों में रहने वाले लोगों का जीवन 1982 में रामगढ़ अभयारण्य क्षेत्र घोषित होने के बाद से नरक बन गया है.  क्षेत्र के उक्त गांवों के लिए स्वीकृत होने वाली विकास योजनाओ में वन विभाग अड़चन लगा कर रोक देता है जिससे पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

पशुपालन और कृषि व्यवसाय कर अपना गुजर बसर करने वाले उक्त गांव के लोगों को पानी के अभाव में जहां दूर से पानी लाने को मजबूर होना पड़ता हैं. वही बिजली के अभाव में वन्य जीवों द्वारा हमला करने और जहरीले कीड़ों द्वारा काटने का डर सताता रहता है. स्कूल के अभाव में बच्चो को शिक्षा से वंचित रहना पड़ता है. इसी तरह सड़क और चिकित्सा के अभाव में बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार नहीं मिल पाने के कारण असमय ही काल का शिकार होना पड़ रहा है.

इस प्रकार तमाम सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जी रहे गांव के लोग अन्यत्र विस्थापित होने के लिए भी तैयार हैं. लेकिन सरकार द्वारा उनके विस्थापन के सबंध में अभी तक कोई स्पष्ट नीति नहीं बना पाने के कारण उन्हें पशुतुल्य जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

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