बूंदी: देखिये किस तरह से ऑर्गेनिक खेती के जरिये आपदा को अवसर में बदला इस युवा शिक्षक ने

हाड़ा के ग्रीन हाउस में टमाटर और बैंगन के पौधे लहलहा रहे हैं. अपने पिता के साथ लेखराज सिंह

हाड़ा के ग्रीन हाउस में टमाटर और बैंगन के पौधे लहलहा रहे हैं. अपने पिता के साथ लेखराज सिंह

Innovation: बूंदी के एक किसान ने कोरोना काल में नौकरी जाने के बाद आपदा को अवसर में बदलते हुये ऑर्गेनिक खेती (Organic farming) के जो नवाचार किये हैं वे अब चर्चा का विषय बने हुये हैं.

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बूंदी. कोरोना काल (Corona era) में बेरोजगार हुये एक युवा ने आपदा को अवसर में बदलते हुये ऑर्गेनिक खेती (Organic farming) में नवाचार कर किसानों के सामने मिसाल पेश की है. इस युवा किसान ने 3 बीघा में 33 क्विटंल मक्का की पैदावार कर क्षेत्र के किसानों को चकित कर दिया है. इस किसान ने पांच से छह लाख रुपये बीघा के हिसाब से तैयार होने वाले ग्रीन हाउस को देशी जुगाड़ से बांस, तार और ग्रीन नेट से मात्र एक लाख में तैयार कर डाला. सब्जियों के पौधों को पाले और लू से बचाने के लिए तैयार किये इस देसी ग्रीन हाउस में किसान फव्वारे लगाये हैं.

यह शिक्षक हैं धोवड़ा निवासी लेखराज सिंह हाड़ा. कोरोना काल में निजी स्कूल से शिक्षक की नौकरी गंवाने वाले हाड़ा ने अपने सैनिक पिता की प्रेरणा से बच्चों की ऑनलाइन क्लास लेते हुये कृषि में ये नवाचार किये हैं. उन्होंने खेती को रोजगार से जोड़कर अपनी आमदनी बढाने में सफलता हासिल की है. हाड़ा ने इसकी शुरुआत अपनी मक्का की फसल में लगे लट के प्रकोप से मुक्ति दिलाने से की. इसके लिये उन्होंने आक, धतूरा, गोमूत्र, महुआ, केसर नीम आदि को विशेष अनुपात में मिलाकर ऑर्गेनिक दवा तैयार कर अपने नवाचार को बढ़ाया दिया है.

100 रुपये में 30 लीटर के हिसाब से गोमूत्र खरीद रहे हैं

शिक्षक और किसान हाड़ा ने दुर्दशा के शिकार हो रहे गौवंश का आर्थिक महत्व बढ़ाने के लिए गांव वालों से देशी गायों का 100 रुपये में 30 लीटर के हिसाब से गोमूत्र खरीदना शुरू किया. इससे उन्होंने ऑर्गेनिक खाद बनाकर जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाई. 5000 लीटर वेस्ट डी कंपोजर का इस्तेमाल कर ऑगनिक गन्ने की फसल लगाई. उसके पककर तैयार हो जाने के बाद वे मकर संक्रांति से ऑर्गेनिक गुड़ तैयार करने में जुटेंगे. वे गुड़ में काजू, बादाम, मूंगफली आदि डालकर पीसेज के रूप में गुड़ की ब्रांडिंग भी करेंगे.
रसायनिक खाद की बजाय शु्द्ध जैविक खाद डाल रहे हैं

हाड़ा के ग्रीन हाउस में टमाटर और बैंगन के पौधे लहलहा रहे हैं. इसके साथ ही वे उसमें ऑर्गेनिक तरीके से सोना मोती किस्म का शुगर फ्री गेंहू, अमरुद, गन्ना, हल्दी, बैगन, टमाटर, मटर, शिमला मिर्च, मेथी, कस्तूरी और पालक की फसल तैयार कर रहे हैं. इसमें वे रसायनिक खाद की बजाय शु्द्ध जैविक खाद डाल रहे हैं. इस ऑर्गेनिक खाद को ही वे अपनी 25 बीघा भूमि पर लगाये गये 1000 अमरुदों के पौधों में डाल रहे हैं.

हाड़ा के नवाचारों के किस्से अब दूर दूर तक फैलने लगे हैं



किसान लेखराज सिंह हाड़ा चाहते हैं कि सभी किसान विदेशी कंपनियों के कीटनाशकों से अपनी निर्भरता कम कर जैविक तरीके से तैयार किये गये कीटनाशक व खाद का उपयोग करते हुये ऑर्गेनिक खेती करें ताकि रसायनिक खेती के माध्यम से लोगों के शरीर में जा रहे जहर से मुक्ति मिल सके. किसान हाड़ा के द्वारा किये जा रहे नवाचारों के किस्से अब दूर दूर तक फैलने लगे हैं. इससे अब उनसे जानकारी लेने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों सहित क्षेत्र के किसान भी आने लग गये हैं.
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