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24 साल बाद चित्तौड़गढ़ में टूटा आसमान से 'कहर', मौत के खौफ से सहमे 42 लोग

PK Agarwal | ETV Rajasthan
Updated: August 23, 2016, 5:28 PM IST
24 साल बाद चित्तौड़गढ़ में टूटा आसमान से 'कहर', मौत के खौफ से सहमे 42 लोग
फाइल फोटो.

1992 से 24 सालों के बाद चित्तौड़गढ़ जिला एक बार फिर जलजले का सामना कर रहा है. 8 अगस्त को बाढ़ से मची तबाही से जिला अभी उभर भी नहीं था कि 20 अगस्त की सुबह बाढ़ एक बार फिर आफत का सैलाब लेकर आई.

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चित्तौड़गढ़ जिला महज 13 दिन में दूसरी बार बाढ़ का सितम झेल रहा है. दो दिन पहले जिले भर में बने बाढ़ जैसे हालातों से अब चित्तौड़गढ़ शहर में भले ही स्तिथि सामान्य होने लगी है, लेकिन जलजले के कारण अभी भी 40 गावों का जिला मुख्यालय से संपर्क कटा हुआ है.

1992 से 24 सालों के बाद चित्तौड़गढ़ जिला एक बार फिर जलजले का सामना कर रहा है. 8 अगस्त को बाढ़ से मची तबाही से जिला अभी उभर भी नहीं था कि 20 अगस्त की सुबह बाढ़ एक बार फिर आफत का सैलाब लेकर आई.

देखते ही देखते बस्तियों में पानी भर गया, कहीं कच्चे मकान ढह गए तो कहीं पुलियां का नामोनिशान नहीं बचा. एनडीआरफ की टीम ने हालात बिगड़ते देख मोर्चा संभाला और 42 लोगों को मौत के मुंह से बाहर निकाला. दो दिन बाद अब जिले में हालात सामान्य होने लगे हैं, लेकिन अभी भी जारी बारिश के दौर ने चिंता और बढ़ा दी है.

बारिश और बाढ़ के कहर का सबसे ज्यादा सितम झेल रहे जिले के ग्रामीण इलाकों में मुसीबतें अभी भी पीछा नहीं छोड़ रही हैं. मातृकुंडियां बांध से पानी छोड़े जाने के कारण सभी एनिकट डूब गए हैं, जिससे राशमी उपखंड दो भागों में बंट गया है. नदी के उस पार स्तिथ 7 ग्राम पंचायतों के 3 दर्जन गावों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है. वहीं निकुम्भ क्षेत्र में पिनोदडा पुलिया बह जाने से नदी किनारे बसे लोगों की जान पर बन आई है.

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निम्बाहेड़ा क्षेत्र में भी ऊंचा बांध की पाल पानी के तेज बहाव में धराशाही हो गई. इधर तेज बारिश से डूंगला के जांजलवास में 14 कच्चे मकान ढह गए तो वहीं बेंगू में जलजले के आगे 3 पक्के मकान चकनाचूर हो गए.चित्तौड़गढ़ जिले में बाढ़ के सितम और तबाही के निशान साफ बता रहे हैं कि हालात क्या रहे होंगे, लेकिन अब हालातों से निपटने के साथ-साथ प्रशासन के सामने चुनौती यह भी है कि कब और कितने समय में जिला मुख्यालय से कटे गांवों का सम्पर्क फिर से जुड़ेगा.

इधर, बाढ़ के बाद मौसमी बीमारियों और महामारी से पार पाना चिकित्सा विभाग के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है.

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First published: August 23, 2016, 5:27 PM IST
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