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55 साल पहले पूर्व PM लाल बहादुर शास्त्री को तौलने के लिए दिया था 56 किलो सोना, अब सरकार को होगा सुपुर्द

1965 में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चित्तौड़गढ़ आने का कार्यक्रम था. उन्हें सोने में तौलने के लिए तत्कालीन कलेक्टर को 56 किलो 857 ग्राम सोना भेंट किया गया था.

1965 में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चित्तौड़गढ़ आने का कार्यक्रम था. उन्हें सोने में तौलने के लिए तत्कालीन कलेक्टर को 56 किलो 857 ग्राम सोना भेंट किया गया था.

Udaipur News: पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को तौलने के लिए भेंट तत्कालीन कलेक्टर को भेंट किया गया 56 किलो 857 ग्राम सोना अब सेंट्रल GST विभाग के सुपुर्द किया जाएगा. इस सोने की वर्तमान कीमत करीब 27 करोड़ रुपए आंकी जा रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 20, 2021, 1:12 PM IST
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उदयपुर. उदयपुर के सीजेएम कोर्ट के फैसले पर दायर निगरानी याचिका पर सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया. कोर्ट ने कहा कि फैसला सुनाते हुए पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री (Former PM Lal Bahadur Shastri) के स्वागत में उन्हें तौलने के लिए भेंट किया गया 56 किलो 857 ग्राम सोना सेंट्रल जीएसटी डिपार्टमेंट के सुपुर्द किया जाए. इस सोने की वर्तमान कीमत करीब 27 करोड़ रुपए आंकी जा रही है. बता दें कि वर्ष 1965 में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चित्तौड़गढ़ आने का कार्यक्रम था. उस दौरान बड़ी सादड़ी निवासी गणपत लाल आंजना ने शास्त्री जी के स्वागत में उनकी वजन के बराबर सोने में तौलने के लिए तत्कालीन कलेक्टर को 56 किलो 857 ग्राम सोना भेंट किया था.

बताया जा रहा है कि इसी दौरान शास्त्री जी का निधन हो गया और वह चित्तौड़गढ़ नहीं आ सके. यह सोना प्रशासन के पास ही रखा रह गया. इस बीच आंजना परिवार ने इस सोने को वापस लेने के लिए लंबी लड़ाई भी लड़ी, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी. साथ ही बड़ी सादड़ी के ही एक अन्य व्यक्ति द्वारा सोने को गलत नियत से खुर्द करने के आरोप लगाए. और मामले में उदयपुर की लोअर कोर्ट में गणपत लाल आंजना सहित चार लोगों को दोषी मानते हुए सजा सुना दी. हालांकि डीजे कोर्ट और हाईकोर्ट ने सभी को बरी कर दिया, लेकिन यह सोना गोल्ड कंट्रोल ऑफिसर के पास जमा रखने के आदेश दिए गए.

2009 में उदयपुर सीजेएम कोर्ट में अर्जी लगा कर इस सोने को एक्साइज विभाग को सौंपने के लिए मांग की गई. सीजेएम कोर्ट से भी फैसला सोने को सीजीएसटी (CGST) को सौंपने के आदेश हुए और उस पर दायर निगरानी याचिका ने सीजेएम कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. एक्साइज विभाग में गोल्ड कंट्रोल ऑफिसर की पोस्ट खत्म होने का हवाला देते हुए इस सोने को सुपुर्द करने का दावा पेश किया था. वर्तमान में एक्साइज विभाग की जगह सेंट्रल जीएसटी ने ले ली है.



ऐसे में कोर्ट में चित्तौड़गढ़ डिवीजन के सेंट्रल जीएसटी विभाग को सोना सुपुर्द करने के आदेश सुनाए हैं. वर्ष 1962 में युद्ध के चलते देश में अन्न की कमी होने लगी थी. इसे देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने गोल्ड कंट्रोल एक्ट के तहत गोल्ड बॉन्ड स्कीम निकाली थी. इस स्कीम के तहत गोल्ड बॉन्ड लेने वाले व्यक्ति से किसी तरह का पूछताछ नहीं करने का प्रावधान रखा था. गणपत लाल आंजना ने भी 10 दिसंबर 1965 को इसी स्कीम के तहत पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को तोलने के लिए सोना जमा कराया था.
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