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चित्तौड़गढ़ लोकसभा क्षेत्र- बंपर मतदान ने बढ़ा रखी है बीजेपी-कांग्रेस की धड़कनें, 7.07% ज्यादा हुई है वोटिंग

फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

साहस और शौर्य की भूमि चित्तौड़गढ लोकसभा क्षेत्र कभी भी किसी एक पार्टी की कब्जे में नहीं रहा. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के साथ यहां पर जनसंघ और अन्य पार्टियां भी अपना वजूद कायम करती रही हैं.

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    साहस और शौर्य की भूमि चित्तौड़गढ लोकसभा क्षेत्र कभी भी किसी एक पार्टी की कब्जे में नहीं रहा. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के साथ यहां पर जनसंघ और अन्य पार्टियां भी अपना वजूद कायम करती रही हैं. मेवाड़ की इस अहम सीट से पूर्व में बीजेपी के दिग्गज नेता रहे जसवंत सिंह और कांग्रेस की दिग्गज नेता गिरिजा व्यास भी चुनाव जीत चुकी हैं.

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    इस बार यहां मुकाबला बीजेपी के मौजूदा युवा सांसद सीपी जोशी और कांग्रेस के अनुभवी नेता गोपाल सिंह ईडवा के बीच हुआ है. चित्तौड़गढ़ के मतदाताओं ने इस बार 72.17 फीसदी मतदान कर यहां इतिहास रचा है. पीएम नरेन्द्र मोदी ने इस लोकसभा चुनाव में प्रदेश में अपने प्रचार अभियान की शुरूआत इसी क्षेत्र से की थी.

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    तीन जिलों के विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं
    चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिले की आठ विधानसभाओं को मिलाकर बने इस क्षेत्र में 20,15,401 मतदाता हैं. क्षेत्र में चित्तौड़गढ़ जिले का चित्तौड़गढ़, निम्बाहेड़ा, कपासन, बेगूं व बड़ी सादड़ी और उदयपुर का वल्लभनगर व मावली समेत प्रतापगढ़ जिले का प्रतापगढ़ विधानसभा क्षेत्र शामिल है.

    सीपी जोशी। फाइल फोटो।


    इस बार तस्वीर बदली हुई है
    गत लोकसभा चुनाव के समय क्षेत्र की आठ में से सात सीटों पर बीजेपी काबिज थी. केवल वल्लभनगर में जनता सेना का कब्जा था. लेकिन इस बार तस्वीर कुछ बदली हुई है. हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में निम्बाहेड़ा, बेगूं, प्रतापगढ़ और वल्लभनगर कांग्रेस के कब्जे में आ चुकी है. अब बीजेपी और कांग्रेस दोनों के पास चार-चार सीटें हैं.

    गोपाल सिंह ईडवा। फोटो एफबी।


    7.07 फीसदी ज्यादा मतदान हुआ है
    यहां पहले चरण में 29 अप्रेल को चुनाव हुए. क्षेत्र के मतदाताओं जबर्दस्त उत्साह दिखाते हुए इस बार गत के मुकाबले 7.07 फीसदी ज्यादा मतदान किया. यहां गत बार जहां 64.47 फीसदी मतदान हुआ था वहीं इस बार यह 72.17 प्रतिशत तक जा पहुंचा. इस बढ़े हूए मतदान ने दोनों पार्टियों की धड़कनें बढ़ा रखी है. इस सीट पर पहले भी बाहरी प्रत्याशी आते रहे हैं. इस बार भी कांग्रेस प्रत्याशी गोपाल सिंह ईडवा का बाहरी होना यहां चुनाव में मुद्दा बना रहा है.

    अफीम की खेती सबसे बड़ा जमीनी मुद्दा
    बीजेपी से चुनाव मैदान में उतरे मौजूदा सांसद सीपी जोशी यहां लगातार दूसरी बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. इससे पहले वे 2014 में कांग्रेस की दिग्गज नेता गिरिजा व्यास का हरा चुके हैं. बीजेपी ने क्षेत्र में जोशी की पकड़ को देखते हुए इस बार फिर उन पर दांव लगाया है. वहीं कांग्रेस ने इस बार यहां राजसमंद के पूर्व सांसद गोपाल सिंह ईडवा को उनके सामने मुकाबले के लिए खड़ा किया है. ईडवा लोकसभा क्षेत्र के पार्टी के प्रभारी रहे हैं. अफीम की खेती इस क्षेत्र का सबसे बड़ा जमीनी मुद्दा है.

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