चित्तौड़गढ़ में रावण को गुरु मानते हैं ये लोग, दशहरे के दिन करते हैं विशेष पूजा

चित्तौड़गढ़ में बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जो रावण को अच्छाई का प्रतीक भी मानते हैं.
चित्तौड़गढ़ में बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जो रावण को अच्छाई का प्रतीक भी मानते हैं.

Dussehra 2020: चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh) में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनके लिए रावण (Rawan) की भक्ति, ज्ञान और चारित्रिक अच्छाई प्रेरणा का स्त्रोत हैं. इन्हीं कारणों के चलते ये लोग रावण की पूजा करते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 25, 2020, 11:47 AM IST
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चित्तौड़गढ़. आज देश में दशहरे (Dussehra) का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा. इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है. रावण (Rawan) को बुराई का प्रतीक मानकर उसका पुतला जलाया जाता है, लेकिन चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh) शहर में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके लिए रावण अच्छाई का प्रतीक है. रावण की भक्ति, ज्ञान और चारित्रिक अच्छाई उनके लिए प्रेरणा का स्त्रोत है.

चित्तौड़गढ़ में रावण के भक्तों ने अपने घर और प्रतिष्ठानों पर भी रावण के चित्र लगाए हैं. हर वर्ष दशहरे पर रावण का विशेष पूजन भी करते हैं. साथ ही नियमित रूप से भी रावण की पूजा करते हैं. रावण को सतयुग से ही बुराई का प्रतीक माना जाता है. हर वर्ष दशहरे पर देश एवं विदेश में रावण के पुतलों का दहन होता है और इसके साथ ही बुराई को छोड़ने का प्रण लिया जाता है. सतयुग से ही रावण को बुराइयों के लिए जाना जाता है, लेकिन प्रकांड पंडित और शिव भक्त के रूप में भी रावण की पहचान रही है.

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इसके बावजूद देश में कई जगह रावण को पूजने की परिपाटी है. चित्तौड़गढ़ में कुछ लोग हैं जो काफी समय से रावण की पूजा करते आ रहे हैं. इनके दिन की शुरुआत की रावण पूजा से होती है. घर के बाद प्रतिष्ठान पर भी रावण की पूजा करते हैं. शहर निवासी वस्त्र व्यवसायी हीरालाल वर्ष 2001 से ही रावण की पूजा कर रहे हैं. इनके बाद शहर में अन्य लोग भी रावण की पूजा करने लगे. करीब आठ-दस वर्षों से शहर निवासी हरीश मेनारिया भी रावण को पूजते आ रहे हैं, जो भी लोग इनके यहां आते हैं वह रावण की आराधना करते देख आश्चर्यचकित हो जाते हैं. इनकी नजर में रावण का चरित्र उत्तम था और वह सभी के लिए अनुकरणीय है.
हरीश बताते हैं कि रावण भक्तों के लिए दशहरा किसी त्योहार से कम नहीं है. इस दिन भक्त रावण के लिए उपवास रखते हैं. रावण को जलाना इन्हें कतई अच्छा नहीं लगता. रावण पूजन और नमस्कार के स्थान पर सभी से जय लंकेश कहने के कारण इनकी पहचान भी अब लंकेश के रूप में है.
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