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चूरू : अंजू नेहरा की उम्र है 48 साल, पर हैं वो 70 बच्चों की मां, जानें क्या है माजरा

School for Divyang Students: अंजू नेहरा इन दिनों दिव्यांग बच्चों के लिए 'मधुर स्पेशल शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान' चला रही ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट : नरेश पारीक

चूरू. उनकी उम्र है महज 48 साल, लेकिन हैं वो 70 बच्चों की मां. रहती हैं चूरू में और नाम है अंजू नेहरा. बता दें कि अंजू नेहरा के जीवन में एक ऐसी घटना घटी कि उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य ही बदल लिया. दरअसल, उनके दिव्यांग बेटे का मुंबई में इलाज न हो पाने पर वे हताश हुईं. पर बाद में खुद को संभालते हुए उन्होंने दिव्यांग बच्चों को शिक्षा से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प किया और स्पेशल बच्चों के लिए एक स्कूल खोला. जहां वे 9 साल से दिव्यांग बच्चों को नि:शुल्क पढ़ा रही हैं.

अंजू नेहरा इन दिनों दिव्यांग बच्चों के लिए ‘मधुर स्पेशल शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान’ चला रही हैं. अंजू का ये सफर उनके बेटे मधुर के जन्म के कुछ दिनों बाद ही शुरू हुआ था. दरअसल, अंजू को बेटे के जन्म के कुछ दिनों बाद पता चला कि वह दिव्यांग है. तब उनका मन पीड़ा से भर उठा. जब उनका बेटा स्कूल जाने के काबिल हुआ तो दिव्यांग बच्चों के स्कूल में उसका दाखिला करवाया. बस यहीं पर अंजू के मन में ख्याल आया कि उन्हें भी इन बच्चों के लिए कुछ करना चाहिए.

मुंबई से किया स्पेशल डीएड कोर्स

इस इरादे के बाद अंजू ने मुंबई से स्पेशल डीएड कोर्स किया और अपने शहर चूरू में आकर साल 2013 में उन्होंने दिव्यांग बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाना शुरू कर दिया. दो बच्चों के साथ शुरू किए गए इस सेवा कार्य का धीरे-धीरे विस्तार होता गया. आज अंजू के ‘मधुर स्पेशल शिक्षण संस्थान’ में 70 दिव्यांग बच्चे पढ़ रहे हैं. अंजू ने इस स्कूल का नाम अपने बेटे मधुर के नाम पर रखा है. इस स्कूल के सारे बच्चे अंजू को अपने बच्चे लगते हैं. बच्चों से भी अंजू का बेटे जैसा स्नेह मिलता है और अंजू खुद को इन 70 बच्चों की मां समझती हैं.

पति देते हैं साथ

अंजू के इस नेक काम में उनके पति का पूरा साथ मिला. नौसेना से रिटायर्ड जवान अंजू के पति अपनी पेंशन का ज्यादा हिस्सा अपनी पत्नी को दे देते हैं. इतना ही नहीं वे स्कूल प्रबंधन में भी पूरा सहयोग कर रहे हैं.

भामाशाह ने दी स्कूल के लिए जमीन

अंजू का कहना है कि शुरुआत में लोग या तो ऐसे बच्चों के लिए स्कूल खोलने के लिए जगह किराए पर देते ही नहीं थे. कोई मदद को आगे भी आता था, तो कुछ दिन में ही हाथ पीछे खींच लेता था. बच्चों के स्कूल भवन के लिए उन्हें बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा था. बाद में भामाशाह हनीफ खां ने चूरू देपालसर रोड पर एक बीघा जमीन दान में दी, जहां स्कूल के भवन का निर्माण हुआ.

जनसयोग से हो रही संचालित

अंजू कहती हैं कि मधुर स्पेशल में अभी 70 बच्चों के लिए 12 का स्टाफ हैं. वहीं स्कूल में 6 शिक्षक हैं, दो केयरटेकर हैं. बच्चों को लाने और ले जाने के लिए तीन गाड़ियां हैं. यहां बच्चों से फीस नहीं ली जाती है और स्टडी मेटेरियल भी फ्री है. यह सब व्यवस्था जनसहयोग से की जा रही है.

Tags: Churu news, Rajasthan news, Special status

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