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Churu: कभी बीकानेर शासक सादुल सिंह ने स्वागत से खुश होकर दी थी कुआ बनाने को जमीन, अब हुआ बदहाल

बीकानेर रियासत के शासक सादुलसिंह को नरम दिल और नेक इंसान माना जाता था. यही नहीं, उन्‍होंने चूरू और उससे सटे आसपास के क् ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट: नरेश पारीक

    चूरू. एक समय था जब चूरू और उससे सटे आसपास के क्षेत्र में पेयजल के साधन काफी कम थे. ऐसे में लोगों को काफी दूर तक पानी लेने के लिए जाना पड़ता था. बुजुर्ग बताते हैं कि तत्कालीन बीकानेर शासक सादुलसिंह जनता के हितों का काफी ध्यान रखते थे और वह खैर-खबर लेने के लिए आया करते थे. 30 जनवरी 1946 में निकटवर्ती रतननगर में उनका आगमन हुआ था. उनके स्वागत के लिए अलग-अलग स्वागत द्वार बनाए गए थे. तत्कालीन शासक सादुलसिंह कार में सवार होकर पहुंचे थे. पीछे भारी लवाजमा साथ चल रहा था, जिसमें ऊंट, हाथी, घोडे़ शामिल थे. पहले दरवाजे पर स्वागत की जिम्मेदारी अली बक्श मनिहार को दी गई थी.

    प्रो. केसी सोनी बताते हैं कि अली बक्श ने एक बैनर पर उर्दू में उनके सम्मान के लिए शब्द लिखे ​थे. बैनर को देखकर तत्कालीन शासक वहां रूक गए. इस पर उन्होंने उर्दू के जानकारों को बुलाकर बैनर पर लिखे शब्दों को पढ़ाया तो उन्होंने बताया कि उस पर उनके रतननगर आगमन पर खुशी का इजहार किया है. बैनर पर लिखे शब्दों का अर्थ जानकर सादुलसिंह ने अली बक्श को कुछ मांगने के लिए कहा. इस पर उसने बताया कि आसपास के क्षेत्र में पेयजल की समस्या है. उसने कुआ निर्माण के लिए भूमि देने की फरियाद की. इस पर तत्कालीन शासक ने तुरंत तहसीलदार को बुलवाकर जमीन देने की बात कही. बताया जाता है कि रतननगर के बीहड में बने इस कुए से कई लोग प्यास बुझाते थे, हालांकि अब इस प्राचीन कुएं के अवशेष मात्र रह गए हैं, लेकिन आज भी ये उस समय की घटना का चश्मदीद गवाह है.

    सात दिन तक चला था भोज
    इतिहासविद प्रो. सोनी ने बताया कि तत्कालीन शासक के रतननगर पहुंचने पर करीब सात दिनों तक देसी घी के भोज का कार्यक्रम चला था. रतननगर​​स्थित पीपल के पास शासक के हाथी को बांधा गया था. वहां पर एक कार्यक्रम भी हुआ था, जहां सादुलसिंह ने जनता को संबो​धित भी किया था.

    सेठ साहूकारों ने दिया था नजराना
    प्रो. सोनी ने बताया कि उस समय सेठ-साहूकारों ने नजराने के तौर पर सोने-चांदी की गि​न्नियां, हार व नकदी भी भेंट की थी. बताया जाता है कि सादुलसिंह जनता की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहा करते थे. रतननगर के एक सेठ ने नजराने के तौर पर उन्हें 31 हजार रुपए नकद और ​सोने की गि​न्नियां दी थीं. नकदी मिले रुपए से शासक ने जनता के लिए रतननगर में एक सरकारी अस्पताल खोला था, जहां पर लोगों का इलाज किया जाता था. इस अस्पताल का उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिया ने किया था.

    Tags: Churu news, Rajasthan news

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