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OMG: चूरू में जहरीले काले सांपों से खेलते हैं बच्चे भी, हाथों में लेकर करते हैं Folk Dance

बताया जाता है कि यहां गोगाजी के प्रति लोगों में इतनी आस्था कि उनका मानना है कि गोगामेड़ी में धोक लगाने के बाद कोई भी सांप किसी को नुकसान नहीं पहुंचा सकता.

बताया जाता है कि यहां गोगाजी के प्रति लोगों में इतनी आस्था कि उनका मानना है कि गोगामेड़ी में धोक लगाने के बाद कोई भी सांप किसी को नुकसान नहीं पहुंचा सकता.

Churu News: चूरू में लोकदेवता गोगाजी (Gogaji) की मेड़ी में आयोजित होने वाले रात्रि जागरण में आस्था का सैलाब उमड़ता है. यहां लोग जहरीले काले सांपों (Venomous Black Snakes) हाथों में लेकर लोक नृत्य करते हैं. बच्चे भी यहां इन काले नागों से नहीं घबराते हैं.

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चूरू. राजस्थान के शेखावाटी इलाके में स्थित चूरू (Churu) में लोग जहरीले सांपों (Venomous Snakes) के साथ खेलने का शौक भी रखते हैं. देखने और सुनने में भले ही यह अटपटा लगे लेकिन यह 100 फीसदी सच है. जहरीले सांपों से लोगों का यह लगाव लोक देवता गोगाजी (Gogaji) में उनकी असीम आस्था के कारण है. यहां गोगाजी के जागरण में श्रृद्धा का सैलाब उमड़ता है. जागरण में पारंपरिक वाद्य यंत्रों डेरू, ढोल और झींझा की गगनभेदी ध्वनि के साथ भजनों की प्रस्तुतियां दी जाती है. वहीं भक्त गोगाजी के जयकारों के बीच सांपों को हाथों में लिये ढोल और झींझे की धुन पर नृत्य करते हैं. इन्हें देखकर हर कोई दांतों तले अंगुली दबा लेता है.

गुरुवार रात को भी जिला मुख्यालय के शिव कॉलोनी स्थित गोगामेड़ी में आयोजित रात्रि जागरण ऐसा ही नजारा देखने को मिला. रातभर चले जागरण में गोगाजी के लोकगीतों के साथ लोक नृत्यों ने लोक संस्कृति को साकार कर दिया. जागरण के दौरान बच्चे भी बिना किसी डर के काले नाग को हाथों में लेकर खेलते दिखे. मौत के पर्याय माने जाने वाले काले नाग के साथ कुछ लोग खेल-खेल में सेल्फी लेते भी दिखाई दिये. बताया जाता है कि गोगाजी के प्रति लोगों में इतनी आस्था कि उनका मानना है कि गोगामेड़ी में धोक लगाने के बाद कोई भी सांप किसी को नुकसान नहीं पहुंचा सकता.

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गोगाजी को सांपों के देवता के रूप में भी पूजा जाता है
लोकमान्यता और लोककथाओं के अनुसार गोगाजी को सांपों के देवता के रूप में भी पूजा जाता है. जिलेभर में भाद्रपद माह में गोगा मेड़ियों में गोगाजी के निशान के साथ जागरण का आयोजन होता है. लोक धारणा है कि सर्प दंश से प्रभावित व्यक्ति को यदि गोगाजी की मेड़ी तक लाया जाये तो वह सर्प विष से भी मुक्त हो जाता है. राजस्थान के लोक देवता और हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक जाहरवीर गोगाजी के जन्मोत्सव पर भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की नवमी को जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक गोगामेड़ी में वार्षिक मेले का बड़ा आयोजन होता है. लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण गत दो साल से मेले का आयोजन नहीं हुआ है.

वीर गोगाजी गुरुगोरखनाथ के परम शिष्य थे
उल्लेखनीय है कि वीर गोगाजी गुरुगोरखनाथ के परम शिष्य थे. उनका जन्म विक्रम संवत 1003 में चूरू जिले के ही ददरेवा गांव में हुआ था. सिद्ध वीर गोगादेव का जन्म स्थान चूरू जिले के ददरेवा में स्थित है. वहां पर सभी धर्म और सम्प्रदाय के लोग मत्था टेकने के लिए दूर-दूर से आते हैं. कायमखानी मुस्लिम समाज उनको जाहर पीर के नाम से पुकारता है. इस समाज के लोग इस स्थान पर मत्‍था टेकने और मन्नत मांगने आते हैं. चूरू जिले में हिंदू और मुस्लिम एकता के प्रतीक जाहरपीर गोगाजी की बड़ी मान्यता है.

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