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बेटी को मजिस्ट्रेट बनाना चाहता था किसान, बिटिया मीनाक्षी राठौड़ ने सिंगिंग में लहराया परचम

Manoj K. Sharma | News18 Rajasthan
Updated: November 10, 2019, 9:26 PM IST
बेटी को मजिस्ट्रेट बनाना चाहता था किसान, बिटिया मीनाक्षी राठौड़ ने सिंगिंग में लहराया परचम
गानों के माध्यम से राजस्थानी संस्कृति को बढ़ावा दे रही मीनाक्षी राठौड़ (फाइल फोटो)

चूरू (Churu) जिले के छोटे से गांव कड़वासर की बेटी मीनाक्षी राठौड़ (Meenakshi Rathore) राजस्थानी गीत (Rajasthani Song) और संस्कृति को अपने सुरों में पिरो कर नए आयाम स्थापित कर रही हैं.

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चूरू. राजस्थान के चूरू (Churu) जिले के छोटे से गांव कड़वासर की बेटी मीनाक्षी राठौड़ (Meenakshi Rathore) राजस्थानी गीत (Rajasthani Song) और संस्कृति को अपने सुरों में पिरो कर नए आयाम स्थापित कर रही हैं. राजपूत घराने में जन्मी मीनाक्षी अब किसी परिचय की मोहताज नहीं है. यूट्यूब (YouTube) पर मीनाक्षी के पहले ही गाने को 20 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं. वहीं मीनाक्षी राठौड़ गानों के माध्यम से राजस्थानी संस्कृति (Rajasthani culture) को बढ़ावा दे रही है.

चूरू के गांव कड़वासर की बेटी है मीनाक्षी राठौड़
कड़वासर गांव में खेती करने वाले पिता बजरंग सिंह राठौड़ अपनी इकलौती बेटी को मजिस्ट्रेट (Magistrate) बनने का ख्वाब संजोए हुए थे. मीनाक्षी ने अपने माता-पिता की मंशा पर खरा उतरने के लिए प्रयास भी किए. मीनाक्षी ने बीकानेर के डूंगर कॉलेज से एलएलबी की. इसके बाद ही मजिस्ट्रेट की परीक्षा (Exam) भी दी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. वह बहुत कम नंबरों से मजिस्ट्रेट बनने से चूक गईं. इसके बाद बचपन से सिंगर (singer) बनने की इच्छा को आम जनता तक पहुंचाने के लिए विपरीत परिस्थितियों में काम किया. धीरे-धीरे सफलता मिलती चली गई.



रूढ़िवादी परम्पराओं को तोड़कर बेटियों के लिए गाया बाईसा रो रूप गाना
मीनाक्षी ने जब 'म्हारा बाईसा रो रूप सुहावनो...' गाकर यूट्यूब पर लोड किया तो चंद समय में 20 लाख लोगों ने उसे देखा और गाने की सराहना की. यह गाना बेटियों के लिए था, जिसमें मन में आ रही वास्तविक भावनाओं को गाने के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है. आज मीनाक्षी राजस्थान के कई हिट गाने दे चुकी हैं.

अब तक तीन राजस्थानी गाने यूट्यूब पर डाल चुकी हैं मीनाक्षी राठौड़
अब तक तीन राजस्थानी गाने यूट्यूब पर डाल चुकी हैं मीनाक्षी राठौड़

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गांव में बेटा-बेटी के भेदभाव को देखने के बाद मीनाक्षी ने उठाया कदम
मीनाक्षी ने बताया कि वह जिस समाज और ग्रामीण परिवेश से हैं, वहां महिलाओं का बोलना तो दूर सिंगर बनने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था. उन्होंने बताया कि गांव में बेटे और बेटी में इतना फर्क किया जाता कि गांव के लोग उनके मां-बाप को ताना देते थे, कि उनका कोई बेटा नहीं है, तभी से मीनाक्षी ने मन में संकल्प किया कि वो भी बेटों की तरह ही अपने माता-पिता का नाम रोशन कर इस मिथक को तोड़ेंगी. मन में इसी संकल्प की बदौलत है वो आज इस मुकाम पर पहुंच पाई हैं.

परिजनों ने दिया मीनाक्षी का साथ
मीनाक्षी बताती है कि समाज ने ही उनके गाने गाये जाने का विरोध किया और समाज के लोगों ने ही उन्हें प्रोत्साहित भी किया. उनकी मां सरोज कंवर और पिता के अलावा उनके पति और सास भी उनके इस काम में साथ दे रहे हैं. चूरू की बेटी मीनाक्षी के गाने यूट्यूब ही नहीं ब्लकि राजस्थानी रिदम पर भी पसंद किए जा रहे हैं.

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First published: November 10, 2019, 5:18 PM IST
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