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जानिए कैसे हुई विश्व की सर्वाधिक धार्मिक पुस्तको का प्रकाशन करने वाली गीता प्रेस गोरखपुर की स्थापना? 

राजस्थान की धरती से देश के बड़े और मशहूर उद्योगपति ही नही निकले बल्कि यहाँ की धरती से संत और धार्मिक साहित्यों को बढ़ावा ...अधिक पढ़ें

    नरेश पारीक/चूरू. चूरू जिला छोठी काशी के नाम से मशहूर हैं, यहां की धरती पर जन्मे सपूतों ने अपनी मेहनत के बल पर देश ही नहीं विदेशों में भी नाम कमाया है. इसमें से जयदयाल गोयनका का नाम भी अग्रिम पं​क्ति में शामिल है, जिन्होंने गीता प्रेस की स्थापना कर धर्म का प्रचार-प्रसार किया और आज उसी गीता प्रेस गोरखपुर में छपे धार्मिक पुस्तकों के जरिए देश में जगह-जगह लोगों को धर्म का संदेश दिया जा रहा है.

    गुरुकुल के व्यवस्थापक ईश्वरसिह राठौड़ ने बताया कि सेठजी के नाम से प्रसिद्ध चूरू के जयदयाल गोयनका का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण 6,सम्वत 1942 (सन 1885)को श्री खूबचन्द्र अग्रवाल के परिवार में हुआ था.जिनका शुरुआत में भगवान के प्रतिविश्वास नहीं था. बताया जा रहा है कि गढ़ चौराहा ​स्थित अपनी हवेली के कमरे में वह एक दिन सो रहे थे, इस दौरान उन्हें भगवान श्रीकृष्ण ने दर्शन दिए, भगवान ने गोयनका को कहा कि गीता का ज्ञान लोग भूलते जा रहे हैं, ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में गीता ग्रंथ लुप्तहो जाएगा.

    गीता का प्रचार-प्रसार
    बताया जाता है कि भगवान ने उन्हें गीता का प्रचार-प्रसार करने का उपदेश दिया. सपने के कुछ देर बाद अचानक उनकी आंखे खुली.इस पर चूरू में जन्मे गोयनका ने ही गीता प्रेस की स्थापना कर डाली. कोलकाता में सेठजी के सत्संग प्रभाव से साधकों का समूह बढ़ता जा रहा था, सभी को स्वाध्याय के लिए गीताजी की आवश्यकता हुई. लेकिन शुद्ध पाठ और सही अर्थ की गीता सुलभ नहीं हो रही थी. इस पर उन्होंने गोविन्द भवन की ओर से कोलकाता में पांच हजार प्रतियां छपवाई जो बहुत ही जल्दी समाप्त भी हो गई.

    गोरखपुर में खोली प्रेस
    गोयनका को गोरखपुर के घनश्याम दास व महावीर प्रसाद पोद्दार ने गोरखपुर में प्रेस खोलने का सुझाव दिया. इस पर गोयनका ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर गोरखपुर में प्रेस खोलने की अनुमति प्रदान की.गोरखपुर में एक किराए के कमरे में इसकी शुरूआत की गई. धीरे-धीरे प्रेस के माध्यम से गीता के अनेक छोटे-बडे संस्करण के अलावा अन्य पुस्तकों का भी प्रकाशन होने लगा.

    चूरू में की गुरुकुल की स्थापना
    बच्चों को अच्छे संस्कार देने के लिए 1923 में धर्म स्तूप के पास गुरुकुल की स्थापना की गई. गुरुकुल में शिक्षा, वस्त्र, शिक्षण सामग्रियां आजतक नि:शुल्क है. उनसे भोजन का खर्च भी नाम मात्र का लिया जा रहा है. चूरू में गीता प्रेस का देश में एकलौता ऐसा गुरुकुल है जहां करीब 90 बच्चों को वैदिक के साथ आधुनिक शिक्षा दी जाती है. यह गुरुकुल धर्मस्तूप से कुछ दूरी पर है, जहां सुबह-शाम वैदिक मंत्र, हवन, संध्या सहित संस्कृत में संवाद करते बच्चे नजर आ जाते हैं. गुरुकुल में हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत सहित बच्चों को नियमित तौर पर गीता, वेद, उपनिषद, व्याकरण के अध्ययन सहित हवन, आरती, पूजा कराई जाती है. सुबह के समय बच्चों को योगाभ्यास भी नियमति तौर पर कराया जाता है.

    Tags: Churu news, Rajasthan news

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