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राहुल कस्वां-राजनीतिक परिवार की तीसरी पीढ़ी का यह युवा क्या लहरा पाएगा जीत का परचम ?

राहुल कस्वां। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

चूरू लोकसभा क्षेत्र से लगातार दूसरी बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले मौजूदा सांसद राहुल कस्वां जिले के अहम राजनीतिक परिवार से हैं. राहुल के दादा, पिता और मां तीनों सादुलपुर विधानसभा से विधायक रह चुके हैं.

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    चूरू लोकसभा क्षेत्र से लगातार दूसरी बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले मौजूदा सांसद राहुल कस्वां जिले के अहम राजनीतिक परिवार से हैं. राहुल के दादा, पिता और मां तीनों सादुलपुर विधानसभा से विधायक रह चुके हैं. राहुल के पिता रामसिंह कस्वां क्षेत्र से चार बार सांसद और एक बार सादुलपुर से विधायक रहे हैं. राहुल के दादा दीपचंद सादुलपुर से निर्दलीय विधायक रह चुके हैं. वहीं राहुल की मां कमला कस्वां सादुलपुर से एक बार विधायक और एक बार जिला प्रमुख रह चुकी हैं.

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    सादुलपुर के कस्वां परिवार की तीसरी पीढ़ी के राहुल अब राजनीति के क्षेत्र में अपनी जड़ें गहरी करने में जुटे हैं. राहुल का यहां मुकाबला कांग्रेस के रफीक मंडेलिया से हुआ है. 16वीं लोकसभा में सांसद रहे राहुल के रिपोर्ट कार्ड की बात करें तो संसद में उनकी उपस्थिति 95 फीसदी रही है. करीब 42 वर्षीय राहुल ने बीकॉम और मैनेजमेंट की पढ़ाई की है. वर्ष 2014 के चुनाव में पार्टी ने राहुल को उनके पिता रामसिंह कस्वां की टिकट काटकर उनको चुनाव मैदान में उतारा था. राहुल ने अपने पहले चुनावी मुकाबले में बीएसपी प्रत्याशी अभिनेष महर्षि को करीब तीन लाख के भारी मतों के अंतर से हराया था. उस चुनाव में कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही थी.

    सन्नी देओल के साथ रोड शो में राहुल कस्वां। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।


    टिकट पर मंडराया था संकट
    उसके बाद इस बार लोकसभा चुनाव के टिकट विरतण के समय पार्टी की अंदरुनी राजनीति के चलते राहुल की टिकट पर एकबारगी संकट के बादल मंडरा गए थे. चर्चाएं रही कि क्षेत्र के दिग्गज नेता एवं वर्तमान में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने राहुल की बजाय जिला प्रमुख हरलाल सहारण की मजबूत पैरवी की. पार्टी की अंदरुनी राजनीति के चलते उनका टिकट घोषित होने में थोड़ा समय लगा. लेकिन अंतत: पार्टी ने उनके नाम पर मुहर लगा दी. चूरू के राजनीति में कभी एक साथ रहे कस्वां परिवार और राठौड़ में अब 36 आंकड़ा है.

    राहुल कस्वां।


    यह चुनाव तय करेगा भविष्य
    मोदी लहर और अपने विकास कार्यों के दावों के बूते चुनाव लड़ने वाले राहुल युवा हैं और उन्होंने बीते पांच साल में युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाने की पुरजोर कोशिश की है. राजनीतिक परिवार से होने का उन्हें जबर्दस्त फायदा मिला है. इस बार का परिणाम उनके राजनीतिक करियर की दिशा तय करने वाला साबित होगा.

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