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रस्मों के साथ 2 पेड़ों की हुई शादी, पूरा गांव बना बाराती, दिलचस्प है वजह

Churu Samachar: राजस्थान के चूरू में खास संदेश देने दो पेड़ों की शादी करा दी गई.

Churu Samachar: राजस्थान के चूरू में खास संदेश देने दो पेड़ों की शादी करा दी गई.

Churu Two Tree Marriage: राजस्थान (Rajasthan News) के चूरू (Churu News Today) में हुई एक शादी (Anokhi Shadi) इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. पर्यावरण का संदेश देने के लिए दो पेड़ों की शादी कराई गई. टेंट लगाए गए और जोधपुर से हलवाई भी बुलाए गए. महिलाओं ने मांगलिक गीत गाए और रीति-रिवाजों के बीच खेजड़ी और पीपल पेड़ की धूमधाम से शादी करवाई गई. गांव खरतवास में पूर्णिमा के पावन दिन पीपल व खेजड़ी का विवाह धूमधाम से हुआ. विवाह से पहले षष्टी कर्म, नामकरण और यज्ञोपवित हुए. इसके अलावा बान, भात, पार्टी और बंदोरी आदि भी हुए. विवाह के लिए पीपल के पेड़ को दूल्हा तथा खेजड़ी के पेड़ को दुल्हन की तरह सजाया जाएगा. ढोल नगाड़ों और डीजे की धुन पर महिलाओं ने नृत्य की शानदार प्रस्तुति देकर संगीता का आयोजन भी किया. गांव में करीब 35 साल पहले भी ऐसे शादी हुआ करती थी.

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चूरू. राजस्थान के चूरू जिले की तारानगर तहसील के गांव खरतवास में पर्यावरण बचाने का संदेश देने के लिए दो पेड़ों की शादी करवाई गई. यह शादी कोई औपचारिकता मात्र नहीं थी, बल्कि इसकी तैयारी 14 मई से ही शुरू हो गई थी. बाकायदा टेंट लगाए गए. महिलाओं ने मांगलिक गीत गाए और वैदिक रीति रिवाजों के बीच 16 मई को खेजड़ी और पीपल की धूमधाम से शादी करवाई गई. अब पीपल और खेजड़ी इस शादी के बाद एकदूसरे के हो गए. इसमें बाराती गांव के ही लोग बने. हिंदू परंपराओं के अनुसार मंगल गीतों के बीच पुरोहित ने मंत्रोचारण कर फेरे कराए. शादी के मौके पर महिलाओं और गांव के युवाओं ने गीतों पर धमाल मचाया और पूरे गांव के अलावा रिश्तेदारी के सैकड़ों लोग भोज में भी शामिल हुए.
गांव खरतवास में पूर्णिमा के पावन दिन पीपल व खेजड़ी का विवाह धूमधाम से हुआ. विवाह से पहले षष्टी कर्म, नामकरण और यज्ञोपवित हुए. इसके अलावा बान, भात, पार्टी और बंदोरी आदि भी हुए. विवाह के लिए पीपल के पेड़ को दूल्हा तथा खेजड़ी के पेड़ को दुल्हन की तरह सजाया जाएगा. इस मौके पर ढोल नगाड़ों और डीजे की धुन पर महिलाओं ने नृत्य की शानदार प्रस्तुति देकर संगीता का आयोजन भी किया.

बेहद खास है शादी के पीछे की वजह 
यह शादी गांव के खेवाराम नैण ने करवाई है. खेवाराम नैण का कहना है कि पर्यावरण संतुलन बिगड़ने पर ही कोरोना काल में ऑक्सीजन की हुई कमी के चलते सैंकड़ों लोगों की जान गई थी. उस समय विचार आया कि अगर हमारा पर्यावरण सही होता तो आज ऑक्सीजन की कमी से लोग नहीं मरते. इसलिए अगर में दो पेड़ों को बचाया जाए तो अन्य भी इस बात से सीख लेकर सैंकड़ों पेड़ों को बचाएंगे. शादी में आए हुए लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने की भी सीख दी जा रही है.

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अनोखी शादी में हलवाई भी जोधपुर से लाए गए है. गांव में करीब 35 साल पहले भी ऐसे शादी हुआ करती थी. इस शादी में बान बैठने से लेकर विदाई तक की सभी रस्में होगी. इस शादी में करीब सात लाख रुपये का खर्चा आया है. जिसमें गणपति पूजन, हलदाथ बान, महिला संगीत, बंदोरी और मंगलगीत से लेकर विदाई तक की सभी रस्मे निभाई गई है. यह अनोखी शादी में एक अलग ही चर्चा का विषय बनी हुई है.

Tags: Churu news, Rajasthan news, Unique wedding

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