होम /न्यूज /राजस्थान /चूरू: भाई-बहन का ये अटूट प्यार न देखा तो फिर क्या देखा, बहन को पीठ पर लादकर पहुंचाता है कॉलेज- See Video

चूरू: भाई-बहन का ये अटूट प्यार न देखा तो फिर क्या देखा, बहन को पीठ पर लादकर पहुंचाता है कॉलेज- See Video

Disability is not a curse: अफसाना नाज दिव्यांग पैदा हुई थीं. आस-पड़ोस के बच्चों को स्कूल जाता देख अफसाना नाज के मन में भ ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट : नरेश पारीक

चूरू. फिल्मों में तो आपने भाई-बहन के अटूट रिश्तों की अनगिन कहानियां देखी होंगी. उनके आपसी समर्पण और साझेदारी देख मुमकिन है कि आपकी आंखें भी नम हुई हों. पर आज हम आपको फिल्मी नहीं, बिल्कुल जमीनी हकीकत दिखाने जा रहे हैं, जहां भाई ने अपनी बहन के लिए ऐसा समर्पण भाव दिखाया है कि बहन कहती है ‘दुनिया में मेरा भाई सबसे बेस्ट है’. जी हां, ये शब्द सुनते ही भाई की भी आंखें गीली हो जाती हैं. चूरू के रहनेवाले इन दोनों भाई-बहनों का प्यार इलाके का बच्चा-बच्चा जानता है. भाई पर पूरी तरह निर्भर इस बहन का नाम है अफसाना नाज और अपनी बहन के लिए पूरी तरह कुर्बान उसके छोटे भाई का नाम है मो. सद्दाम.

भाई-बहन की ये जोड़ी अपनी मां के साथ चूरू के वॉर्ड 26 में रहती है. अफसाना के दोनों हाथ और पांव जन्म से ही इस कदर मुड़े हैं कि वह लाचार हैं. अपना बैग तक नहीं उठा सकतीं. लेकिन उम्र में 4 बरस छोटा उनके भाई सद्दाम ने अपनी पीठ पर अपना बैग ढोने की जगह अपनी बड़ी बहन को उठाना ज्यादा मुनासिब समझा. वह अपनी दिव्यांग बहन के संघर्ष में उसका सारथी बन गया. भाई-बहन की ये दास्तां दुनिया के लिए मिसाल है.

मुश्कलों के वे दिन

बता दें कि अफसाना नाज दिव्यांग पैदा हुई थीं. इस परिवार को तब झटका लगा जब 5 बरस की अफसाना नाज के सिर से उसके पिता का साया उठ गया. मां ने जैसे-तैसे संघर्ष कर घर चलाया, अपने 3 जनों के परिवार को पाला पोसा. आस-पड़ोस के बच्चों को स्कूल जाता देख अफसाना नाज के मन में भी स्कूल जाने का ख्याल आया, लेकिन दिव्यंगता उसके आड़े आई. अपनी बेबसी से उसने समझौता कर लिया. उसने स्कूल जाने की तमन्ना छोड़ दी. लेकिन उसके छोटे भाई सद्दाम को यह समझौता मंजूर नहीं हुआ. वह अपनी बड़ी बहन की बेबसी को दिल पर ले बैठा और ठान लिया कि बड़ी बी की तमन्ना पूरी करने के लिए अपने स्कूल बैग की जगह अपनी बड़ी बहन को पीठ पर उठाकर स्कूल ले जाएगा. कहना न होगा कि बचपन में किए अपने फैसले को सद्दाम ने अब तक अपने जिगर से लगाकर रखा है. उसने अपनी बहन के सपने बिखरने नहीं दिया. उसके संघर्ष में उसका सारथी बनकर भाई-बहन केअटूट रिश्ते में रोज नया अध्याय जोड़ता गया.

13 साल तक छूटी रही पढ़ाई

अफसाना आज 33 बरस की हैं. वह बताती हैं कि 12वीं के बाद बीमारी के चलते उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन छोटे भाई मो. सद्दाम ने उसे प्रेरित कर कॉलेज में फॉर्म भरवाया और एग्जाम के लिए उसे पीठ पर उठाकर ले जाता रहा. यह रोमांचित करने वाली बात है कि आज अफसाना नाज बीए सेकेंड ईयर की छात्रा हैं और RS-CIT का कोर्स कर चुकी हैं.

मां-भाई हैं हाथ-पांव

अफसाना अपने हाथ और पांव से मजबूर भले हों, पर कहती हैं कि उसकी मां और उसका भाई उसके हाथ-पांव हैं. रोज की दिनचर्या से लेकर जीवन के हर मोड़ पर इन दोनों का ही साथ रहा. अफसाना कहती हैं कि शुरू में तो कलम पकड़ने में भी परेशानी होती थी. लेकिन अब वे आराम से लिख और पढ़ सकती हैं.

भाई-बहन के प्यार की चर्चा

शहर में बहन अफसाना नाज और भाई मो. सद्दाम के अटूट प्रेम की चर्चा हर जुबां पर है. लोगों ने बताया कि शादी समारोह हो या कोई भी कार्यक्रम सद्दाम अपनी बहन को साथ लेकर जरूर आता है. अफसाना भी अपने भाई के साथ ही कार्यक्रमों में शरीक होती है.

Tags: Churu news, Disabilities, Rajasthan news

टॉप स्टोरीज
अधिक पढ़ें