चूरू पुलिस पर क्यों लगे हैं हिरासत में मौत और गैंगरेप के दाग ? यह है पूरा मामला

चूरू में सरदारशहर पुलिस की हिरासत में चोरी के आरोपी युवक नेमीचंद नायक की हुई मौत और उसके बाद पुलिस पर गैंगरेप जैसे गंभीर आरोप लगने से चूरू पुलिस कटघरे में है. इस पूरे प्रकरण में सरदारशहर पुलिस की कार्यप्रणाली बेहद संदिग्ध है.

News18 Rajasthan
Updated: July 13, 2019, 1:12 PM IST
चूरू पुलिस पर क्यों लगे हैं हिरासत में मौत और गैंगरेप के दाग ? यह है पूरा मामला
सरदारशहर पुलिस थाने का है मामला। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
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Updated: July 13, 2019, 1:12 PM IST
चूरू में सरदारशहर पुलिस की हिरासत में चोरी के आरोपी युवक नेमीचंद नायक की हुई मौत और उसके बाद पुलिस पर गैंगरेप जैसे गंभीर आरोप लगने से चूरू पुलिस कटघरे में है. इस पूरे प्रकरण में सरदारशहर पुलिस की कार्यप्रणाली बेहद संदिग्ध है. मामले की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में नेमीचंद की मौत पुलिस की पिटाई से होना माना जा रहा है. इस मामले में पूरे थाना स्टाफ को हटाने के साथ ही चूरू एसपी को एपीओ और सरदारशहर पुलिस उपाधीक्षक को सस्पेंड किया जा चुका है.

6 जुलाई को दिन में पकड़ा था नेमीचंद को


पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक गत वर्ष 13 दिसंबर को सोनपालसर गांव निवासी कालूराम के घर चोरी की वारदात हुई थी. कालूराम ने शक के आधार पर गांव के ही नेमीचंद नायक (25)  के खिलाफ नामजद मामला दर्ज कराया था. उसके बाद हाल ही में 3 जुलाई को धीरासर गांव में ग्रामीणों ने नेमीचंद को चोरी करते हुए पकड़ लिया था. इस पर ग्रामीणों ने उसकी पिटाई दी. सूचना मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे छुड़ाया. पुलिस ने उसे इलाज के बाद थाने आने के लिए कहा था. लेकिन वह नहीं आया. इस पर पुलिस गत शनिवार को यानी 6 जुलाई को उसे पकड़कर थाने लाई थी.

6 जुलाई की रात को हुई थी नेमीचंद की मौत

शनिवार आधी रात करीब पौने दो बजे नेमीचंद ने थाने में बेचैनी की शिकायत की तो पुलिस उसे लेकर सरदारशहर के राजकीय अस्पताल पहुंची. वहां रात करीब सवा दो बजे उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. पुलिस ने मृतक के शव को मोर्चरी में रखवाकर आला अधिकारियों को सूचित किया. सूचना पर सुबह जिला कलक्टर, एसपी और अन्य आला अधिकारी सरदारशहर पहुंच गए.

7 जुलाई को गायब हुए थे भाई-भाभी
बताया जा रहा है इस बीच सरदारशहर पुलिस ने 4 जुलाई को उसकी भाभी को पकड़ा था, लेकिन गिरफ्तारी नहीं दिखाई. परिजनों का आरोप है कि नेमीचंद के साथ हुई मारपीट की उसकी भाभी चश्मदीद गवाह है. लिहाजा नेमीचंद की मौत के बाद पुलिस ने उसके साथ बर्बरता की है. परिजनों का यह भी आरोप है कि पुलिस ने नेमीचंद की मौत के बाद 7 जुलाई को देर रात जोर जबर्दस्ती कर दाह संस्कार करवा दिया था. दाह संस्कार के समय उसके भाई-भाभी मौजूद थे, लेकिन बाद में गायब हो गए.
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8 जुलाई को बदला था थाने का स्टाफ
8 आठ जुलाई को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रकाश कुमार मामले की जांच के लिए फिर सरदारशहर पहुंचे। उनकी जांच के बाद पुलिस अधीक्षक ने थानाप्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड और 26 को लाइन हाजिर कर थाने में पूरा नया स्टाफ तैनात किया गया.

10 जुलाई को पुलिसकर्मी छोड़ गया भाई-भाभी को
नेमीचंद के परिजनों ने उसके भाई-भाभी के गायब होने की इसकी सूचना स्थानीय पुलिस के साथ ही जिले के बड़े पुलिस अधिकारियों को दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. इस पर वे आईजी के पास बीकानेर पहुंचे और वहां गुहार लगाई. 10 जुलाई को एक पुलिसकर्मी सोनपालसर आया और नेमीचंद की भाई-भाभी को वहां छोड़कर चला गया. उसके बाद गांव की महिलाओं ने उसकी स्थिति देखी को उससे पूछताछ की. इसमें उसने पुलिस द्वारा की गई बर्बरता को उजागर किया. बहरहाल पीड़िता जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती है वहां उसका इलाज चल रहा है.

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