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Churu News : चांदी के गोले दागने वाला यह गढ़ खंडहर होने की कगार पर, जानें आखिर क्यों राजा ने दागे थे चांदी के गोले

देश मे अपनी एक अलग पहचान रखने वाला चूरू का ऐतिहासिक गढ़ आज दुर्दशा का शिकार है. वर्षो पहले चूरू के इस गढ़ से चांदी के गोल ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट-नरेश पारीक

चूरू. चांदी के गोले दागने का साक्षी रहा चूरू का ऐतिहासिक गढ़ आज दुर्दशा का शिकार हो रहा है.  अब यह ढहने के कगार पर है. सरकार की ओर से इस ऐतिहासिक गढ़ के जीर्णोदार का बीड़ा उठाया गया और 5 करोड़ रुपए के बजट की स्वीकृति जारी कर दी. लेकिन इस ऐतिहासिक धरोहर को इसके मुख्य स्वरूप में लाने के लिए ये राशि ना काफी है.

शहर के स्थानीय लोगों ने बताया कि चूरू के शाशक ठाकुर कुशल सिह नेसंवत् 1751 ईस्वी सन 1694 में इस गढ़ का निर्माण कराया था. इतिहास के अनुसार उस वक्त क्षेत्र में लुटेरों का आतंक था. शासक वर्ग के लड़ाई में बाहर जाने से शहर असुरक्षित हो जाता था. लुटेरों से बचने के लिए गढ़ बनवाया. दीवारों में नौ बुर्ज बनाई गई.

शहर की सुरक्षा के लिए परकोटा बना चार दरवाजों का निर्माण भी कराया गया. इन दरवाजों में अगुणा मोहल्ला में पूर्वी दरवाजा, पश्चिम में बीकानेर दरवाजा, झारिया मोरी उत्तरी दरवाजा गुदड़ी बाजार जैन मंदिर के पास दक्षिणी दरवाजा बनाया गया. गढ़ में एक दरबार भवन बनाया एवं उसके ऊपर राज परिवार के रहने के लिए आवास बनाया गया. किले के पूर्वी परकोटे पर उल्लेख है कि संवत् 1865 में उस वक्त के शासक ठा. शिवजी ने श्रीगोपाल मंदिर बनावाया.

जब चांदी पिघला बनाए गोले

चूरू अपने आप में कई विशेष जानकारियां संजोए हैं, जिसमें युद्ध के दौरान चांदी के गोले दागना भी एक है. घटना सन् 1814 की बताई जाती है, तत्कालीन बीकानेर महाराजा सूरत सिंह ने चूरू पर आक्रमण कर दिया. उस समय चूरू अलग बड़ी रियासत हुआ करती थी. उस दौरान चूरू के शासक ठाकुर शिवजी सिंह थे.

बीकानेर रियासत ने किया था आक्रामण

बीकानेर रियासत का चूरू पर तीसरा आक्रमण था. जानकार बताते हैं कि बीकानेर की फौज ने पानी की टंकी (नीमडी धोरा) पर पड़ाव डालकर शहर को चारों तरफ से घेर लिया था. बीकानेर की फौजों ने चूरू को तीन महिनों तक घेरे रखा. ऐसे में राशन सहित गोला बारूद भी खत्म हो गए. गोला बारूद समाप्त होने पर चूरू के शासक ने चांदी के गोले दागने का विचार किया, इस पर महल में रखे गहने इकठ्ठे किए. इस काम में शहर के सेठ-साहूकारों ने भी सहयोग कर जेवर दिए. जिन्हें पिघलाकर चांदी के गोले तैयार किए गए व दुश्मन की सेना पर छोड़ा गया.

भाट ने कर दी थी राजा की मुखबिरी

रणक्षेत्र में चांदी के गोले देखकर बीकानेर फौज घबरा गई, उन्होंने विचार किया कि चांदी के बाद चूरू की फौज किस तरह के आक्रमण करेगी. ऐसे में घबराई बीकानेर की फौज वापस लौटने लगी. फौज को लौटता देखकर एक भाट जो कि चूरू शासक से जलन रखता था वो बीकानेर शासक के पास पहुंचा. उसने एक दोहे के माध्यम से उन्हें कुछ इशारा किया, भाट के दोहे का अर्थ समझते हुए बीकानेर शासक व फौज दोगुनी शक्ति से वापस लौटी व चूरू पर आक्रमण कर दिया. युद्ध में तत्कालीन चूरू शासक ठाकुर शिवजी सिंह वीर गति को प्राप्त हुए. हालांकि लड़ाई में चूरू सेना हार गई. लेकिन चांदी के गोले दागना लोगों की जुबां पर चढ़ चुका है.

Tags: Churu news, Rajasthan news

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