चूरू में 30 करोड़ के रेलवे ओवर ब्रिज की अल्ट्रासाउन्ड टेस्टिंग शुरू, जांच में खरा नहीं उतरा तो होगा ध्वस्त

चूरू जिला मुख्यालय में चूरू-जयपुर रोड पर करोड़ों की लागत से बना रेलवे ओवरब्रिज पांच साल बाद ही हजारों लोगों के लिए जी का जंजाल बन गया है. 2013 में बने इस आरओबी की डिफेक्ट लायबिलिटी खत्म होते ही यह दरकने लगा है.

Manoj K. Sharma | News18 Rajasthan
Updated: July 23, 2019, 4:22 PM IST
चूरू में 30 करोड़ के रेलवे ओवर ब्रिज की अल्ट्रासाउन्ड टेस्टिंग शुरू, जांच में खरा नहीं उतरा तो होगा ध्वस्त
चूरू जिला मुख्यालय पर स्थित आरओबी।
Manoj K. Sharma | News18 Rajasthan
Updated: July 23, 2019, 4:22 PM IST
चूरू जिला मुख्यालय में चूरू-जयपुर रोड पर करोड़ों की लागत से बना रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) पांच साल बाद ही हजारों लोगों के लिए जी का जंजाल बन गया है. 2013 में बने इस आरओबी की डिफेक्ट लायबिलिटी खत्म होते ही यह दरकने लगा है. अब इस ओवरब्रीज की अल्ट्रासाउन्ड टेस्टिंग शुरू की गई है. जांच में अगर यह खरा नहीं उतरा तो करीब 30 करोड़ की लागत से बने इस आरओबी को धराशायी किया जाएगा. चूरू को राजधानी जयपुर से जोड़ने वाला यह आरओबी पिछले 10 महीनों से बंद पड़ा है.

चार प्रकार की टेस्टिंग होगी
26 सितंबर, 2018 को इस आरओबी का निचला हिस्सा गिर गया था. उसके बाद सरकारी तंत्र की कछुआ चाल के चलते हाई पावर कमेटी के आदेश के बावजूद भी इसकी जांच शुरू होने में ही छह महीने बीत गए. अब जाकर आरओबी के जांच का कार्य शुरू हुआ है. अब आरओबी की चार प्रकार की टेस्टिंग होगी. कोर कटिंग, अल्ट्रासाउंड, रिबाउंड हैमर तथा सेफ लोड टेस्टिंग. ईटीटीएल की तीन सदस्यीय टीम दो दिन से यहां जांच का कार्य कर रही है.

29 करोड़ 58 लाख की लागत से बना है

टीम ने आरओबी के प्रत्येक पीलर से चार-पांच सैंपल और आरओबी से मैटेरियल की कटिंग कर कई दर्जन सैंपल लिए हैं. सभी टेस्टिंग में पास होने पर ही बड़े वाहनों का आवागमन शुरू किया जा सकेगा. अन्यथा 29 करोड़ 58 लाख की लागत से बने इस आरओबी को धराशायी करना पड़ेगा. आरओबी की जांच के लिए 17 जनवरी, 2019 को सार्वजनिक निर्माण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जयपुर में हुई हाई पावर कमेटी की बैठक में टेंस्टिंग का फैसला लिया गया था.

28 मई, 2013 को सीएम अशोक गहलोत ने लोकार्पण किया था
साल 2009 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस आरओबी की घोषणा की थी. इसके निर्माण के लिए 29 करोड़ 58 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे. आरयूआईडीपी को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया था. गौतम कंस्ट्रक्शन कम्पनी कोलकाता को निर्माण का ठेका दिया गया था. 28 मई, 2013 को सीएम अशोक गहलोत ने इसका लोकार्पण किया था.
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आवागमन में होती है बेजा परेशानी
अभी आरओबी बंद होने के कारण सभी वाहनों को अग्रसेन नगर बाईपास से होकर जाना पड़ रहा है. यहां दिन में हर 15-20 मिनट में रेलवे फाटक बंद होता रहता है. इसके कारण वहां सड़क पर हर वक्त जाम की स्थिति बनी रहती है. लोग जाम में कई बार आधे-पौने घंटे तक फंसे रहते हैं.

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First published: July 23, 2019, 4:10 PM IST
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