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Churu News : यहां मिर्गी रोग का होता है निशुल्क उपचार, ठीक होने में लगता है इतना समय

राजस्थान के चूरु के रतननगर में पिछले 28 वर्षों से एक चिकित्सक द्वारा मिर्गी रोगियों का ना सिर्फ निःशुल्क उपचार किया जा ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट-नरेश पारीक
चूरू. राजस्थान के चूरू में पिछले 28 वर्षो से त्रिवेणी देवी सुरेका चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा प्रतिमाह लगने वाला निःशुल्क मिर्गी निदान शिविर रतननगर में सम्पन्न हुआ. शिविर में 562 मरीजो का उपचार कर एक माह की दवाई रोगियों को निःशुल्क वितरित की गई. मुख्य न्यूरोफिजिशियन डॉ. आरके सुरेका ने बताया कि शिविर में मिर्गी रोगियों द्वारा एक पोस्टर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया और विजेताओं  को पुरस्कार देकर कलेक्टर सिद्धार्थ सिहाग ने सम्मानित किया.

डॉ. सुरेका ने बताया कि नियमित रूप से यदि मिर्गी रोगी दो से तीन साल लगातार इलाज लेता है तो उनकी बीमारी ठीक हो सकती है व सामान्य व्यक्ति की तरह कार्य कर सकता है. महिलाओं  के प्रसव के समय घर पर दाइयों से प्रसव नही कराना चाहिए उन्होंने बताया कि घर पर प्रसव कराने से बच्चो में ऑक्सीजन की कमी होने से बच्चे को मिर्गी रोग हो सकता है. उन्होंने कहा प्रसव अस्पताल में ही करवाना चाहिए.जिला कलक्टर ने कहा कि मिर्गी रोगियों में जागरूकता पैदा करने से प्रचलित भ्रांतिया दूर की जा सकती है. मिर्गी रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है.

अंधविश्वास का न हो शिकार

डॉक्टर आरके सुरेका ने कहा कि इस रोग को पूर्ण रूप से मिटाने के लिए कम से कम 5 साल तक इलाज कराना पड़ता है. ध्यान रखने योग्य बात यह है कि इस दौरान रोगी द्वारा एक भी गोली नहीं छोड़ी जानी चाहिए. दवाइयों और जांचों का खर्च मिलाएं तो करीब महीने का 1200 रुपये का खर्च है. ग्रामीण मरीज़ भोंपों (तांत्रिक बनकर इलाज करने वाले लोग) के पास जाकर 40-50 रुपए में झाड़-फूंक करवा लेते हैं क्योंकि 15-20 मिनट में इस दौरे के बाद मरीज़ खुद ही ठीक हो जाता है. एक दौरे से दूसरे दौरे के बीच का अंतराल 3 से 6 महीने का होता है. इसलिए वे लोग नियमित इलाज नहीं करवाते. दूसरी बात उनमें अशिक्षा, आर्थिक तंगहाली व अंधविश्वास भी भरा रहता है.

अन्य राज्यो के भी आते हैं रोगी

रतननगर में हर माह निशुल्क शिविर लगाने वाले डॉ.सुरेकाअब तक 8000 रोगियों को निशुल्क दवाएं देकर मिर्गी से छुटकारा दिला चुके हैं. इन शिविरों में प्रदेशभर के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के रोगी भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं.

Tags: Churu news, Rajasthan news

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