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    अलवर: पेयजल योजनाओं में भ्रष्टाचार का खुलासा, कंपनियों को बिना काम पूरा किये 150 फीसदी ज्यादा किया गया भुगतान

    राजस्थान में जलप्रदाय विभाग में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है.
    राजस्थान में जलप्रदाय विभाग में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है.

    राजस्थान में अलवर (Alwar) जिले के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की पेयजल योजनाओं में भ्रष्टाचार (Corruption) का खुलासा हुआ है. कैग (CAG) रिपोर्ट (Report) में खुलासा हुआ है कि कंपनियों को बिना काम पूरा किये तय राशि से 150 फीसदी राशि ज्यादा दी गई है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 13, 2020, 7:00 PM IST
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    अलवर. अलवर (Alwar) जिले के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की पेयजल योजनाओं में महाभ्रष्टाचार (Corruption) का खुलासा हुआ है. यह खुलासा कैग की जांच के बाद सामने आया है. जलदाय विभाग (Water Supply Department) के इंजीनियरों और और ठेकेदारों की सांठ-गांठ से सरकारी खजाने को अरबों रुपये का चूना लगाया जा रहा था. कैग (CAG) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि विभाग के इंजीनियरों ने भ्रष्टाचार की तमाम सीमाएं लांघते हुए अधूरे कार्यों का ठेकेदारों को पूरा भुगतान कर दिया और कार्य पूर्णता का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया. जबकि हकीकत में एख भी काम पूरा नहीं हुआ है.

    अलवर जिले के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 278 करोड़ रुपए की पेयजल योजनाओं में खुलेआम भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है. भ्रष्टाचार करने वाले कोई और नहीं बल्कि अरबों रुपए के प्रोजेक्ट को पूरा करने वाले जलदाय विभाग के इंजीनियर और ठेकेदार ही भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं. ये हम नहीं कह रहे बल्कि महालेखाकार कार्यालय द्वारा एनसीआर क्षेत्र में जलदाय विभाग के प्रोजेक्ट की ऑडिट में यह खुलासा हुआ है. अलवर एनसीआर में पेयजल प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के आंकड़े इस प्रकार हैं...

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    • तिजारा वाटर अपग्रेडशन प्रोजेक्ट - मैसर्स डीम कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट कंपनी द्वारा चलाए जा रहे 15 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट पर अब तक 16 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान कंपनी को कर दिया गया है, लेकिन हैरानी की बात ये है कि अभी तक सिर्फ 48 फीसदी कार्य ही तिजारा के इस प्रोजेक्ट का पूरा हो सका है. इस प्रोजेक्ट का 52 फीसदी कार्य बाकी है, जिसका भुगतान तो कर दिया गया है. साथ ही विभाग के इंजीनियरों ने नियम विरुद्ध कंपनी को कार्य पूर्णता का सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया है. प्रोजेक्ट का कार्य 2018 में पूरा होना था, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के ढाई साल बाद भी कंपनी ये कार्य पूरा नहीं कर पाई है.



    • बहरोड़ प्रोजेक्ट- मैसर्स डीम कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट कंपनी द्वारा 24 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2017 में पूरा करना था, लेकिन तीन साल बाद भी कार्य 60 फीसदी नहीं हो सका है. जलदाय विभाग के भ्रष्ट इंजीनियर्स ने इस प्रोजेक्ट का पूरा भुगतान मैसर्स डीम कंस्ट्रक्शन्स कंपनी को कर दिया है. साथ ही
      इंजीनियरों ने कंपनी को कार्य पूर्णता का सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया है.राजस्थान में ऊंटनी के दूध से लुप्त होते ऊंटों को मिलेगा नया जीवन! किसानों ने किया ये खास उपाय

    • भिवाड़ी प्रोजेक्ट- जलदाय विभाग ने भिवाड़ी के इस प्रोजेक्ट को कोलकाता की कंपनी मैसर्स WPIL SMS JV कंपनी को करीब 38 करोड़ रुपए में पूरा करने का ठेका जारी किया था. अप्रैल 2018 तक कंपनी को 38 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को पूरा कर इलाके के लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना था. हैरानी की बात ये है कि इस प्रोजेक्ट पर जलदाय विभाग के इंजीनियर्स ने 38 करोड़ रुपए की जगह 61 करोड़ रुपए तो बढा दिये. सरकारी खजाने से निर्धारित राशि से डेढ सौ फीसदी से ज्यादा खर्च कर दी गई, लेकिन मैसर्स WPIL SMS JV कंपनी ने 65 फीसदी कार्य भी नहीं किया है.

    • राजगढ प्रोजेक्ट - इस प्रोजेक्ट में 17 करोड़ रुपए की लागत से मैसर्स A B एंटरप्राइजेज एवं मैसर्स डीम कंस्ट्रक्शन कंपनी को वर्ष 2017 में कार्य पूरा करना था. इस प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृत पूरे 17 करोड़ रुपये का भुगतान कार्य करने वाली कंपनियों को कर दिया गया, लेकिन कैग की रिपोर्ट में चौकाने वाला खुलासा हुआ है कि अभी भी 68 फीसदी कार्य नहीं हो सका है. जलदाय विभाग के भ्रष्ट इंजीनियर्स ने कार्य पूरा हुए बिना ही कंपनी को इस प्रोजेक्ट का कार्य पूर्णता का सर्टिफिकेट जारी कर दिया है.

    • अलवर प्रोजेक्ट- अलवर जिले में कुल 112 करोड़ रुपए की लागत से मैसर्स इंडियन ह्यूमैन पाइप कंपनी को ढाई साल पहले यानी अप्रेल 2018 में इस प्रोजेक्ट का कार्य पूरा करना था. 112 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट पर जलदाय विभाग के इंजीनियर्स ने ठेकेदार से मिलीभगत कर 145 करोड़ रुपए खर्च करवा दिए, लेकिन अभी भी इस प्रोजेक्ट का 80 फीसदी कार्य नहीं हो सका है. हैरानी की बात ये है कि इस जलदाय विभाग के इंजीनियर्स ने कंपनी पर ना तो कोई पैनल्टी लगाई है और ना ही कंपनी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की है.Rajasthan: करौली के बाद अब सीकर में एक बुजुर्ग की पत्थरों से पीट-पीटकर हत्‍या, 5 युवक हिरासत मेंकैग की रिपोर्ट में क्या है?
      कैग की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है की जलदाय विभाग ने ठेकेदारों और कंपनियों के साथ नियम विरूद्ध तरीके से सरकारी खजाने से भुगतान किया गया है. सभी प्रोजेक्ट का भुगतान करने से पहले प्रोजेक्ट में लगाए उपकरणों और मैटेरियल की जांच रिपोर्ट फाइनल करनी थी. बिना जांच रिपोर्ट के किसी प्रकार
      के भुगतान पर पूरी तरह से रोक लगाने का प्रावधान भी है. कंपनियों द्वारा निर्धारित समय पर कार्य पूरा नहीं करने पर विभागीय नियमानुसार 15 फीसदी तक जुर्माने का प्रावधान है साथ ही कार्य करने वाली कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उसे ब्लैक लिस्ट करने का नियम है, लेकिन अलवर एनसीआर क्षेत्र में ये सभी नियम सिर्फ कागजी साबित हो रहे हैं. कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इंजीनियर्स द्वारा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की बात तो दूर बल्कि अधूरे कार्यों का कार्यपूर्णता का सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया.

      घोटाले को ऐसे समझें
      अलवर एनसीआर क्षेत्र की पेयजल योजनाओं का कार्य एक दशक से चल रहा है. पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहे इस इलाके के रहवासियों को करीब तीन साल पहले ही पेयजल की व्यवस्था होनी थी. जिसमें सरकारी खजाने से डेढ सौ फीसदी अधिक राशि का भुगतान कंपनियों को कर दिया गया, लेकिन एक भी प्रोजेक्ट अभी तक पूरा नहीं हुआ है. अब जलदाय विभाग के इंजीनियर्स द्वारा कार्य पूर्णता का सर्टिफिकेट जारी एवं कंपनियों को कार्य से अधिक भुगतान मिलने से कंपनियां इन प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर रही हैं. विभागीय नियमानुसार जिन कंपनियों पर प्रोसिक्यूशन और पैनल्टी के साथ-साथ बकाया वसूली की सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी उन सभी कंपनियों को इंजीनियर्स ने एनओसी जारी कर लाइफ लाइन दे दी है.

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