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राजस्थान हाईकोर्ट में लगी मनु की प्रतिमा हटाएं, दलित कार्यकर्ता ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र

राजस्‍थान हाईकोर्ट में लगी मनु की प्रतिमा. (फाइल फोटो)

राजस्‍थान हाईकोर्ट में लगी मनु की प्रतिमा. (फाइल फोटो)

नवसर्जन ट्रस्ट (Navsarjan Trust) ने राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर 15 अगस्त से पहले यह प्रतिमा नहीं हटाई गई, तो जोरदार आंदोलन (Protest)  किया जाएगा.

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    जयपुर. राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court) परिसर में लगी मनु की प्रतिमा हटाने को लेकर एक दलित कार्यकर्ता ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को पत्र लिखा है. कार्यकर्ता मार्टिन मैक्वां ने अपने पत्र में लिखा है कि हाईकोर्ट परिसर में मनु की प्रतिमा का अब तक मौजूद होना भारतीय संविधान (Constitution Of India) और दलितों का अपमान है. साथ ही यह बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के जातिमुक्त देश बनाने की सोच को भी कमजोर करता है. गुजरात में दलित अधिकार के लिए कार्यरत संगठन नवसर्जन ट्रस्ट के संस्थापक मार्टिन मैक्वां ने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में कहा है कि मनु की यह प्रतिमा मौजूदा समय में सिर्फ दलित उत्पीड़न का प्रतीक ही नहीं, बल्कि महिलाओं और शूद्रों के खिलाफ है.

    31 साल पहले लगी थी प्रतिमा
    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान हाईकोर्ट के बाहर लगी मनु की प्रतिमा को राज्य सरकार ने वर्ष 1989 में स्थापित किया था. दलित कार्यकर्ता मार्टिन ने अपने पत्र में इस पर भी सवाल उठाया है. साथ ही दास प्रथा और अमेरिका में हाल ही में अश्वेतों पर अत्याचार की खबरों से इसे जोड़ते हुए प्रतिमा हटाने की मांग की है. मार्टिन ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे पत्र में कहा है कि सैकड़ों साल पहले नहीं, बल्कि महज 31 साल पहले राजस्थान के कुछ अधिवक्ताओं के कहने पर राज्य सरकार ने अदालत परिसर में इस प्रतिमा की स्थापना कराई थी. यह हैरान करने वाला है कि कुछ अधिवक्ताओं ने मनु को इस देश का सबसे पहला कानून लिखने वाला बता दिया और राज्य सरकार ने यह प्रतिमा स्थापित करा दी.

    15 अगस्त से पहले प्रतिमा हटाने की चेतावनी
    नवसर्जन ट्रस्ट के संस्थापक मार्टिन मैक्वां ने अपने पत्र में इस बात की भी जानकारी दी है कि राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में लगी मनु की प्रतिमा को पहले भी हटाने की मांग की जाती रही है. अदालत जैसे सार्वजनिक स्थान पर इस प्रतिमा को लगाए जाने पर सवाल उठाते हुए नवसर्जन ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं ने राजस्थान सरकार को चेतावनी भी दी है. उन्होंने राजस्थान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर 15 अगस्त से पहले यह प्रतिमा नहीं हटाई गई, तो जोरदार आंदोलन किया जाएगा.

    पहले भी प्रतिमा हटाने की होती रही है मांग
    हिंदू धार्मिक ग्रंथ मनुस्मृति के रचयिता मनु की प्रतिमा राजस्थान हाईकोर्ट परिसर से हटाने की मांग पिछले कई वर्षों में उठती रही है. इस प्रतिमा को स्थापित किए जाने के महज 6 महीने बाद ही इसे हटाने की मांग की गई थी. पिछले 30 साल में अनेक बार इस बारे में अलग-अलग संगठनों या लोगों ने अपनी मांगें रखी हैं. राजस्थान हाईकोर्ट में प्रतिमा हटाने को लेकर याचिका भी दी गई थी, जिस पर फैसले से पहले पीआईएल दायर कर दिया गया था. वहीं वर्ष 2018 में औरंगाबाद की रहने वाली रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया से जुड़ी दो दलित महिला कार्यकर्ताओं ने इस प्रतिमा के ऊपर कालिख पोतने का प्रयास किया था.

     

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