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Dausa: बसवा के मिट्टी के बर्तन बने दौसा की पहचान, इस वजह से कई जिलों में है डिमांड

Dausa News: दौसा जिले के बसवा कस्बे के मिट्टी के बर्तन खास पहचान रखते हैं. यहां की मिट्टी बहुत अच्‍छी है ओर बर्तनों को ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट-पुष्पेंद्र मीना
दौसा. आज कल मिट्टी के बर्तन हमारे घरों में कम ही इस्‍तेमाल किए जाते हैं. हालांकि पहले मिट्टी के बर्तनों में खाना खाया जाता था. वास्तु शास्‍त्र के अनुसार, आपकी किचन में इस्‍तेमाल किए जाने वाले मिट्टी के बर्तन एक तरफ जहां आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं. इसके अलावा आपकी सेहत अच्‍छी रहती है. जबकि शास्त्रों में भी मिट्टी के बर्तनों को बहुत पवित्र और शुभ माना गया है.

राजस्थान के दौसा जिले के बसवा कस्बे के मिट्टी के बर्तन भी खास पहचान रखते हैं. यहां से निर्मित मिट्टी के बर्तन कई अन्य जिलों में भी जाते हैं, जिससे बसवा के लोगों को आमदनी हो रही है. बसवा में प्रजापति समाज के लोग मिट्टी से बर्तन बनाने का काम करते हैं और बहुत ही सुंदर आकृति के बर्तन बनाते हैं. मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारीगर जगमोहन ने बताया कि यहां की मिट्टी काफी अच्‍छी होती है, लिहाजा मिट्टी से किसी भी बर्तन को आकार ठीक दिया जा सकता है. जबकि इस मिट्टी से बने बर्तन सुंदर और मजबूत बनते हैं. वहीं,पानी के लिए बनाई जाने वाली मिट्टी की मटकी में पानी भी ठंडा रहता है. जयपुर संभाग के सभी जिलों में बसवा में बने मिट्टी के बर्तन पहुंचते हैं.

दौसा सांसद दे रही है मिट्टी के बर्तनों को बढ़ावा

जगमोहन सहित मिट्टी के बर्तन बनाने वाले लोगों का कहना है कि दौसा की सांसद जसकौर मीणा भी मिट्टी के बर्तनों को बढ़ावा देती हैं. कई बार वह बसवा आई हैं और हमसे बात की है. सांसद ने यहां से मिट्टी के बर्तन भी उनके गार्डन के लिए खरीदे हैं.

जानें क्‍या है लोगों की परेशानी

मिट्टी के बर्तन बनाने वाले लोगों ने बताया कि मिट्टी की लागत 75 प्रतिशत बनाने में लग जाती है. जबकि यहां मिट्टी भी कीमत देकर ही लानी पड़ती है और मेहनत भी करनी पड़ती है. वहीं, पूरा परिवार मिट्टी के बर्तन बनाने में लगा रहता है. सभी की आय को मिलाकर इस काम से 25 फीसदी ही बच हो पाती है.

बसवा में बनते हैं लालटेन, गमले, तवा, दीपक सहित अन्य सामान

दौसा जिले के बसवा कस्बे में मिट्टी के लालटेन, पानी की बोतल, तवे, गमले, दीपक, खिलौने सहित अन्य वस्तुएं मिट्टी की बनाई जाती हैं. वहीं, इनको दौसा सहित कई अन्य जिलों में भी बेचने के लिए सप्लाई किया जाता है.

चाक पर बनाते हैं मिट्टी के बर्तन

पहले हाथ से ही चाक को घुमाया जाता था और वह काफी समय तक लगातार घूमता रहता था. जिससे मजदूर मिट्टी के द्वारा बनाए जाने वाले बर्तनों को आकार दिया करते थे, लेकिन अब चाक को घुमाने के लिए मोटर लगा दी है. इससे ज्यादा परेशानी नहीं होती है और आसानी से मिट्टी का आकार देकर बर्तन बन जाते हैं.

Tags: Dausa news

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