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पाकिस्तान ही नहीं सिकराय में भी है हिंगलाज माता मंदिर, यहां लगता है भक्तों का जमावड़ा, जानें क्या है खास

पाकिस्तान की सीमा में जो हिंगलाज माता मंदिर है, उसे शक्तिपीठ बताया जाता है. इसके अलावा, दौसा ज़िले में भी हिंगलाज माता क ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट – पुष्पेंद्र मीणा

दौसा. ज़िले के सिकराय उपखंड मुख्यालय पर हिंगलाज माता का मंदिर है, जहां नवरात्रि के दौरान हज़ारों श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहता है और तरह-तरह के विशेष आयोजन होते हैं. कुछ अनोखी परंपराएं भी यहां देखने को मिलती हैं, जैसे प्रतिदिन हर घर से कनक दंडवत देते हुए श्रद्धालु माताजी के मंदिर पहुंचते हैं और ढोग लगाते हैं. इसके अलावा, रोज़ सत्संग का आयोजन होता है, बड़े स्तर पर सुबह शाम माता की आरती होती है और दिन में भागवत कथा का आयोजन भी. बड़ी संख्या में श्रोता पहुंचते हैं. संध्या आरती के बाद सभी को प्रसाद वितरण किया जाता है. हज़ारों की संख्या में लोग प्रसादी का आनंद लेते हैं.

जानकारी के अनुसार यह हिंगलाज माता मंदिर प्राचीन काल से सिकराय में स्थापित है और हिंगलाज माता का ही दूसरा मंदिर पाकिस्तान में है. सिकराय कस्बे के राजेश गौड़, विश्राम मीणा ने बताया ‘हिंगलाज माता मन्दिर, पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त के हिंगलाज में हिंगोल नदी के तट पर स्थित एक हिन्दू मन्दिर बताया जाता है. यह हिन्दू देवी सती को समर्पित इक्यावन शक्तिपीठों में से एक है. यहां देवी को हिंगलाज देवी या हिंगुला देवी भी कहते हैं. ऐसा भी पता चला है कि इस मन्दिर को नानी मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है. इसके साथ ही एक प्रसिद्ध मंदिर सिकराय में भी है.’

कनक दंडवत और रात्रि जागरण की परंपरा

नवरात्र के दौरान रोज़ महिला, पुरुष एवं बच्चे कनक दंडवत करते हुए हिंगलाज माता मंदिर पर पहुंचते हैं और वहां सत्संग में हिस्सा लेते हैं. यहां माता जी का जागरण भी होता है. बड़ी संख्या में महिला, पुरुष डीजे की धुनों पर जमकर थिरकते हैं और माता मंदिर की परिक्रमा भी की जाती है. स्थानीय निवासी घनश्याम, मेघराम, मन्नू लाल मीणा, प्रह्लाद मीणा, विश्राम मीणा सहित अन्य लोगों ने बताया कि सिकराय कस्बे में स्थित हिंगलाज माता के मंदिर में अन्य गांवों से भी अब पदयात्रा आने लगी है. बड़ी संख्या में पदयात्री आकर हिंगलाज माता के दर्शन करते हैं.

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अंतिम दिन हर घर में बनते हैं पकवान

नवरात्रि के अंतिम दिन सिकराय कस्बे में हर घर में पकवान बनते हैं और हिंगलाज माता को भोग लगाया जाता है. इसके बाद ही घर के सदस्य भोजन करते हैं. मान्यता है कि नवरात्रि के बाद यह कार्यक्रम होता है. देवी स्थापना के इन नौ दिनों के दौरान पूरे कस्बे में धूमधाम रहती है और कई गांवों से श्रद्धालुओं के आने से लोकगीत, संगीत और सांस्कृतिक माहौल बना रहता है.

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