दो बार लोकसभा चुनाव का रण फतह कर चुकी हैं जसकौर मीणा, ऐसा रहा है राजनीतिक सफर
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दो बार लोकसभा चुनाव का रण फतह कर चुकी हैं जसकौर मीणा, ऐसा रहा है राजनीतिक सफर
जसकौर मीणा। फाइल फोटो।

दो दिग्गज नेताओं की लड़ाई के बीच दौसा से चुनाव मैदान में उतारी गईं जसकौर मीणा पूर्व में दो बार सवाईमाधोपुर से सांसद रह चुकी हैं. वे केन्द्र की वाजपेयी सरकार में प्रदेश का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं.

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दो दिग्गज नेताओं की लड़ाई के बीच दौसा से चुनाव मैदान में उतारी गईं जसकौर मीणा पूर्व में दो बार सवाईमाधोपुर से सांसद रह चुकी हैं. वे केन्द्र की वाजपेयी सरकार में प्रदेश का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं. दौसा से वे पहली बार चुनाव लड़ रही हैं. प्रदेश में केवल दौसा लोकसभा सीट ही ऐसी है जहां दोनों प्रमुख पार्टियों ने महिला प्रत्याशियों को आमने-सामने चुनाव मैदान में उतारा है.

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मूलतया दौसा के लालसोट इलाके के मंडावरी गांव निवासी जसकौर मीणा शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी हुई रही हैं. वे सवाई माधोपुर में जिला शिक्षा अधिकारी रह चुकी हैं. शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहने के दौरान ही वे बीजेपी के वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया के संपर्क में आईं. कटारिया और संघ की सलाह पर ही पूर्व सीएम भैरोंसिंह शेखावत ने उनको लोकसभा का टिकट दिलवाया था. उसके बाद मीणा सवाईमाधोपुर से दो बार सांसद रह चुकी हैं.



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वाजपेयी सरकार के कैबिनेट की सदस्य रही हैं
सांसद रहते हुए जसकौर मीणा अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उनके कैबिनेट की सदस्य रही. वे केन्द्रीय कैबिनेट में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री का जिम्मा संभाल चुकी हैं. जसकौर मीणा के पति श्रीलाल मीणा व्यवसायी हैं. मीणा अब तक तीन बार सांसद का चुनाव लड़ चुकी हैं. इनमें से वर्ष 2004 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. वहीं वे 2008 में सवाईमाधोपुर से विधानसभा चुनाव मैदान में उतरी थी, लेकिन उसमें भी मीणा जीत दर्ज नहीं करा पाई.

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दो नेताओं की रस्साकस्सी में मिला टिकट
इस बार दौसा से जसकौर मीणा का नाम दो प्रमुख नेताओं की लड़ाई के चलते उभरकर सामने आया. दौसा में राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल मीणा खुद या खुद के परिवार से किसी को टिकट दिलवाना चाह रहे थे. उधर पूर्व संसदीय सचिव और महवा से इस बार बीजेपी के बागी निर्दलीय विधायक ओमप्रकाश हुड़ला भी दौसा से दावेदारी कर रहे थे. हुड़ला किरोड़ी को टिकट नहीं मिले इसके लिए भी जी जान से जुटे थे. दूसरी तरफ किरोड़ीलाल मीणा किसी भी कीमत पर हुड़ला का टिकट कटवाने की जुगत में थे. दो नेताओं की लड़ाई के बीच चल इस रस्साकस्सी में टिकट की लॉटरी जसकौर मीणा के हाथ लग गई.

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