Dausa News: किसान महापंचायत से सचिन पायलट मजबूत कर रहे अपनी सियासी जमीन, जानें पूरा मामला

सचिन पायलट की किसान महापंचायत से राजस्थान में सियासत गर्म.

सचिन पायलट की किसान महापंचायत से राजस्थान में सियासत गर्म.

किसान महापंचायतों (Kisan Mahapanchayat) में होने वाले ऐलान कृषि कानून पर न सिर्फ केन्द्र सरकार की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं बल्कि स्थानीय स्तर पर नेताओं के लिए नई संभावनाएं भी पैदा कर रहे हैं. राजस्थान की दौसा महापंचायत में सचिन पायलट (Sachin Pilot)और उनके गुट के विधायकों की मौजूदगी को भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मुकाबले बड़ी सियासी लकीर खींचने के दांव के रूप में देखा जा रहा है.

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दौसा. किसान आंदोलन (Kisan Aandolan)की आग अब दिल्ली से सटे बॉर्डर से निकलकर दूसरे राज्यों में भी प्रभाव जमाने लगी है. किसान महापंचायत (Kisan Mahapanchayat) में होने वाले ऐलान कृषि कानून पर न सिर्फ केन्द्र सरकार की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं बल्कि स्थानीय स्तर पर नेताओं के लिए नई संभावनाएं भी पैदा कर रहे हैं. राजस्थान की दौसा महापंचायत में सचिन पायलट (Sachin Pilot) और उनके गुट के विधायकों की मौजूदगी को भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मुकाबले बड़ी सियासी लकीर खींचने के दांव के रूप में देखा जा रहा है.

दौसा में किसान महापंचायत का आयोजन किया गया. इस पंचायत में किसान नेताओं में साथ कांग्रेस के नेता भी मौजूद रहे. मंच पर सचिन पायलट के साथ उनके गुट के आधा दर्जन विधायक मौजूद थे. महापंचायत में सचिन पायलट ने तीनों कृषि कानून को लेकर केंद्र पर जमकर निशाना साधा. किसान के मुद्दे पर राजनीतिक पार्टियां इसके जरिए केंद्र सरकार को घेर रही हैं. राजस्थान में सचिन पायलट भी किसान आंदोलन के जरिए केन्द्र पर हमलावर हो रहे हैं. इस मुद्दे पर वह गहलोत से अलग रहकर किसानों के बीच पहुंच रहे हैं. उन्होंने दौसा में महापंचायत में शामिल होकर केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानून को तो निशाना बनाते हुए अपनी सियासी ताकत का अहसास कराने की काशिश की है.

दौसा में है सचिन की खास पकड़

दौसा गुर्जर मीणा बाहुल्य जिला है. सचिन पायलट इस इलाके में काफी लोकप्रिय हैं. छह महीने पहले जब पायलट गुट ने बगावत की थी, तब भी इस इलाके अधिकतर गुर्जर-मीणा विधायक पायलट के साथ खड़े हो गए थे .
गहलोत सरकार से खफा दिख रहा है पायलट खेमा

पायलट खुद के और समर्थक विधायकों की सरकार में अनदेखी से खफा है, इसलिए किसान आंदोलन के बहाने यह रैली पायलट का शक्ति प्रदर्शन भी है. गहलोत और कांग्रेस नेतृत्व को दिखाने के लिए पायलट समर्थक विधायक भी खूब गरजे. कांग्रेस विधायक पीआर मीणा ने कहा कि अगर पायलट राजस्थान में कांग्रेस को सत्ता में ला सकते हैं तो पायलट को आगे किया गया तो वह केंद्र की सरकार को भी गिरा सकते हैं.

पूरे राजस्थान में रैलियों का रोडमैप



सचिन पायलट अब किसान आंदोलन के बहाने दौसा ही नहीं पूरे राजस्थान में ऐसी रैलियों की तैयारी कर रहे हैं. खासकर पूर्वी राजस्थान में जहां पायलट का दबदबा है. इन किसान रैलियों के बहाने पायलट अपनी सियासी हैसियत और ताकत दिखाना चाहते हैं. इससे पहले कांग्रेस अपने स्तर पर जयपुर में भी किसान रेली में इतनी भीड़ नहीं जुटा पाई. भीड़ जुटाने के मामले में सचिन पायलट गहलोत को टक्कर दे रहे हैं.
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