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पुण्‍यतिथि विशेष: इस तरह राजेश्‍वर प्रसाद सिंह बिधूड़ी बन गए राजेश पायलट, जानें अनसुनी दास्‍तान

सचिन पायलट प्रतिवर्ष अपने पिता की पुण्यतिथि के अवसर पर भंडाना पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.

Today 21st death anniversary of Rajesh Pilot: कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रहे राजेश पायलट की आज 21 वीं पुण्यतिथि है, लेकिन कोविड-19 के चलते दौसा जिले के भंडाना स्थित उनके स्मृति स्थल पर सर्व धर्म सभा का आयोजन नहीं किया जा रहा है.

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दौसा. पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सचिन पायलट (Sachin Pilot) के पिता राजेश पायलट (Rajesh Pilot) की गुरुवार को 21वीं पुण्यतिथि है. स्वर्गीय राजेश पायलट को श्रद्धांजलि देने के लिए कोविड-19 के चलते इस बार भी उनके स्मृति स्थल भंडाना में सर्व धर्म प्रार्थना सभा का आयोजन नहीं किया जा रहा है. इसके बावजूद पायलट समर्थकों के वहां पहुंचने के कयास लगाये जा रहे हैं.

राजेश पायलट का वास्तविक नाम राजेश्वर प्रसाद सिंह बिधूड़ी था. बताया जाता है कि पूर्वी राजस्थान में भरतपुर का चुनाव लड़ने से पहले जब वह ग्रामीण इलाकों के दौरे पर गये तो वहां यह चर्चा थी कि 'कोई पायलट आने वाला है'. बस उसके बाद उन्होंने अपना नाम राजेश पायलट कर लिया था. राजनीति में आने के बाद 1980 के दशक में गांधी परिवार के साथ राजेश पायलट की नजदीकियां बढ़ती गईं और उसके बाद वे राजीव गांधी सरकार में मंत्री बने.

राजेश पायलट का 11 जून 2000 को दौसा के भंडाना के समीप हुए सड़क हादसे में निधन हो गया था. तभी से प्रतिवर्ष 11 जून को भंडाना में श्रद्धांजलि सभा और सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाता है. कोविड-19 के चलते पिछले 2 वर्षों से सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन नहीं किया जा रहा है.

प्रतिवर्ष आते हैं सचिन पायलट
सचिन पायलट प्रतिवर्ष अपने पिता की पुण्यतिथि के अवसर पर यहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. गत वर्ष भी इस मौके पर किसी भी तरह के कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया गया था, लेकिन सचिन पायलट के आने पर उनके समर्थक नेता और कार्यकर्ता वहां पहुंचे थे. इस बार अभी तक सचिन पायलट का कोई अधिकृत कार्यक्रम सामने नहीं आया है. हालांकि, सर्वधर्म सभा का आयोजन नहीं हो रहा है, लेकिन माना जा रहा है कि 9 बजे के बाद पायलट समर्थकों का स्मृति स्थल पर आना शुरू होगा. यहां वे पुष्पांजलि अर्पित करेंगे.

राजीव गांधी के बेहद करीब थे राजेश पायलट
राजेश पायलट पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेहद करीब थे. कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शामिल रहे राजेश पायलट अपने करीबी लोगों के बीच अपने अतीत को याद करते हुए खुद को 'दूधवाला' बताया करते थे. वर्ष 1997 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए जब रेस हुई तो राजेश पायलट पूरे दमखम के साथ सीताराम केसरी के साथ भिड़ने को तैयार हुए थे. जबकि सीताराम केसरी का अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा था. राजेश पायलट की किसान वर्ग में जबर्दस्त पैठ थी.
Published by:Sandeep Rathore
First published: