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Dholpur: जहां आप किताबें पढ़ने जाते हैं, अंग्रेज़ यहां फिल्में देखते थे, क्या है इस इमारत का लाहौर कनेक्शन?

धौलपुर के कुछ ही बाशिंदों को पता होगा कि यहां का मशहूर लाइब्रेरी भवन असल में शहर का पहला सिनेमा हाॅल था. लेकिन यह पब्लि ...अधिक पढ़ें

दयाशंकर शर्मा

धौलपुर. चंबल के बीहड़ों के लिए जाने गए धौलपुर की एक इमारत को देखकर आपको हैरत हो सकती है. इसके भीतर प्राकृतिक रंगों से करवाई गई पुराने ज़माने की चित्रकारी दिखाई देती है. भवन के भीतर कई अलमारियों में किताबें रखी हैं और यहां विधिवत ढंग से लाइब्रेरी चलती है. भीतर एक बड़े स्टेजनुमा हिस्से के दोनों तरफ के पिलरों पर मां सरस्वती के चित्र भी प्राकृतिक रंग से बने हुए दिखते हैं. जैसे ही आप नज़र उठाते हैं, तो लाइब्रेरी के इन दोनों पिलरों के ठीक ऊपर नीली बीम पर लिखा दिखता है धौलपुर टॉकीज़! यहीं से आपकी जिज्ञासा जाग जाती है.

दरअसल घंटाघर, गौरव पथ पर स्थित सिटी जुबली हॉल के नाम से यह लाइब्रेरी भवन अंग्रेज़ों के ज़माने में एक सिनेमा हाॅल था. इस हॉल के खुलने के पीछे एक दिलचस्प कहानी बताई जाती है. जानकारों के मुताबिक धौलपुर के महाराज उदयभान सिंह की दोस्ती लाहौर के रईस सेठ सर गंगाराम के साथ थी. इतिहास के जानकार बताते हैं कि गंगाराम ने लाहौर में रेल लाइनें बिछवाई थीं और वहां भी जहां-जहां उनके बच्चे पढ़ने जाते थे. इन्हीं गंगाराम की बदौलत धौलपुर को सिनेमा हाॅल की सौगात मिली थी.

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कितना खास था यह सिनेमा हाॅल?

धौलपुर रियासत के इस पहले सिनेमा हॉल में मूक फिल्में चलती थीं, जो भारत में सिनेमा का शुरूआती दौर था. हैदराबाद और रामपुर के नवाबों के साथ दोस्ती रखने वाले धौलपुर के उदयभान के शौक और मांग के चलते सर गंगाराम ने यहां सिनेमा हाॅल बनवाया था. इस टाॅकीज़ में सभी को एंट्री नहीं मिलती थी. यह सिर्फ कुछ खास लोगों के लिए ही थी. यहां बालकनी भी बनी हुई है और उस समय की चित्रकारी भी अब तक यहां मौजूद है. रियासत कालीन बालकनी में अटैच लेट बाथ, फर्नीचर आदि सब सुविधाएं थीं.

इस इमारत के इतिहास के बारे में जानकारियां देते हुए रिटायर्ड शिक्षक गोविंद गुरु ने यह भी बताया कि धौलपुर टॉकीज में करीब 1950 तक फिल्मों का प्रदर्शन भी हुआ, लेकिन 1944 से ही इस टॉकीज़ को पुस्तकालय के रूप में विकसित किया जाने लगा था. अब यह धौलपुर और आसपास के क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय लाइब्रेरी है और पुराने लोग जानते हैं कि यहां कभी टाॅकीज़ थी. ये लोग अब भी इसे टाॅकीज़ लाइब्रेरी के रूप में ही जानते हैं.

Tags: Cinema Hall, Dholpur news

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