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धौलपुर में आंख, नाक और मुंह वाली अनोखी तोप, कभी दुश्मनों को हराती थी अब बच्चों को लुभाती है

Hanuhankar Cannon: धौलपुर के एकीकृत पार्क में रखी इस जालीदार तोप का नाम हनुहंकार है. यह तोप अपने आप में विलक्षण रही है. ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

अष्टधातु से बनी तोप का वजन लगभग 560 क्विंटल है. इससे लगभग 14 किलो का गोला दागा जाता था.
19 फीट लंबी इस तोप की रेंज लगभग 6.5 किलोमिटर थी. अब इसे प्रशासनिक संरक्षण की जरूरत है.

रिपोर्ट : दयाशंकर शर्मा

धौलपुर. धौलपुर शहर में रियासत काल की कई तोपें हैं. इनमें से हम आपको एक ऐसी तोप के बारे में बताने जा रहे हैं, जिस पर पूरा एक चेहरा बना हुआ है. इस तोप से 14 शेर के गोले दागे जा सकते थे. तोप का निर्माण धौलपुर के महाराज ने अपने कुशल कारीगरों से करवाया था.

इस जालीदार तोप का नाम हनुहंकार है. यह तोप अपने आप में विलक्षण रही है. हनुहंकार तोप का निर्माण धौलपुर के महाराजा कीरत सिंह ने करवाया था. यह तोप कुशल कारीगर सीताराम के कार्य कौशल और उद्यमिता की पहचान है. सीताराम ने 6 महीने के कठोर परिश्रम से इस तोप को तैयार किया था. अष्टधातु से बनी इस तोप का वजन 14 सौ मन 14 सेर और 14 छटांक (लगभग 560 क्विंटल) है. इससे 14 सेर (1 सेर में 933 ग्राम) का गोला दागा जा सकता था. इस गोले की मार 4 मील (6.44 किलोमीटर) तक होती थी. हनुहंकार तोप की लंबाई 19 फीट और परिधि 10 फीट है. इसका व्यास 3.5 फीट है. सिंह मुखाकृति में बनी तोप की आंख, कान, नाक और मुंह स्पष्ट दिखाई देते हैं.

यह तोप आजकल धौलपुर शहर के एकीकृत पार्क में रखी हुई है. इसे मिलिट्री स्कूल के जवानों ने पुरानी छावनी से लाकर यहां रखी है. पार्क में खेलने आए बच्चे इस पर चढ़कर आनंद लेते हैं. यह तोप कभी दुश्मनों को अपने गोले से हराने का काम करती थी और आज बच्चों को लुभाने का काम करती है.

पार्क में घूमने आए रमेश ने कहा कि यह तोप आजकल जर्जर अवस्था में है. दरअसल यह अष्टधातु की बनी है. कुछ असामाजिक तत्त्व अक्सर इसे काटकर अष्टधातु चुराते हैं. नतीजतन इस तोप की स्थिति दिनों दिन खराब होती जा रही है. इस ऐतिहासिक तोप को प्रशासनिक संरक्षण की जरूरत है.

Tags: Dholpur news, Rajasthan news

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