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धौलपुर में है भारत का सबसे ऊंचा घंटाघर, 8 मील दूर तक सुनाई देती थी घंटे की आवाज

धौलपुर रियासत के समय गौरव स्तंभ निहाल टॉवर (घंटाघर) शहर के दिनचर्या को व्यवस्थित रखता था. प्रति घंटे बजने वाली इसकी ध्व ...अधिक पढ़ें

    दयाशंकर शर्मा

    धौलपुर. राजस्थान के धौलपुर जिला मुख्यालय पर बने पथ का गौरव या यूं कहें धौलपुर रियासत को गौरव स्तंभ निहाल टॉवर (घंटाघर) है. रियासत के समय यह घंटाघर धौलपुर शहर के दिनचर्या को व्यवस्थित रखता था. प्रति घंटे बजने वाली इसकी ध्वनि आठ मील दूर तक गूंजती थी. काफी समय बाद इसकी घड़ी बंद हो गई और अब यह इमारत स्तंभ सा मूक होकर रह गया है.

    इतिहासकार अरविंद शर्मा का कहना है कि लाल और सफेद पत्थरों से बना यह टाइम टावर धौलपुर के महाराजा निहाल सिंह के समय बनना शुरू हुआ था, इसलिए इसको निहाल टावर कहा जाता है. इसकी जालियों पर एनटी यानी निहाल टावर लिखा हुआ है. टावर स्थापत्य कला का एक अद्भुत नमूना है. यह टावर शहर के मध्य पुराने नगर पालिका कार्यालय के पास स्थित है. इसका निर्माण कार्य वर्ष 1880 में राजा निहाल सिंह के समय में शुरू होकर सन 1910 में महाराजा राजाराम सिंह के समय में पूरा हुआ था. टाउन हॉल रोड पर बना यह घंटाघर 150 फुट ऊंचा है और 120 फुट के क्षेत्र में फैला हुआ है. इसमें 12 समान आकार के द्वार हैं. आठ मंजिला इस टावर में आठवीं मंजिल पर मात्र छतरी है. यह जमीन से लगभग 100 फुट ऊंचा है. इसकी छठी मंजिल पर चारों दिशाओं में समय दर्शाती चार घड़ियां हैं, जो ठीक समय बताती थी.

    धौलपुर में लाल पत्थर से निर्मित यह घंटाघर विशेष ऊंचाई पर स्थित होने के कारण देश भर में अनोखा है. इसके घंटे का आकार साढ़े तीन फुट तथा परिधि 11 फुट है. संपूर्ण घंटे का वजन 600 किलोग्राम है. घंटे के पेंडुलम का वजन 100 किलोग्राम है और हथोड़ा पांच किलोग्राम वजनी है. इस घंटा और घड़ी का निर्माण इंग्लैंड की मैसर्स जिलेट जॉनसन क्रोपडॉन नाम की कंपनी ने किया था.

    यहां के एक स्थानीय निवासी ने बताया कि इस घंटे की आवाज से सुबह-सवेरे लोग जागते थे. वो अपने पशुओं को जंगल में चराने के लिए इसी घंटे की आवाज सुन कर ले जाते थे, और शाम होने पर इसी घंटे की आवाज सुनकर अपने पशुओं को वापस लेकर आते थे. कुल मिलाकर कहा जाए तो इस घंटे की आवाज से ही शहर सहित नजदीक बसे गांवों की दिनचर्या चलती थी.

    आज घंटाघर की घड़ी बंद होने के साथ इसका आस्तित्व भी खतरे में है. इस इमारत से किसी भी वाहन की दुर्घटना ना हो, इसके लिए एक सर्कल में रखने की जरूरत दिखाई दे रही है. धौलपुर के गौरव की अनूठी गाथा इस घंटाघर को आज संरक्षण व सुरक्षा की दरकार है.

    Tags: Dholpur news, Rajasthan news in hindi

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