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Dholpur: पाताल तोड़ 7 मंजिला बावड़ी में 4 मंजिल पानी की सतह में नीचे, 3 हैं ऊपर, जाने खासियत

वास्तुकला की दृष्टि से इस बावड़ी का मूल्यांकन किया जाए तो इसकी कारीगरी केवल राजस्थान में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में अद् ...अधिक पढ़ें

    दयाशंकर शर्मा

    धौलपुर. राजस्थान के धौलपुर शहर के बीचों-बीच स्थित पुरानी सब्जी मंडी के पास एक पतली गली से होकर लंबी बावड़ी तक जाने का रास्ता है. वास्तुकला की दृष्टि से इस बावड़ी का मूल्यांकन किया जाए तो इसकी कारीगरी केवल राजस्थान में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में अद्वितीय है. यह एक पाताल तोड़ बावरी है. इसके अंदरूनी स्रोत वेग को काम में लाने के लिए लंबा चौड़ा कुआं बना हुआ है. सात मंजिला इस बावड़ी के सभी मंजिल की बनावट एक जैसी है. इसकी चार मंजिल पानी की सतह में नीचे हैं, जबकि तीन ऊपर हैं.

    इस बावड़ी के दोनों ओर दालान बने हैं जिनमें चार-चार दरवाजे हैं. बावड़ी का घेरा लगभग 135 मीटर और गोलाई में 16 सुंदर दरवाजे बने हुए है. बावड़ी से सटा हुआ एक कुआं है जिसकी अनुपम चुनाई देख कर सहज ही आश्चर्य होने लगता है. एक पत्थर से दूसरे पत्थर के बीच सूत भर भी गुंजाइश नहीं है.

    आज यदि इन बावड़ियों का उचित रख-रखाव और संरक्षण हो तो यह धौलपुर शहर की प्यास बुझा सकती है. साथ ही पर्यटन के क्षेत्र में भी बढ़ावा दिला सकती है. पुरामहत्व का बेजोड़ नमूना और पानी का मुख्य स्रोत रही ऐतिहासिक बावड़ियां आज के दौर में लगभग बिसरा रह गई हैं. पानी का अभाव कहें या रख-रखाव की कमी, यह अपना वैभव खोती जा रही हैं.

    यह बावड़ियां अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए संघर्ष करती दिखाई दे रही हैं. किसी जमाने में पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रही यह बावड़ियां आज अपनी सार-संभाल की बाट जोह रही हैं. ये बावड़ी कलात्मकता, बनावट, सीढ़ियां, झरोखों का निर्माण बिना संसाधनों के अपने आप में प्राचीन तकनीक का नमूना पेश करती हैं. बावड़ियों में पानी पहुंचने के मार्ग बंद हो गए हैं. वहीं, किसी में पानी है भी तो वो उपयोग के लायक नहीं है. आज इस बावड़ी से एकीकृत पार्क के लिए पानी की सप्लाई की जा रही है. लोगों ने बावड़ियों को कचरागाह बनाकर छोड़ दिया है.

    Tags: Dholpur news, Rajasthan news in hindi, Water Resources

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