होम /न्यूज /राजस्थान /'राइट टू हेल्थ' के विरोध में डाॅक्टर, राजस्थान विधानसभा में बिल अटका, सिलेक्ट कमेटी को भेजा गया

'राइट टू हेल्थ' के विरोध में डाॅक्टर, राजस्थान विधानसभा में बिल अटका, सिलेक्ट कमेटी को भेजा गया

राजस्थान विधानसभा में ‘RIGHT TO HEALTH’ बिल फिलहाल अटक गया है. इसे सिलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

राजस्थान विधानसभा में ‘RIGHT TO HEALTH’ बिल फिलहाल अटक गया है. इसे सिलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जब यह बिल पास हो जाएगा तो राजस्थान अपने प्रदेश के 8 करोड़ से ज्यादा लोगों को स्वास्थ्य का अधिकार देने वाला देश का पहला ...अधिक पढ़ें

  • News18India
  • Last Updated :

हाइलाइट्स

'राइट टू हेल्थ बिल' को अशोक गहलोत सरकार बता रही सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा का राजस्थान माॅडल
बिल पास होने पर राजस्थान 8 करोड़ आबादी को स्वास्थ्य का अधिकार देने वाला पहला राज्य बन जाएगा
बिल में प्रावधान है कि निजी अस्पतालों को आपात स्थिति में बिना पैसा जमा कराए ही इलाज करना होगा

जयपुर: राजस्थान विधानसभा में अशोक गहलोत सरकार की ओर से लाया गया ‘राइट टू हेल्थ बिल’ (Right to Health Bill) फिलहाल अटक गया है. यह नागरिकों को स्वास्थ्य का अधिकार देने वाला देश में अपनी तरह का पहला विधेयक है. विधानसभा में बहस के बाद इसे सिलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया है. बिल के प्रावधानों को लेकर सत्ताधार पार्टी और विपक्ष के कई विधायकों ने आपत्ति जताई थी. डाॅक्टर भी इस बिल का विरोध कर रहे हैं. बिल में प्रावधान है कि निजी अस्पतालों को आपात स्थिति में बिना पैसा जमा कराए ही मरीजों का जरूरी इलाज करना होगा. मरीज या उसके परिजनों को पहले पैसा जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा.

डाॅक्टरों का कहना है कि ऐसे प्रतिबंध से क्वालिटी ट्रीटमेंट प्रभावित होगा. अब बजट सत्र में इस विधेयक को विधानसभा में दोबारा पेश किया जा सकता है. जब यह बिल पास हो जाएगा तो राजस्थान अपने प्रदेश के 8 करोड़ से ज्यादा लोगों को स्वास्थ्य का अधिकार देने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा. सरकार ने इसे पब्लिक हेल्थ का राजस्थान मॉडल बताया है, जो एक सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक युग की शुरुआत करेगा. इस बिल की खास बात यह है कि राजस्थान के 8 करोड़ लोगों को फ्री में इलाज मिलेगा. कैसी भी इमरजेंसी हो यदि मरीज प्राइवेट हॉस्पिटल में भी जाता है तो, वहां भी उसका फ्री इलाज होगा. इसके साथ ही प्रदेश के हर व्यक्ति का इंश्योरेंस सरकार करवाएगी. इसके अलावा मरीज से लेकर डॉक्टर्स के लिए भी इस बिल में कई प्रावधान जोड़े गए हैं.

14.55 करोड़ रुपए सालाना बजट

इस योजना के क्रियान्वयन पर राज्य सरकार को हर साल 14 करोड़ 55 लाख रुपए की अनुमानित लागत खर्च करनी होगी. इसमें ह्यूमन रिसोर्सेज के लिए 14 करोड़ 50 लाख रुपए, स्टेट हेल्थ अथॉरिटी और डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अथॉरिटी मेंबर्स के भत्तों के लिए 5 लाख रुपए का प्रोविजन किया गया है. वक्त के साथ खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है. राइट टू हेल्थ में बायो.टेररिज्म बायो टेक्नोलॉजी, नेचुरल बायोलॉजिकल वेपन, बैक्टीरिया, वायरस, जहरीले तत्व, बायो प्रोडक्ट्स से होने वाले नुकसान भी कवर होंगे. केमिकल अटैक, नेचुरल हॉरर, परमाणु हमला या दुर्घटना, प्रभावित आबादी की बड़ी तादाद में मौत, जन हानि, प्रभावित आबादी पर लम्बे समय के लिए प्रभाव या गम्भीर रूप से अक्षम होने, वायरल या जहरीले तत्वों, गैसों का फैलना और उससे होने वाले जोखिम शामिल किए गए हैं. एपिडेमिक यानी महामारी के दौरान राइट टू हेल्थ प्रदेश के लोगों को इलाज का सुरक्षा कवच देगा.

राइट टू हेल्थ में लोगों को यह मिलेगा?

राइट टू हेल्थ में राजस्थान के हर व्यक्ति को बीमारी की जांच, इलाज, भावी रिजल्ट और संभावित जटिलताओं और अनुमानि खर्चों के बारे में अच्छी तरह जानकारी मिल सकेगी. एक्ट के तहत बनाए गए रूल्स के जरिए आउट डोर पेशेंट्स, इनडोर भर्ती पेशेंट्स, डॉक्टर को दिखाना और परामर्श, दवाइयां, डायग्नोसिस, इमरजेंसी ट्रांसपोर्टेशन यानी एम्बुलेंस सुविधा, प्रोसीजर और सर्विसेज, इमरजेंसी ट्रीटमेंट मिलेगा. मरीज को बीमारी की प्रकृति, कारण, वास्तविक जांच, इलाज के बारे में पूरी जानकारी मिल सकेगी. मरीजों को सभी पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूट्स की ओर से उनके मेडिकल केयर लेवल के अनुसार फ्री ट्रीटमेंट दिया जाएगा. फीस या चार्ज के एडवांस पेमेंट के बिना इमरजेंसी कंडीशन के दौरान बिना देरी किए प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर जरूरी इमरजेंसी ट्रीटमेंट फैसिलिटी और इंटेंसिव केयर, इमरजेंसी डिलेवरी और ट्रीटमेंट देंगे.

शिकायत निवारण सिस्टम डेवलप होगा

एक्ट शुरू होने की तारीख से 6 महीने के अंदर सरकार कम्प्लेंट रिड्रेसल सिस्टम क्रिएट करेगी. वेब पोर्टल, सहायता केंद्र शिकायतों को 24 घंटे के अंदर संबंधित अधिकारी या ऑब्जर्वर को भेजेगा. संबंधित अधिकारी अगले 24 घंटे के अंदर शिकायत करने वाले को जवाब देगा. अगर 24 घंटे में शिकायत का सॉल्यूशन अधिकारी नहीं करता है तो वह शिकायत डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अथॉरिटी को तुरंत फॉरवर्ड की जाएगी. डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अथॉरिटी शिकायत मिलने के 30 दिन में उचित कार्रवाई करेगी और उसकी रिपोर्ट वेब पोर्टल पर अपलोड करेगी. शिकायतकर्ता को भी सूचना दी जाएगी. शिकायतकर्ता को बुलाकर सॉल्यूशन की कोशिश भी की जाएगी. डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अथॉरिटी की ओर से 30 दिन में सॉल्यूशन नहीं होने पर शिकायत को स्टेट हेल्थ अथॉरिटी को फॉरवर्ड किया जाएगा.

स्टेट हेल्थ अथॉरिटी बनेगी

राजस्थान में स्टेट हेल्थ अथॉरिटी बनेगी, जिसमें जॉइंट सेक्रेटरी या उससे ऊपर रैंक का आईएएस अधिकारी अध्यक्ष होगा. हेल्थ डायरेक्टर मेंबर सेक्रेटरी होंगे. जबकि मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर, राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के जॉइंट सीईओ, आयुर्वेद डायरेक्टर, होम्योपैथी डायरेक्टरए यूनानी डायरेक्टर पदेन सदस्य होंगे. सरकार की ओर से नॉमिनेटेड दो लोग जिन्हें पब्लिक हेल्थ और हॉस्पिटल मैनेजमेंट की नॉलेज हो, वे मेंबर होंगे. पदेन सदस्य के अलावा सभी मेंबर्स की नियुक्ति 3 साल के लिए होगी. 6 महीने में कम से कम एक बार हेल्थ अथॉरिटी की बैठक होगी. साल में 2 बार बैठक करनी होगी.

हर जिले में डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अथॉरिटी बनेगी

राजस्थान के सभी जिलों में डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अथॉरिटी भी बनाई जाएगी. स्टेट हेल्थ अथॉरिटी बनने की तारीख से 1 महीने के अंदर डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अथॉरिटी की ऑटोनॉमस बॉडी बनाई जाएगी. इसमें जिला कलेक्टर पदेन अध्यक्ष होगा. जिला परिषद सीईओ पदेन सह अध्यक्ष होगा. डिप्टी सीएमएचओ पदेन सदस्य, जिला आयुर्वेद अधिकारी और पीएचईडी के एसई पदेन सदस्य होंगे. राज्य सरकार की ओर से नॉमिनेटेड दो मेंबर सदस्य होंगे. जिला परिषद का प्रमुख इसका सदस्य होगा. साथ ही पंचायत समितियों के 3 प्रधान सदस्य होंगे. पदेन मेंबर्स के अलावा सभी सदस्यों की नियुक्ति 3 महीने के लिए होगी. राजस्थान सरकार, स्टेट हेल्थ अथॉरिटी, डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अथॉरिटी के अध्यक्ष, सदस्य या अथॉरिटी की कमेटी के अधिकारियों, सदस्यों पर सद्भावना से की गई किसी भी बात के लिए कोई केस, अभियोजन या कानूनी कार्रवाई नहीं होगी.

Tags: Ashok Gehlot Government, Rajasthan Assembly, Rajasthan News Update

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें