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डूंगरपुर: जानें 12 बरस की कालीबाई भील की कहानी, जो शिक्षक की जान बचाने में हुई थी शहीद

Freedom Fighter: महारावल के आदेश के बाद रियासत की पुलिस डूंगरपुर स्कूल बंद कराने पहुंची तो प्रजामंडल कार्यकर्ता नानाभाई ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट : जुगल कलाल

    डूंगरपुर. देश की आजादी के आंदोलन के दौरान राजस्थान के सैकड़ों ​क्रांतिकारियों अपनी आहुतियां दी थीं. आजादी के इन ​दीवानों में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल थे, जिनका नाम इतिहास में ​अमिट रूप से दर्ज है. आजादी के इन्हीं दीवानों में डूंगरपुर जिले की 12 साल की लड़की कालीबाई भील का नाम भी स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है. आज भी वागड़ क्षेत्र स​हित पूरे राजस्थान में कालीबाई भील का नाम बहुत ही आदरपूर्वक लिया जाता है. प्रदेश में कालीबाई भील के नाम से कई योजनाएं चलाई जाती हैं, जिनमें मेधावी छात्राओं को स्कूटी प्रदान करने वाली योजना काफी खास है.

    डूंगरपुर जिले के गांव रास्तापाल की कालीबाई यहीं के एक स्कूल में पढ़ती थी, जिसका संचालन प्रजामंडल की ओर से किया जाता था. यहां बच्चों में आजादी के बीज बोए जाते थे. यह स्कूल डूंगरपुर के तत्कालीन महारावल के आंख की किरकरी बना हुआ था. इसे बंद कराने के लिए उस समय महारावल ने फरमान जारी किया. लेकिन, प्रजामंडल ने महारावल के फरमान को मानने से इनकार कर दिया.

    पुलिस के ​भिड़ गई कालीबाई

    महारावल के आदेश के बाद जब रियासत की पुलिस स्कूल बंद कराने पहुंची तो प्रजामंडल कार्यकर्ता नानाभाई खांट ने विरोध किया. इसके बाद सिपाहियों ने नानाभाई खांट की पिटाई की, जिससे उनकी मौत हो गई. इसके बाद पुलिसवाले स्कूल के शिक्षक सेंगाभाई को ट्रक से बांधकर घसीटकर ले जाने लगे. भीड़ यह दृश्य देख रही थी तब ही कालीबाई ने दांतली से सेंगाभाई की रस्सी काट दी और पुलिस ने कालीबाई पर गोलियां चला दीं. यह घटना 18 जून 1947 की थी. गोली लगने से घायल हुई कालीबाई ने 20 जून 1947 को दम तोड़ दिया. रास्तापाल में कालीबाई स्मृति में एक स्मारक भी बना हुआ हैं. वहीं डूंगरपुर में गेप सागर के किनारे एक पार्क में कालीबाई की आदमकद प्रतिमा लगी हुई है.

    कालीबाई से हुआ ग्रामीणों में साहस का संचार

    गोली लगने से घायल हुई कालीबाई ने ग्रामीणों से कहा डरो मत, लड़ो. इतना सुनते ही ग्रामीण साहस से भर उठे और सैनिकों पर हमलावर हो गए. ग्रामीणों से घिरे सैनिकों को वहां से भागना पड़ा और कालीबाई का वह स्कूल कभी बंद नहीं हुआ, इस स्कूल का संचालन वर्तमान में भी हो रहा है. देश की आजादी के बाद कालीबाई को शहीद का दर्जा दिया गया.

    कालीबाई पैनोरमा

    कालीबाई के बलिदान की जानकारी पर्यटकों को मिले, इसके लिए डूंगरपुर मड़वा गांव में कालीबाई पैनोरमा भी बनाया गया है. इस पैनोरमा में कालीबाई के बलिदान की कहानी को कलाकृतियों के माध्यम से दर्शाया गया है. डूंगरपुर कालीबाई के नाम से सरकारी कॉलेज व स्कूलों का भी संचालन होता है.

    Tags: Dungarpur news, Freedom fighters, Rajasthan news

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