Lockdown: घर जाने के लिए 6 दिन तक 196 किमी पैदल चलती रही 9 माह की गर्भवती महिला
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Lockdown: घर जाने के लिए 6 दिन तक 196 किमी पैदल चलती रही 9 माह की गर्भवती महिला
यह परिवार गर्भवती महिला के साथ अहमदाबाद से पैदल ही चलकर रतनपुर बॉर्डर से डूंगरपुर होते हुए टामटिया चेक पोस्ट पर पहुंचा.

गुजरात के अहमदाबाद (Ahmedabad) में मजदूरी कर पेट पालने वाला मध्य प्रदेश का एक परिवार Lockdown में अपने घर जाने के लिए गर्भवती महिला (Pregnant woman) के साथ 6 दिन तक पैदल चलता रहा.

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डूंगरपुर. गुजरात के अहमदाबाद (Ahmedabad) में मजदूरी कर पेट पालने वाला मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का एक गरीब परिवार लॉकडाउन (Lockdown) में अपने घर जाने के लिए गर्भवती महिला (Pregnant woman) के साथ 6 दिन तक पैदल चलता रहा. इस परिवार में 9 माह की गर्भवती महिला उसका पति और दो मासूम बच्चे शामिल हैं. अहमदाबाद से करीब 196 किमी का लंबा सफर तय करने के बाद दो दिन पहले यह परिवार राजस्थान के डूंगरपुर जिले में टामटिया चेक पोस्ट पर पहुंचा. चेक पोस्ट पर तैनात कोरोना वॉरियर्स और कर्मचारियों ने इस परिवार को न केवल भरपेट भोजन कराया, बल्कि एम्बुलेंस की व्यवस्था करके उन्हें उनके घर पहुंचाकर बड़ी राहत दी है.

पूरे रास्ते में नहीं मिला भोजन
जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश के रतलाम जिले की तहसील सैलाना के गांव कूपड़ा का लक्ष्मण भाभर अपनी 9 माह की गर्भवती पत्नी बापूडी, 2 वर्ष की पुत्री और 1 वर्ष के पुत्र के साथ अहमदाबाद से 6 दिन पहले घर के लिए रवाना हुआ था. यह परिवार गर्भवती महिला के साथ अहमदाबाद से पैदल ही चलकर रतनपुर बॉर्डर से डूंगरपुर होते हुए टामटिया चेक पोस्ट पर पहुंचा. इस परिवार ने बताया कि बीच रास्ते मे उन्हें कहीं भी भरपेट भोजन नहीं मिला. हल्का- फुल्का नाश्ता खाकर और पानी पी कर चलते रहे.

रास्ते में कभी भी प्रसव पीड़ा हो सकती थी
टामटिया चेक पोस्ट पहुंचने पर यहां तैनात टीम ने उनका रजिस्ट्रेशन कर गर्भवती महिला की प्राथमिक जांच एवं स्क्रीनिंग करवाई. यहां डॉ. सचिन जैन, डॉ. सुभाष भट्ट और डॉ. राजीव यादव ने बताया कि ऐसी अवस्था में ज्यादा पैदल चलने से महिला को कभी भी प्रसव पीड़ा हो सकती थी. सूचना मिलने पर अधिकारियों ने रात को ही पूरे मामले की रिपोर्ट लेकर ई-पास के लिए रजिस्ट्रेशन किया. जिला प्रशासन ने आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल पास जारी किया. गर्भवती महिला और उसके परिजनों को सैलाना भेजने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था की. इस परिवार के पास ना तो मोबाइल था और ना ही वाहन किराया. लेकिन अब उसे उसके मूल निवास स्थान कुपड़ा पहुंचा दिया गया है.



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