Lockdown: राजस्थान-गुजरात बॉर्डर रतनपुर में कामगारों का जमावड़ा, स्क्रीनिंग के बाद दी जा रही एंट्री
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Lockdown: राजस्थान-गुजरात बॉर्डर रतनपुर में कामगारों का जमावड़ा, स्क्रीनिंग के बाद दी जा रही एंट्री
कई मजदूर परिवार पास के अभाव में रतनपुर स्थित राजस्थान-गुजरात बॉर्डर पर फंसे हुए हैं.

लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी राजस्थानियों और मजदूरों की घर वापसी के फैसले के बाद से डूंगरपुर जिले में स्थित रतनपुर बोर्डर (Ratanpur Border) से गुजरात से प्रवासियों की घर वापसी हो रही है.

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डूंगरपुर. लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी राजस्थानियों और मजदूरों की घर वापसी के फैसले के बाद से डूंगरपुर जिले स्थित रतनपुर बॉर्डर (Ratanpur Border) से गुजरात से प्रवासियों की घर वापसी हो रही है. केंद्र सरकार के नए निर्देशों के बाद से गुरुवार रात से ही रतनपुर बॉर्डर पर बड़ी संख्या में श्रमिकों और प्रवासियों का पहुंचना शुरू हो गया है. रात 12 बजे से सुबह सात बजे तक डूंगरपुर के रतनपुर बॉर्डर पर पहुंचे 970 लोगों की स्वास्थ्य विभाग की अलग-अलग टीम ने स्क्रीनिंग की. बाद में उन्हें रोडवेज की बसों से उनके जिलों के लिए रवाना किया गया.

3 दिन में अब तक रतनपुर बोर्डर से 3,205 लोगों की घर वापसी हुई
गुजरात से श्रमिकों (मजदूरों) के आने का क्रम लगातार बना हुआ है. उनकी स्वास्थ्य जांच के लिए बॉर्डर पर 25 काउंटर लगाए गए हैं. यहां पर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ स्क्रीनिंग के काम में जुटा है. लेकिन ऑनलाइन पास की पेचीदगी अभी भी अनपढ़ और गरीब मजदूरों के लिए समस्या बनी हुई है. बिना पास के अपने घरों से निकले मजदूरों को बॉर्डर पर एंट्री नहीं मिल रही है. ऐसे में कई मजदूर परिवार रतनपुर स्थित राजस्थान-गुजरात बॉर्डर पर फंसे हुए हैं. इन लोगों में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के मजदूरों की संख्या अधिक है. पिछले तीन दिनों में अब तक रतनपुर बॉर्डर से 3,205 लोगों की घर वापसी हुई है.

बॉर्डर पर परेशान हो रहे हैं मजदूर
राजस्थान-गुजरात पर रतनपुर बॉर्डर तक पहुंचे कई मजूदरों ने अपनी व्यथा बताई. भीलवाड़ा जिले के रायपुर तहसील के रहने वाले एक मजदूर परिवार के लक्ष्मण ने बताया कि वो गुजरात में मजदूरी कर के अपना पेट पालते हैं. लॉकडाउन के कारण एक महीने तक तो गुजरात में अटके रहे. इस दौरान गुजरात सरकार और प्रशासन की ओर से केवल एक ही दिन खाना दिया गया. इसके बाद न तो कोई खैर-खबर पूछने आया और न ही मदद करने. जैसे-तैसे कर के एक महीना गुजारा.




बिना पास नहीं कर पा रहे एंट्री
अब जब बॉर्डर खुलने की जैसे ही जानकारी मिली तो सभी कामगार अपने घरों के लिए निकल गए. दो दिन तक घूमते-फिरते गुजरात से रतनपुर बॉर्डर तक पंहुचे. लेकिन रतनपुर बॉर्डर से उन्हीं लोगों को दाखिल होने दिया जा रहा है जिनके पास एंट्री पास है. निरक्षर मजदूर वर्ग के पास न तो पास है और न ही पास बनवाने के लिए मोबाइल. ऐसे में उनके सामने बड़ी समस्या है कि वो किसके पास गुहार करें.

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