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Sindoor Khela: जयपुर में दिखी बंगाली परंपरा, महिलाओं ने धूमधाम से मनाई 'सिंदूर खेला' की रस्म

जयपुर में हुआ सिंदूर खेला का आयोजन.

जयपुर में हुआ सिंदूर खेला का आयोजन.

नवरात्रि के दौरान पश्चिम बंगाल में निभाई जाने वाली 'सिंदूर खेला' की रस्‍म को राजस्‍थान के जयपुर में भी धूमधाम से निभाय ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट-लोकेश कुमार ओला
    जयपुर. नवरात्रि में पश्चिम बंगाल में निभाई जाने वाली परंपरा राजस्‍थान के जयपुर में भी देखने को मिली. दरअसल बंगाल में मां दुर्गा की आराधना के बाद सिंदूर खेला की रस्म निभाई जाती है. जबकि जयपुर में बंगाली परंपरा ‘सिंदूर खेला’ की रस्म उत्साह और उमंग के साथ निभाई गई. महिलाओं ने पहले मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित किया और फिर एक दूसरे को सिंदूर लगाकर ‘सिंदूर खेला’ की रस्म निभाई. इस रस्म में ना केवल विवाहित महिलाएं बल्कि अविवाहित युवतियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं ने आपसी प्रेम व सौहार्द का संदेश दिया.

    शक्ति महिला संगठन द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया गया. संगठन की सदस्य सुष्मिता दास ने बताया कि हर वर्ष सिंदूर खेला’ की परंपरा बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है. कोरोना संक्रमण के चलते बीते 2 वर्ष तक सामूहिक कार्यक्रम नहीं हुए. घर पर ही रस्म अदायगी की गई. इस समारोह में सबसे पहले मां दुर्गा की विधिवत पूजा का आयोजन किया गया. इसके बाद महिलाओं ने एक-एक कर मां दुर्गा की मूर्ति के मस्तक और पैरों में सिंदूर अर्पित किया.

    महिलाओं ने एक दूसरे को लगाया सिंदूर
    शक्ति महिला संगठन की संस्थापक सोनाक्षी वशिष्ठ ने बताया कि महिलाओं द्वारा एकता और संगठन के साथ आगे बढ़ने के अलावा आपस में सद्भावना बनाए रखने के लिए यह पर्व मनाया जाता है. समारोह में माता की पूजा के बाद में महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और मिठाई खिलाई. इस दौरान महिलाओं ने नृत्य भी प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि सिंदूर खेला का यह आयोजन संगठन द्वारा लगातार चौथे वर्ष किया गया है. यह स्थानीय लोगों के लिए नई संस्कृतियों के बारे में जानने और उसको सेलिब्रेट करने की एक पहल है. उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहीं हमारे सगंठन की सदस्य शामिल हुईं हैं. सभी महिलाएं फिर चाहे वे विवाहित हो या अविवाहित ने साथ मिलकर खुशी और उत्साह के साथ ‘सिंदूर खेला’ की रस्म निभाई. उत्सव में जोधपुर और अजमेर जैसे विभिन्न शहरों से भी महिलाओं ने भाग लिया.

    सिंदूर खेला रस्म का महत्व
    सोनाक्षी वशिष्ट ने बताया कि बंगाली पंरपरा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि देवी दुर्गा अपने चार बच्चों के साथ दुर्गा पूजा उत्सव मनाने के लिए धरती पर आती हैं. त्योहार के अंतिम दिन उदासी का माहौल छा जाता है, जब देवी दुर्गा को विदा किया जाता है. ऐसा मानना है कि देवी दुर्गा के आंसू बहे थे, इसलिए उनके गालों को पान के पत्तों से पोंछा जाता है. इसके बाद उनकी मांग में और पारंपरिक चूड़ियों पर सिंदूर अर्पित करते हैं. इसके बाद महिलाएं सुखी जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए दुर्गा मां के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेती हैं. इसके बाद सभी महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मिठाई खिलाती हैं.

    Tags: Durga Pooja, Jaipur news

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