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fifteen year old deaf girl from rajasthan won the gold medal in deaflympics 2022 leaders congratulated her nodps

राजस्थान की 15 साल की मूकबधिर बालिका ने किया कमाल, ओलंपिक में स्वर्ण जीत रचा इतिहास

राजस्थान की रहने वाली मूकबधिर बालिका गौरांशी शर्मा ने ब्राज़ील में आयोजित डेफ ओलंपिक 2022 में बैंडमिंटन टीम इवेंट में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश को गौरान्वित किया है.

राजस्थान की रहने वाली मूकबधिर बालिका गौरांशी शर्मा ने ब्राज़ील में आयोजित डेफ ओलंपिक 2022 में बैंडमिंटन टीम इवेंट में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश को गौरान्वित किया है.

राजस्थान की 15 साल की मूकबाधिर बालिका ने ब्राजील में चल रहे डेफ ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगे की शान बढ़ाई है. राजस्थान की गौरांशी ने बैडमिंटन प्रतियोगिता में सोने पर कब्जा जमाया है. गौरांशी की इस उपलब्धि पर सभी ने खुशी जताई है. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया समेत कई दिग्गज नेताओं ने गौरांशी को बधाई दी है. वहीं गौरांशी का भारत लौटने पर भव्य स्वागत भी किया जाएगा. इसकी तैयारी की जा रही है.

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कोटा. राजस्थान की रहने वाली मूकबधिर बालिका ने ब्राजील में हो रहे डेफ ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता है. कोटा की रहने वाली गौरांशी ने बैंडमिंटन में स्वर्ण जीतकर प्रदेश ही नहीं बल्कि दुनिया के पटल पर भारत का नाम भी रोशन किया है. मूक बधिर बेटी गौरांशी शर्मा ने ब्राजील में आयोजित डेफ ओलंपिक 2022 में बैडमिंटन में हिस्सा लिया था. इस खेल में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता है. बता दें कि बीते दिनों गौरांशी का डेफ ओलंपिक में जाने वाली भारतीय टीम में चयन हुआ था.

गौरांशी ने बैडमिंटन की टीम इवेंट प्रतियोगिता में जापान को शिकस्त देकर गोल्ड मेडल हासिल किया है. बता दें कि गौरांशी जन्म से डेफ हैं. गौरांशी ना ही बोल पाती हैं और ना ही सुन पाती हैं. अब गौरांशी की कामयाबी से प्रेरित होकर रामगंजमंडी के एक व्यवसायी ने 11 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की है. वहीं गौरांशी का भारत और रामगंजमंडी लौटने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है. जिला कलेक्टर व कमिश्नर के निर्देश पर अब रामगंजमंडी में गौरांशी की भव्य जुलूस,जश्न व स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं.

मुश्किलों भरा रहा सफर
रामगंजमंडी की 15 वर्षीय गौरांशी ने ब्राज़ील में आयोजित डेफ ओलंपिक 2022 में बैंडमिंटन टीम इवेंट में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश को गौरान्वित किया है. गौरांशी के लिए यह सफर इतना आसान नहीं था. गौरांशी जब 2 साल की थी तो गर्म दूध से झुलस गई थी. उस दौरान गौरांशी के बचने की उम्मीद कम थी. गौरांशी को आखिर इतना बड़ा सफर तय कर पूरे विश्व में देश के तिरंगे का मान बढ़ाना था. इसलिए उन्होंने 50% झुलसने के बाद भी मौत को मात दे दी थी.

गौरांशी बचपन मे ही सायना नेहवाल के चित्र को देख कर रुक जाती थी. माता पिता उसके बैडमिंटन में रुचि को देखते हुए उसे रामगंजमंडी से भोपाल ले गए जहां स्टेडियम में गोरांशी ने बैडमिंटन पर हाथ आजमाने शुरू कर दिया था. गौरांशी ने ग्वालियर के स्टेट अकादमी में प्रवेश लेकर अपनी प्रतिभा को निखारा. गोरांशी के माता पिता इस दौरान दिन भर मैदान में रहकर गोरांशी का हौसला बढ़ाते रहते हैं.

सीएम समेत दिग्गज नेताओं ने दी बधाई
बता दें कि गौरांशी की इस उपलब्धि पर पूरा देश गौरान्वित है और रामगंज मंडी में जश्न का माहौल है. गौरांशी के स्वर्ण पदक जीतने पर एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला व पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने भी बधाई व शुभकामनाएं दी हैं. गौरांशी के स्वर्ण पदक जीतने पर उसका रामगंजमंडी पहुचने पर ऐतिहासिक सम्मान किया जाएगा.

इसके लिए पालिका सभागार में एसडीएम राजेश डागा की अध्यक्षता में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व गणमान्य नागरिकों की बैठक कर विचार विमर्श किया गया और रणनीति बनाई गई. पूरे विश्व में भारत का परचम फहराने वाली गौरांशी के आने का रामगंज मंडी में बेसब्री से इंतजार है. रामगंजमंडी के बजाय ट्रेनिंग और तालीम के चलते गौरांशी के माता-पिता भी अपनी बेटी के साथ एमपी के भोपाल में रहते हैं.

Tags: Kota news, Rajasthan news

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