Analysis: क्या राजस्थान में अब सीएम गहलोत और राज्यपाल कलराज के बीच है लड़ाई?
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Analysis: क्या राजस्थान में अब सीएम गहलोत और राज्यपाल कलराज के बीच है लड़ाई?
राजस्थान में सत्ता को लेकर सियासत जोरों पर है.

राजस्थान विधानसभा के मुख्य सचेतक महेश जोशी (Mahesh Joshi) ने न्यूज़18 से बात करते हुए कहा कि राज्यपाल (Governor) को संवैधानिक पद की गरिमा रखनी चाहिए. वो ऐसा कोई काम न करें जिससे इस पद के फैसले पर सवाल खड़े हो.

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  • Last Updated: July 25, 2020, 12:25 AM IST
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दिल्ली. राजस्थान (Rajasthan) में सरकार बचाने और गिराने की जद्दोजहद चल रही है. अब इस लड़ाई में एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट में कानूनी जंग लड़ी जा रही है, वहीं अब राज्यपाल vs मुख्यमंत्री होता जा रहा है. 15 दिन से राजस्थान में सियासी उठापटक में सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) तीन बार राज्यपाल से मिलकर विधानसभा सत्र बुलाने की अनुमति मांग चुके हैं, लेकिन राज्यपाल अनुमति नहीं दे रहे. इस पर  शुक्रवार कैबिनेट की बैठक कर फैसला लिया गया कि जल्द विधानसभा सत्र बुलाया जाए. इस बाबत शुक्रवार कांग्रेसी (Congress) विधायकों ने राजभवन परेड भी किया. कही न कही इसे कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन और दबाव की राजनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है. कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने साफ तौर पर राज्यपाल कलराज मिश्र पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्यपाल दबाव में ना रहे. अंतरात्मा की आवाज पर फैसला लें अन्यथा जनता राजभवन को घेरेगी तो हमारी जिम्मेदारी नहीं होगी.

वहीं जानकर इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक बता रहे हैं. राजस्थान विधानसभा के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने न्यूज़18 से बात करते हुए कहा कि राज्यपाल को संवैधानिक पद की गरिमा रखनी चाहिए. वो ऐसा कोई काम न करें जिससे इस पद के फैसले पर सवाल खड़े हो. राज्यपाल कैबिनेट के फैसले को नकार नहीं सकते. राजनीति के जानकार राजस्थान की इस पूरी पटकथा को दूसरे राज्यों जहां कांग्रेस की सरकार गयी है उससे जोड़कर देख रहे हैं.

वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखेड़े ने न्यूज़18 को इस पूरी घटना के अंदर की कहानी को सांझा किया, उनके तर्क कुछ इस तरह हैं. 



1. राजस्थान की मुख्य विपक्षी पार्टी गहलोत सरकार को अल्पमत की सरकार बता रही है. कांग्रेस सरकार बहुमत सिद्ध करने के लिए फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार है लेकिन राज्यपाल सत्र बुलाने पर फैसला नहीं कर रहे. क्या ये विरोधी पक्ष(सचिन पायलट खेमा) को खुले तौर पर खरीद-फरोख्त के लिए समय देने वाला फैसला नहीं है?
2. संविधान के मुताबिक राज्यपाल सिर्फ एक बार कैबिनेट के फैसले को पलट सकते हैं लेकिन अगली बार कैबिनेट विधानसभा सत्र का फैसला करती है तो उसे रोकने का अधिकार राज्यपाल को भी नहीं है.

3. देश में जब कोरोना ने दस्तक दिया था तब मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार खतरे में थी. उस समय कांग्रेस पार्टी ने कई बार कोरोना का हवाला दिया लेकिन बीजेपी की केंद्र सरकार ने एक बार भी इस पर विचार नहीं किया क्योंकि वहां कांग्रेस की सरकार जा रही थी और बीजेपी की सरकार आ रही थी. आज परिस्थिति बिल्कुल उल्टा है. आज कांग्रेस बहुमत सिद्ध करने के लिए विधानसभा सत्र बुलाने की बात कर रही है, लेकिन राज्यपाल स्वीकार नहीं कर रहें.

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4.आज जो स्थिति राजस्थान की है इसमें सबसे ज्यादा ठगा हुआ प्रदेश की जनता है. जिस सरकार को बहुमत दिया उसका ही उपमुख्यमंत्री इतना कमजोर निकला कि वो पार्टी और जनता दोनों को धोखा दे रहा है. वहीं इसमें कही न कही कांग्रेस की भी नाकामी है कि पार्टी को लड़ाई को समय रहते नही संभाल पाई की आज सरकार पर खतरा मंडरा रहा है.
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