पूर्व विधायक ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र, कहा- कोरोना काल में नियमित स्कूल खोलना खतरे से खाली नहीं

राजस्थान के एक विधायक ने नियमित स्कूल खोलने पर खतरा बताया है. (फाइळ फोटो)
राजस्थान के एक विधायक ने नियमित स्कूल खोलने पर खतरा बताया है. (फाइळ फोटो)

राजस्थान (Rajasthan) के पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत ने शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर कहा कि कोरोना काल (Corona Era) में स्कूलों (School) को नियमित खोलना खतरों से भरा है. इसलिए इस फैसले से सरकार को बचना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 28, 2020, 9:08 PM IST
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जयपुर. राजस्थान(Rajasthan) के पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत ने कहा कि केन्द्र सरकार(Central Government) ने कड़े दिशा-निर्देशों के साथ विद्यालयों (School) में 9 से 12 तक की नियमित कक्षायें लगाने की अनुमति दी है, लेकिन कोरोना महामारी (Corona Epidemic) के बढ़ते प्रकोप और निरंतर घातक होते स्वरूप को देखते हुए अभी कक्षाओं का संचालन जोखिम भरा हो सकता है. इसलिए प्रदेश के सरकारी विद्यालयों को दूरभाष अथवा कोरोना गाइडलाइन की पालना करते हुए 10वीं और 12वीं बोर्ड के विद्यार्थियों को मार्गदर्शन करना चाहिए.

सोमवार को कोटा जिले के सरकारी विद्यालयों की बोर्ड कक्षाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों के एक प्रतिनिधिमण्डल ने राजावत से मिलकर अपनी परेशानियों से उन्हें अवगत करवाया था. इसके बाद राजावत ने शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा को पत्र लिखा है. राजावत ने पत्र में लिखा है कि निजी विद्यालय लाॅकडाउन के समय से ही ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं, वहीं सरकारी विद्यालयों के पास संसाधनों का अभाव होने से उनके विद्यार्थी इससे वंचित हैं.

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उन्होंने कहा कि 10वीं और 12वीं बोर्ड के प्राप्तांक विद्यार्थियों के भावी कैरियर में कई जगह काम आएंगे. इसलिए सरकारी स्कूल विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन समस्या का समाधान करने की व्यवस्था करें. उन्होंने शिक्षा मंत्री से मांग की है कि सरकारी विद्यालयों में बोर्ड कक्षाओं के 5-5 विद्यार्थियों के समूह बनाकर उन्हें 1-1 घण्टे का समय दे दिया जाए. जब वो विद्यालय में आकर सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए विषय शिक्षकों से अपनी अध्ययन संबंधी समस्याओं का समाधान करवा सकें.
राजावत ने प्रतिनिधिमण्डल से कहा कि हालांकि निजी विद्यालयों को सरकारी विद्यालयों पर प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन फिर भी प्रदेश के 75 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षा देने का दायित्व इन्हीं सरकारी विद्यालयों पर है और देश के कई ख्यातनाम व्यक्तित्वों ने सरकारी स्कूलों में ही अध्ययन कर प्रादेशिक, राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया है. मेरिट लिस्ट में भी प्रतिवर्ष राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थी अपना लोहा मनवाते रहे हैं और लाॅकडाउन के चलते घर पर अध्ययन के साथ अगर इन्हें शिक्षकों का सहयोग मिल जाये तो वे बड़ा कमाल करके दिखायेंगे. राजावत को ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमण्डल में पूर्णिमा भारद्वाज, सीमा मीणा, प्रिया सुमन, दुर्गेश मालव, अनीता लोधा, दिव्या रावल, रविन्द्र भील, पप्पू तंवर, शिवम, अंतिमा मालव आदि प्रमुख थे.
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