प्रदेश में निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए अब इन नियमों का करना होगा पालन, दिशा-निर्देश जारी
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प्रदेश में निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए अब इन नियमों का करना होगा पालन, दिशा-निर्देश जारी
सीएम अशोक गहलोत का फाइल फोटो.

अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार ने राज्य में नये विश्वविद्यालयों (Universities) की स्थापना के लिए नये दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किये हैं. इन नियमों (Rules) का पालन करने के बाद ही राज्य में निजी विश्वविद्यालय खुल सकेंगे.

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  • Last Updated: September 8, 2020, 1:06 PM IST
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जयपुर. अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार ने प्रदेश में नए निजी विश्वविद्यालय (Private university) की स्थापना के लिए दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए हैं. दिशा-निर्देशों में बताया गया है कि पृथक अधिनियम के तहत निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के नियमों के तहत दिशा-निर्देश प्रदान किये गए हैं. अधिनियम में उल्लेखित शर्तों को पूरा करने के बाद समिति को निजी विश्वविद्यालय शुरू करने की अनुमति दी जाएगी. उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त शासन सचिव डॉ.

मोहम्मद नईम ने बताया कि नए विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए स्थाई निधि की स्थापना किया जाना आवश्यक होगा. इसके अलावा विश्वविद्यालय के लिए समीपस्थ स्थान पर न्यूनतम 30 एकड़ भूमि  होनी चाहिए. साथ ही प्रशासनिक और अकादमिक गतिविधियों के लिए न्यूनतम 10 हजार वर्ग मीटर पर इमारत का निर्माण कार्य किया जाना चाहिये. न्यूनतम 10 लाख रुपये अथवा विनियामक निकाय के मानकों के अनुरूप जो भी राशि हो उतनी कीमत की किताबों और जनरल आदि को खरीदना होगा. इसके अलावा इमारत के अतिरिक्त कम्प्यूटर, फर्नीचर और अन्य चल तथा अचल सम्पत्तियों पर न्यूनतम 20 लाख रुपये खर्च किये जाएंगे.

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समिति को अन्डरटेकिंग देनी होगी
नए विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए समिति को अन्डरटेकिंग देनी होगी कि पहले 3 साल में लाइब्रेरी की सुविधाएं समकालीन शिक्षा और रिसर्च के लिए पर्याप्त हों. यह सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम 50 लाख रुपये किताबों, जनरल, कम्प्यूटर, लाइब्रेरी नेटवकिंग तथा अन्य सुविधाओं के लिए खर्च किये जाएंगे. पहले पांच साल में इमारत के अलावा उपकरण, कम्प्यूटर, फर्नीचर, अन्य चल एवं अचल सम्पत्ति और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर न्यूनतम एक करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे. विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किये जाने वाले प्रत्येक विभाग में कम से कम एक प्रोफेसर, 2 रीडर्स, पर्याप्त संख्या में व्याख्याता और सहयोगी स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी.

यूजीसी और अन्य के निर्देशों का पालन करना होगा
संयुक्त सचिव ने बताया कि समिति को इन दिशा-निर्देशों के अतिरिक्त यूजीसी, एआईसीटीसी अथवा संबंधित किसी संवैधानिक संस्था द्वारा प्रदान किये गए अन्य निर्देशों का पालना करना होगा. उन्होंने बताया कि अधिनियम के तहत समिति द्वारा राज्य सरकार को अधिकतम एक वर्ष की समय सीमा में यह शपथ पत्र देना होगा कि पत्र में दी गई सभी शर्तों का पालन किया गया है.
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