कर्ज से परेशान पिता ने छोड़ दिया था शहर, 18 साल बाद बेटे ने चुकाए 55 लाख रुपए

ईमानदारी अभी जिंदा है. अगर सबूत देखना है तो हनुमानगढ़ के रावतसर कस्बे में चले आइए. यहां सुनिए ईमानदारी की कहानी. यहां एक युवक ने अपने पिता के 18 साल पुराने कर्ज के 55 लाख रुपए व्यापारियों को चुकाकर जो फर्ज अदा किया है वह बेमिसाल है.

Raju Ramgarhia | News18 Rajasthan
Updated: June 9, 2019, 3:26 PM IST
कर्ज से परेशान पिता ने छोड़ दिया था शहर, 18 साल बाद बेटे ने चुकाए 55 लाख रुपए
संदीप (कंधे पर शॉल डाले हुए)। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
Raju Ramgarhia | News18 Rajasthan
Updated: June 9, 2019, 3:26 PM IST
ईमानदारी अभी जिंदा है. अगर सबूत देखना है तो हनुमानगढ़ जिले के रावतसर कस्बे में चले आइए और यहां सुनिए ईमानदारी की कहानी. यहां एक युवक ने जिस तरह से अपने पिता के 18 साल पुराने कर्ज के 55 लाख रुपए व्यापारियों को चुकाकर जो फर्ज अदा किया है वह बेमिसाल है. इस युवक के पिता कर्ज से परेशान होकर 18 साल पहले कस्बा छोड़कर नेपाल चले गए थे.

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संदीप के पिता ने 2001 में छोड़ा था रावतसर
यह कहानी है रावतसर निवासी संदीप की. संदीप के पिता मीताराम की रावतसर में जमालिया ट्रेडिंग कंपनी थी. वर्ष 2001 में व्यापार में घाटा होने और देनदारियां बढ़ने के कारण मीताराम अचानक रात को रावतसर छोड़कर नेपाल चले गए. मीताराम ने वहां फिर नए सिरे से उठ खड़े होने का प्रयास किया और किराने की दुकान खोली. लेकिन कर्ज ना चुका पाने का गम उनके दिल में बार-बार टीस बनकर उभरता रहा. इस चिंता में 6 साल बाद मीताराम की मौत हो गई.

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संदीप ने पिता का कर्ज चुकाने की ठान ली थी
मीताराम ने जब रावतसर छोड़ा था उस समय संदीप की उम्र महज 12 वर्ष थी. लेकिन वह समझदार हो चुका था. उसे पिता के कर्ज चुकाने की चिंता लग गई. उसने भी वहां 12 साल की उम्र में ही मोबाइल की दुकान में काम करना शुरू कर दिया. संदीप के मन में पिता के कर्ज की चिंता गहरे तक बैठी हुई थी. उसने पिता के कर्ज को उतारने की ठान ली. इसी के चलते संदीप ने दिन रात मेहनत कर खुद का व्यवसाय कर अच्छे पैसे कमाए.
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5 जून को व्यापारियों को बुला बुलाकर लौटाया कर्ज
अच्छी स्थिति में आने के बाद हाल ही में चार दिन पहले 5 जून को संदीप अचानक रावतसर पहुंचा. उसने कस्बे के व्यापार मंडल अध्यक्ष से संपर्क साधा और पिता का कर्ज चुकाने की बात कही. संदीप ने व्यापार मंडल अध्यक्ष से साफ कहा कि जो भी व्यापारी उसके पिता से कर्ज मांगता है वो आए और अपना पैसा वापिस ले ले. व्यापारियों को एकाएक तो विश्वास नहीं हुआ, लेकिन फिर वे संदीप से मिले. संदीप ने पिता के 18 साल पुराने कर्ज के 55 लाख रुपए रावतसर के विभिन्न व्यापारियों को चुकाए. संदीप की ईमानदारी से गद्गद हुए व्यापार मंडल उसे सलाम करते हुए सम्मानित भी किया.

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संदीप ने जिस तरह अपने पिता का 18 साल पुराना कर्ज चुकाया है. वह आज के दौर में एक मिसाल है. यह साबित करता है कि ईमानदारी आज भी जिंदा है. हरपाल सिहाग, अध्यक्ष, व्यापार मंडल, रावतसर


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First published: June 9, 2019, 11:32 AM IST
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