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जैविक गुरु भंवर सिंह का नवाचार: कम लागत पर मिलेगी अधिक उपज और दाम, जानिये कैसे

सिंह ने पहले मध्यप्रदेश के उज्जैन में अपने दोस्त योगेंद्र कौशिक की जमीन पर फसल उगाकर किया और सबको हैरान कर दिया. उसके बाद उन्होंने अब यही प्रयोग अपने मूल गांव 24 एसटीजी में भी किया है.
सिंह ने पहले मध्यप्रदेश के उज्जैन में अपने दोस्त योगेंद्र कौशिक की जमीन पर फसल उगाकर किया और सबको हैरान कर दिया. उसके बाद उन्होंने अब यही प्रयोग अपने मूल गांव 24 एसटीजी में भी किया है.

Innovation: ऑर्गेनिक खेती के राजस्थान सरकार के ब्रांड एम्बेसडर जैविक गुरु भंवर सिंह पीलीबंगा (Organic guru Bhanwar Singh) कम लागत में अधिक उपज और मुनाफा कमाकर किसानों को नई राह दिखा रहे हैं.

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हनुमानगढ़. आज जहां खेती (Agriculture) घाटे का सौदा बनती जा रही है और किसान लागत से परेशान हैं. वहीं हनुमानगढ़ जिले की पीलीबंगा तहसील के 24 एसटीजी गांव निवासी जैविक गुरु भंवर सिंह (Organic guru Bhanwar Singh) किसानों के लिए एक उम्मीद बनकर उभरे हैं. आज जहां बड़े जमींदार खेती में नवाचार (Innovation) करने से हिचक रहे हैं वहीं मात्र 1 बीघा जमीन के मालिक भंवर सिंह पीलीबंगा ने वो कर दिखाया जो बड़े-बड़े जमींदार नहीं कर सके. भंवर सिंह ने अपने नवाचार में जहां खेती की लागत कम की है. वहीं बीज कम डालकर उपज भी ज्यादा ली है. यही नहीं ऑर्गेनिक खेती कर सिंह फसल की कीमत भी भरपूर ले रहे हैं.

ऐसा प्रयोग उन्होंने पहले मध्यप्रदेश के उज्जैन में अपने दोस्त योगेंद्र कौशिक की जमीन पर फसल उगाकर किया और सबको हैरान कर दिया. उसके बाद उन्होंने अब यही प्रयोग अपने मूल गांव 24 एसटीजी में भी किया है. आमतौर पर गेहूं की फसल के लिए किसान घग्घर फ्लड एरिया में 1 बीघा जमीन में करीब 40 से 60 किलो बीज डालता है. लेकिन भंवर सिंह ने घग्घर फ्लड एरिया में ही अपनी 1 बीघा जमीन में 8 किलो बीज डालकर ही 60 किलो बीज के बराबर बिजाई कर डाली.

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गोबर जैसी ऑर्गेनिक और सस्ती खाद की ही जरुरत होगी
जैविक गुरु भंवर सिंह ने जहां बीज की लागत को बहुत ज्यादा कम कर दिया वहीं ऑर्गेनिक खेती होने के कारण इसमें महंगी दवा और पेस्टीसाइड की भी इसमें आवश्यकता नहीं होगी. जरूरत पड़ने पर गोबर जैसी ऑर्गेनिक और सस्ती खाद की ही जरुरत होगी. इसके अलावा ऑर्गेनिक गेहूं होने के कारण कीमत भी ज्यादा मिलेगी. यानी लागत कम और ज्यादा उपज के साथ ही फायदा भी अधिक. उज्जैन में अपने दोस्त योगेंद्र कौशिक के खेत में भंवर सिंह ने नवाचार करते हुए एक बीघा जमीन में 25 क्विंटल ऑर्गेनिक गेहूं की फसल ली. जबकि आमतौर पर किसान को पेस्टीसाइड युक्त जहरीली गेहूं की फसल भी 16 क्विंटल प्रति बीघा से ज्यादा नहीं मिल पाती है. भंवर सिंह के इस नवाचार को देखने किसान उनके खेत पर आ रहे हैं और उसकी सराहना कर रहे हैं.

सिंह ऑर्गेनिक खेती के राजस्थान सरकार के ब्रांड एम्बेसडर भी हैं
दरअसल भंवर सिंह हमेशा से सोचते थे कि उनका इलाका और पूरा हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर जिला जहर युक्त खेती की चपेट में आ रहा है. इसके चलते कैंसर रोग घर-घर में फैल रहा है. ऐसे में मात्र 1 बीघा जमीन का मालिक होते हुए भी उन्होंने जहर मुक्त खेती के नवाचार के प्रयास किये और देशभर में ऑर्गेनिक खेती की अलख जगाई. इस कारण उनको जैविक गुरु कहा जाता है. वे ऑर्गेनिक खेती के राजस्थान सरकार के ब्रांड एम्बेसडर भी हैं. साथ ही कई यूनिवर्सिटी से उनको डॉक्टरेट की उपाधि भी मिली है.

बीज प्रगतिशील किसान के हाथों से उसी के द्वारा उसके ट्रैक्टर से खेत में डलवाया
सिंह के मन में विचार आया कि हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर जिले में उगाया जाने वाला गेहूं पूरे देश में खाया जाता है तो इस बार उन्होंने करनाल यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार किये गए गेहूं के बीज करण वंदना को पहले उज्जैन और अब अपने गांव में उगाया. भंवर सिंह के अनुसार किसानों को यकीन हो इसलिए उन्होंने बीज भी गांव के ही एक प्रगतिशील किसान के हाथों से उसी के द्वारा उसके ट्रैक्टर से खेत में डलवाया.

बिना दवा और पेस्टीसाइड के और कम बीज में ज्यादा उपज हो सकती
भंवर सिंह के नवाचार पर ग्रामीणों का कहना है कि अगर बिना दवा और पेस्टीसाइड के और कम बीज में ज्यादा उपज हो सकती है और वो भी ऑर्गेनिक तो निश्चित रूप से खेती घाटे का सौदा नहीं रहेगी. भंवर सिंह की जहर मुक्त संतुलित पद्धति की खेती से बीमारियां भी खत्म होंगी और नागरिकों को बिना जहर का खानपान मिलेगा. उज्जैन में जहर मुक्त गेहूं उगाने के बाद इस बार भंवर सिंह ने पीलीबंगा में अपने गांव में जहर मुक्त संतुलित पद्धति से खेती की है. इसमें सिर्फ आवश्यक न्यूट्रिशन ही फसल को दिए जाएंगे. किसान भी इस नवाचार को बड़ी उम्मीदों से देख रहे हैं.
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