कभी दिखाते थे कुश्ती के दांव, अब उड़ाते हैं राफेल, ऐसा है विंग कमांडर अभिषेक का सफर
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कभी दिखाते थे कुश्ती के दांव, अब उड़ाते हैं राफेल, ऐसा है विंग कमांडर अभिषेक का सफर
जालोर के विंग कमांडर अभिषेक.

भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) के बेड़े की खास ताकत के तौर पर शामिल होने जा रहे राफेल (Rafael) के आगमन के बाद 20 अगस्त के आसपास औपचारिक इंडक्शन कार्यक्रम होगा.

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जालोर. राजस्थान (Rajasthan) के जालोर शहर के ब्रह्मपुरी में रहने वाले अनिल त्रिपाठी के घर जन्मा नन्हा आर्य वीर दल का पहलवान कुश्ती के दांव-पेच के बाद अब आसमान के सिंकदर राफेल (Rafale Figher Jets) से उड़ान भरने लगा है. हम बात कर रहे हैं विंग कमांडर अभिषेक त्रिपाठी की, जो 7000 किलोमीटर दूर फ्रांस से राफेल के साथ उड़ाने भरने के बाद बुधवार को अंबाला एयरबेस (Ambala Airbase) पर पहुंचेंगे. जालोर में प्रारम्भिक शिक्षा के बाद दिल्ली की जेएनयू से एमएससी करने वाले अभिषेक की इस उड़ान को लेकर पूरे जालोर शहर में खुशी का माहौल है. मित्र, रिश्तेदार, पड़ोसी और जालोरवासी अभिषेक की यादों को सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं.

आर्य वीर दल की शाखाओं में बचपन में पहलवान बनकर कुश्ती के दांव-पेच सीख कर प्रतिद्वंदी को हराने का जज्बा रखने वाले अभिषेक त्रिपाठी ने आकाश के सिकंदर राफेल को उड़ाने में भी महारत हासिल की है. चंद घंटों बाद भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े में शामिल होने जा रहे राफेल फाइटर विमान को फ्रांस से उड़ान भरकर भारत सुरक्षित लाने के लिए जो भारतीय फाइटर पायलट फ्रांस गए हैं, उनमें से एक अभिषेक त्रिपाठी भी हैं.

बचपन से हैं मेधावी



अभिषेक का जन्म जालोर में 9 जनवरी 1984 को हुआ. इनके पिता अनिल कुमार त्रिपाठी भूमि विकास बैंक में तथा मां मंजू त्रिपाठी सेल टैक्स विभाग में कार्यरत थीं. अभिषेक त्रिपाठी और उनके छोटे भाई अनुभव त्रिपाठी जो वर्तमान में अमेरिका में एक मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर हैं, दोनों का बचपन जालोर स्थित गुर्जरों का बास राजेंद्र नगर में बीता. दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई इमानुएल सेकंडरी स्कूल में की. यह दोनों भाई बचपन से ही पढ़ने में मेधावी छात्र रहे हैं.
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जानकारी के मुताबिक, भारतीय वायु सेना के बेड़े की खास ताकत के तौर पर शामिल होने जा रहे राफेल के आगमन के बाद 20 अगस्त के आसपास औपचारिक इंडक्शन कार्यक्रम होगा. इससे पहले ये भी कहा जा चुका है ​कि हालात के मद्देनज़र इन लड़ाकों का पहला इस्तेमाल लद्दाख में हो सकता है क्योंकि वायुसेना वहां पहले ही ज़मीनी सेना की मदद के लिए कॉम्बैट एयर पैट्रोलिंग कर रही है. जानिए कि इन विमानों की लैंडिंग के लिए अंबाला एयरबेस ही क्यों चुना गया.
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