Rajasthan : 86 संगठनों के 200 प्रतिनिधियों ने लिखा राज्यपाल को पत्र, विधानसभा सत्र बुलाने की गुजारिश की
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Rajasthan : 86 संगठनों के 200 प्रतिनिधियों ने लिखा राज्यपाल को पत्र, विधानसभा सत्र बुलाने की गुजारिश की
सियासी संकट दूर करने के लिए राज्यपाल को लब्धप्रतिष्ठ लोगों ने खत लिखा.

पत्र में मांग की गई है कि राज्य में स्थिरता लाई जाए. कैबिनेट द्वारा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के फैसले की मर्यादा रखते हुए विधानसभा का सत्र तुरंत बुलाया जाए और राज्य में बहुमत की सरकार स्थापित की जाए.

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  • Last Updated: July 25, 2020, 10:57 PM IST
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जयपुर. राज्य में पिछले 15 दिन से चल रहे राजनीतिक संकट (Political Crisis) को लेकर चिंतित राजस्थान (Rajasthan) के 86 विभिन्न जन संगठन और प्रसिद्ध व्यक्तियों ने राज्यपाल (Governor) कलराज मिश्र (Kalraj Mishra) को पत्र लिखा है. पत्र लिखने वालों में अरुणा रॉय, डॉ. लाड कुमारी जैन, पीएल मीमरोथ, धर्मचंद खैर, राधाकांत सक्सेना, डीके छगानी, मो. नाजीमुद्दीन सहित प्रदेश के जन संगठनों के लगभग 200 प्रतिनिधियों के नाम शामिल हैं. पत्र के जरिए इन लोगों ने कहा है कि प्रदेश और देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में कोविड-19 (Covid-19) जैसी महामारी फैली हुई है और पूरी दुनिया इस महामारी से लड़ रही है. राजस्थान की जनता ने भी इस महामारी से पूरी तरह मुकाबला किया है और आज भी कर रही है. ऐसे समय में राज्य में राजनीतिक स्थिरता और सुशासन की आवश्यकता है. राज्य में संवैधानिक संकट उत्पन्न होना बहुत ही दुखद है.

राज्य के महामहिम राज्यपाल को लिखे गए पत्र में मांग की गई है कि राज्य में स्थिरता लाई जाए. कैबिनेट द्वारा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के फैसले की मर्यादा रखते हुए विधानसभा का सत्र तुरंत बुलाया जाए और राज्य में बहुमत की सरकार स्थापित की जाए.

पत्र में बताया गया है कि विभिन्न संगठनों की ओर से संवैधानिक एवं कानूनी पहलुओं पर कई विशेषज्ञों से सलाह ली गई है और उन सबने एकमत में कहा है कि -



- भारत के सविधान के अनुछेद 174 व उच्चतम न्यायलय के 1994, बोम्मई (कर्नाटक राज्य ), 2016, रेबिया (अरुणाचल राज्य) और 2020 शिवराज सिंह (मध्य प्रदेश) तीन फैसलों से स्पष्ट है कि केवल विधानसभा पटल पर ही कोई दल संवैधानिक तरीके से अपना बहुमत साबित कर सकता है.
- अनुछेद 174 के तहत राज्य मंत्रिमंडल की सलाह पर महामहिम राज्यपाल विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए बाध्य हैं.

- अगर महामहिम राज्यपाल तथ्यों के आधार पर समझ बनाते हैं कि सरकार अल्पमत में है, तो विधानसभा का सत्र बुलाकर सदन के पटल पर बहुमत साबित करवा सकते हैं.

किसी भी परिस्थिति में महामहिम राज्यपाल, राज्य मंत्रिमंडल द्वारा विधानसभा का सत्र बुलाने की सलाह को न इनकार कर सकते हैं, न उसमें देरी कर सकते हैं.
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